हम दुष्यंत कुमार को जिन वजहों से जानते हैं उसमें सबसे अहम है उनकी शायरी. उन्होंने शायरी को उर्दू-हिंदुस्तानी से निकालकर हिंदी के विशाल पाठकों तक पहुंचाया. वे कितने लोकप्रिय हैं इसका अंदाजा इस बात से भी लगा सकते हैं कि उनकी ग़ज़लों का संग्रह साये में धूप हर उस पाठक के पास है जो हिंदी पढ़ने में दिलचस्पी रखता है. साये में धूप का पहला संस्करण 1975 में आया था. अब तक इस संग्रह के ना जानें कितने संस्करण आ चुके हैं.
New episode of Kitabon Ki Baatein on famous Hindi poet Dushyant Kumar.