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लड़कों के साथ पढ़ने वाली लड़कियों को होती हैं ये समस्याएं

हाल में हुए एक शोध के मुताबिक, को-एजुकेशन में लड़कियों पर बहुत अधिक दबाव होता है. ये प्रेशर सामाजिक होता है और लड़कियां इससे आंतरिक रूप से प्रभावित होती हैं.

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आम धारणा है कि को-एजुकेशन में पढ़ने वाले बच्चे ज्यादा स्मार्ट और एक्ट‍िव होते हैं. इस धारणा का ही असर है कि आज के समय में लगभग हर माता-पिता अपने बच्चे को ऐसी जगह शिक्षा देना चाहते हैं जहां लड़के और लड़कियां साथ पढ़ते हों. माता-पिता का ख्याल होता है कि ऐसी जगह पढ़ने से उनका बच्चा बेहतर तरीके से कम्यूनिकेट करना सीख पाएगा.

ये तो रही आम धारणा और उसका असर लेकिन हाल में हुए एक शोध के मुताबिक, को-एजुकेशन में लड़कियों पर बहुत अधिक दबाव होता है. ये प्रेशर सामाजिक होता है और लड़कियां इससे आंतरिक रूप से प्रभावित होती हैं.

जिन स्कूलों में लड़के और लड़कियां साथ पढ़ते हैं वहां लड़कियों को हमेशा इस बात की चिंता सताती रहती है कि वे कैसी दिख रही हैं. उन्हें हमेशा ये फिक्र लगी रहती है कि वो अच्छी नजर आ रही हैं या नहीं.

वहीं गर्ल्स कॉलेज या स्कूल में पढ़ने वाली लड़कियों को ऐसी कोई चिंता नहीं होती है. लड़कों के साथ पढ़ाई करने वाली लड़कियों को लगता है कि वो हमेशा परफेक्ट शेप में रहें. जरा सा भी वजन बढ़ने पर उनका आत्मविश्वास हिल जाता है. वे पढ़ाई पर पूरा ध्यान नहीं दे पाती हैं और ज्यादातर वक्त अपने लुक को ही ठीक करने में बिताती हैं. वहीं उनके विपरीत माहौल वाली लड़कियों में अपनी शारीरिक बनावट और व्यक्त‍ित्व को लेकर कोई हीन भावना नहीं होती है.

यूनिवर्सिटी ऑफ ब्रिस्टल के शोधकर्ता जानना चाहते थे कि लड़कियों के आत्मविश्वास को कौन-कौन से कारक प्रभावित करते हैं. इसके लिए शोधकर्ताओं ने दो ऐसे स्कूलों की छात्राओं से बातचीत की जो सोशियोइकोनॉमिक स्तर पर समान थे लेकिन एक जगह सिर्फ लड़कियां ही पढ़ती थीं और दूसरे में लड़के और लड़कियां दोनो.

शोधकर्ताओं का कहना है कि लड़कों की मौजूदगी से लड़कियां बहुत संवेदनशील और असहज हो जाती हैं और उनका आत्म-विश्वास डगमगा जाता है. उन्हें पढ़ाई से ज्यादा इस बात की परवाह रहने लगती है कि वो दिख कैसी रही हैं.

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