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जिंदगी में गलत कदम उठाने से रोकती है ‘जीवन संवाद’ किताब

कभी-कभी किसी एक बात, किसी का कहा एक प्रेरणादायक वाक्य या किसी किताब की कहानी आपको जीवन में गलत करने से रोक देती है. आपको तनाव और डिप्रेशन से बाहर निकाल देती है. ऐसी ही एक किताब है जीवन संवाद.

जीवन संवाद किताब का आवरण पृष्ठ. जीवन संवाद किताब का आवरण पृष्ठ.

कभी-कभी किसी एक बात, किसी का कहा एक प्रेरणादायक वाक्य या किसी किताब की कहानी आपको जीवन में गलत करने से रोक देती है. आपको तनाव और डिप्रेशन से बाहर निकाल देती है. ऐसी ही एक किताब है जीवन संवाद. इस किताब में अवसाद और खुदकुशी के खिलाफ लड़ने के हौसलों की कहानियां हैं. प्रेरक प्रसंग हैं. असल में ये किताब मशहूर वेब सीरीज 'डियर जिंदगी- जीवन संवाद' का संकलन है. इसे लिखा है वरिष्ठ पत्रकार दयाशंकर मिश्र ने. इस पुस्तक को संवाद प्रकाशन ने प्रकाशित किया है.

लेखक दयाशंकर मिश्र ने बताया कि वेबसीरीज के रूप में लिखे गए 650 आलेखों में से 64 चुनिंदा लेख को पुस्तक के रूप में ढाला गया है. अब तक ऐसे 8 लोग हैं जो खुदकुशी करने वाले थे, लेकिन इन आलेखों को पढ़कर उन्होंने जीने की राह चुनी. यह किताब खुद को बहुत फिट और और तेजतर्रार दिखाने वाली व्यक्तित्व विकास की किताबों जैसी नहीं है. उन्‍होंने कहा, किताब परवरिश के साथ बच्‍चों के मन, अवसाद के कारण और मन के आत्‍महत्‍या तक पहुंचने के कारणों की विस्‍तार से बात करती है. उन्‍होंने कहा क‍ि अवसाद की गुत्‍थी खोलकर आत्‍महत्‍या से बचाने वाली किताब है जीवन संवाद. किताब के रूप में आने से पहले इस वेबसीरीज को एक करोड़ से ज्यादा लोग पढ़ चुके हैं.

इस किताब का लोकार्पण हाल ही में इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में हुआ. इस मौके पर वरिष्ठ आलोचक डॉ. विजय बहादुर सिंह, वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी धर्मेंद्र सिंह, मध्य प्रदेश माध्यम के संपादक पुष्पेंद्र पाल सिंह और किताब में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली कैंसर सर्वाइवर शील सैनी ने किया. कार्यक्रम का संचालन वरिष्ठ पत्रकार, जेल सुधारक और मीडिया शिक्षक डॉ. वर्तिका नंदा ने किया.

जैसे कृष्ण ने अर्जुन को प्रेरणा दी, वैसी है ये किताबः डॉ. विजय बहादुर
इस मौके पर डॉ. विजय बहादुर सिंह ने कहा कि यह किताब वैसी ही प्रेरणादायक है जैसे भगवान कृष्ण ने अवसाद में घिरे अर्जुन को प्रेरणा दी थी. यह मनुष्य को दुखों से लड़ने की वैसी ही ताकत देती है, जैसी ताकत सत्य हरिश्चंद्र, भगवान राम और धर्मराज युधिष्ठिर के जीवन चरित्र से मिलती है.

परिवर्तन की आकांक्षा है इस किताब मेंः पुष्पेंद्र पाल सिंह
पुष्पेंद्र पाल सिंह ने कहा कि 'स्वांत: सुखाय' की बजाय परिवर्तन की आकांक्षा के साथ लिखी गई पुस्तक है. यह युवाओं के साथ बच्‍चों के लिए भी उपयोगी है. क्योंकि एक तरफ युवा पीढ़ी पर रोजगार पाने का दबाव रहता है और दूसरी तरफ यही उम्र प्रेम और भावुकता की भी होती है. ऐसे में कई बार दबाव में नौजवान घातक कदम उठा लेते हैं. वे किसी से अपनी परिस्थिति साझा नहीं कर पाते हैं और भीतर के अंधेरे की तरफ चल निकलते हैं. यह किताब ऐसे ही युवाओं के लिए है.

डिप्रेशन के बारे में बताना शर्म की बात नहींः धर्मेंद्र सिंह
धर्मेंद्र सिंह ने कहा कि भारत में अभी लोग मानसिक स्वास्थ्य को लेकर बहुत सजग नहीं हैं. यही नहीं अभी हम उस पुरानी धारणा से ग्रसित हैं, जिसमें अवसाद या डिप्रेशन के बारे में दूसरों को बताना शर्म की बात समझा जाता है. हमारी यह रूढ़ियां मानसिक समस्याओं को और ज्यादा बढ़ा देती हैं. ऐसे में यह किताब मानसिकता बदलने में लोगों की मदद करेगी.

दुख के क्षणों में होगी मददगार: शील सैनी

कैंसर सर्वाइवर शील सैनी ने अपनी कहानी सुनाई. उन्होंने बताया कि वे अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रही थीं. तब उन्होंने जीवन संवाद के डिजिटल लेख पढ़े. इस किताब ने उन्हें दुख से बाहर निकाला. शील ने बताया कि यह किताब सिर्फ अवसाद से लड़ने के लिए नहीं है. इसके जरिए आप किसी भी प्रकार के दुख से लड़ सकते हैं.

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