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प्रेग्नेंसी में एंटी डिप्रेशन दवा लेना हो सकता है खतरनाक

एंटी डिप्रेशन दवाएं होने वाले बच्चे पर गहरा असर डालतीं हैं.

प्रतीकात्मक तस्वीर प्रतीकात्मक तस्वीर

प्रेग्नेंसी के दौरान महिलाएं कई तरह के शारीरिक और भावनात्मक बदलावों से गुजरती हैं. इन होने वाले बदलावों से कभी-कभी डिप्रेशन का भी एहसास होता है. डिप्रेशन से बचने के लिए कई महिलाएं तरह-तरह की दवाएं भी लेती हैं.

लेकिन क्या आप जानते हैं कि एंटी डिप्रेशन दवाएं होने वाले बच्चे पर कितना गहरा असर डालतीं हैं? एक स्टडी के मुताबिक एंटी डिप्रेशन दवाओं का प्रभाव बच्चे के दिमाग पर पड़ता है. वाशिंगटन यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ मेडिसिन के शोधकर्ताओं ने बताया कि  उन्होंने इसका प्रयोग पहले जानवरों पर किया.

जिन जानवरों को गर्भावस्था के समय एंटीडिप्रेसेंट दिया गया था उनके बच्चों में शारीरिक रूप से कुछ महसूस करने की क्षमता नहीं बची थी.  हालांकि कि स्टडी में ये दावा नहीं किया गया कि जैसा परिणाम जानवरों पर देखने को मिला मनुष्यों पर भी ठीक वैसा ही परिणाम होगा, लेकिन ये दवाएं किसी भी किस्म के भ्रूण के लिए खरतनाक हैं.

मायो क्लिनिक के मुताबिक प्रेग्नेंसी में लगभग 7 फीसदी महिलाओं को डिप्रेशन महसूस होता है. डिप्रेशन में रहने वाली महिलाओं में प्रीमैच्योर डिलीवरी और कम वजन वाले बच्चे पैदा करने का खतरा ज्यादा होता है.

स्टडी के लेखकों का कहना था कि डॉक्टर्स में भी डिप्रेशन के लिए दवाएं लिखने का चलन बढ़ गया है, जो की गलत है. इससे पहले भी हुए कई रिसर्च में कहा गया है कि डिप्रेशन की दवाएं लेने से दिल की बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है.

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