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क्या मां के दूध का ये कलर होता है नॉर्मल? कब जाएं डॉक्टर के पास

Breast Milk Colour: ब्रेस्ट मिल्क नवजात शिशुओं की सेहत के लिए काफी फायदेमंद माना जाता है. अक्सर महिलाओं के ब्रेस्ट से अलग-अलग रंग का दूध निकलता है जिसके कारण वह काफी डर जाती हैं. तो आइए जानते हैं अलग-अलग कलर के ब्रेस्ट मिल्क का क्या मतलब होता है और कब आपको इसके लिए डॉक्टर को दिखाना चाहिए.

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Breast Milk Colour (Photo Credit: Getty Images) Breast Milk Colour (Photo Credit: Getty Images)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • जानें क्या होता ब्रेस्ट मिल्क के अलग-अलग कलर का मतलब
  • ब्रेस्ट मिल्क में कौन सा कलर नजर आने पर करें डॉक्टर से संपर्क

मां का दूध सभी नवजात शिशुओं के लिए काफी फायदेमंद माना जाता है. मां के दूध में कई तरह के पोषक तत्व होते हैं जो नवजात शिशु के विकास के लिए फायदेमंद माने जाते है. डिलीवरी के तुरंत बाद मां के ब्रेस्ट से निकलने वाला पीले रंग का दूध नवजात शिशुओं के लिए काफी जरूरी माना जाता है. इस दूध में प्रोटीन और एंटी बॉडी गुण पाए जाते हैं जो नवजात बच्चों की इम्यूनिटी लेवल को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. 

आमतौर पर ब्रेस्ट मिल्क का कलर सफेद, पीला और क्रीम कलर का होता है लेकिन कई बार दूध का कलर हरा, गुलाबी या लाल रंग का भी हो सकता है. ऐसे में आइए जानते हैं ब्रेस्ट मिल्क के अलग-अलग कलर का क्या मतलब होता है. 

व्हाइट- अधिकतर महिलाओं के ब्रेस्ट मिल्क का कलर ऑफ-व्हाइट और क्रीम होता है. लेकिन इसका कलर क्लियर भी हो सकता है. ऐसा तब होता है जब ब्रेस्ट से मैच्योर मिल्क निकलना शुरू हो जाता है. डिलीवरी के  2 हफ्तों के बार ब्रेस्ट से मैच्योर मिल्क निकलना शुरू होता है.

हाइंडमिल्क उसे कहा जाता है जब स्तनपान करवाते-करवाते दूध में फैट की मात्रा बढ़ जाती है. दूध में फैट बढ़ने से इसका कलर गाढ़ा सफेद या पीले रंग का हो सकता है. 

ऑरेंज और येलो- ब्रेस्ट से ऑरेंज और येलो कलर का दूध निकलने पर अक्सर महिलाएं काफी ज्यादा डर जाती हैं लेकिन आपको बता दें कि इसमें डरने की कोई बात नहीं होती.  ऑरेंज दूध आमतौर पर कोलोस्ट्रम के दौरान बनता है, यह सबसे पहला ब्रेस्ट मिल्क होता है. यह आमतौर पर ऑरेंज इसलिए दिखाई देता है क्योंकि इसमें उच्च मात्रा में बीटा- कारोटीन मौजूद होता है.

बीटा- कारोटीन एक प्लांट पिगमेंट होता है जो आमतौर पर गाजर, शकरकंद और अलग-अलग तरह की शिमलामिर्च में पाया जाता है. ऑरेंज मिल्क बहुत कम मात्रा में ही निकलता है.  जन्म के बाद पहले कुछ दिनों में आपके स्तन जो तरल पदार्थ पैदा करते हैं उसे कोलोस्ट्रम कहा जाता है. 

नीला- ब्रेस्ट से नीले रंग का मिल्क निकलना भी काफी आम होता है लेकिन इसका ये मतलब नहीं कि आपका बच्चा इसे पी नहीं सकता है. यह दूध पतला होता है और इसमें फैट कम और इलेक्ट्रोलाइट्स अधिक होते हैं. 

हरा- आप जो कुछ भी खाती हैं उसका असर भी आपके ब्रेस्ट मिल्क पर पड़ता है. जब आप हरी रंग की सब्जियों का सेवन करती हैं उसके कारण आपके ब्रेस्ट मिल्क का कलर हरा दिखाई देता है. तो इसके लिए आपको घबराने की कोई जरूरत नहीं है.

पिंक या रेड- जिन खाद्य पदार्थों का रंग गुलाबी या लाल होता है उनका सेवन करने से भी ब्रेस्ट मिल्क का कलर बदल सकता है. जब आप चुकंदर, ऑरेंज जूस या लाल रंग के फलों का सेवन करते हैं तो उससे भी ब्रेस्ट मिल्क के कलर में बदलाव आता है. 

ब्राउन- जन्म देने के कुछ दिनों तक ब्रेस्ट से भूरे रंग का दूध निकलता है, ऐसे में इससे घबराने की कोई जरूरत नहीं होती. यह दूध आपके बच्चे के लिए बिल्कुल सेफ होता है. कई बार स्‍तनों के अंदर से खून दूध की नलियों में भी आ सकता है. इससे भी दूध का रंग ब्राउन नजर आ सकता है. दूध में हल्का खून का दिखाई देना खतरनाक नहीं होता यह कुछ ही दिनों में अपने आप ठीक हो जाता है. लेकिन अगर यह कई दिनों तक भी ठीक ना हो तो अपने डॉक्टर को जरूर दिखाएं.

काला- कई बार कुछ दवाईयों का सेवन करने से आपके दूध का रंग काला नजर आ सकता है. ऐसा तब होता है जब आप एंटीबायोटिक्स का सेवन कर रही हैं तो. एंटीबायोटिक मिनोसिन भी त्वचा को काला कर देते हैं और स्तनपान कराने वाली महिलाओं को इसका सेवन ना करने की सलाह दी जाती है. अगर आप स्तनपान करा रही हैं और आपको दवा लेने की जरूरत है  तो आपको हमेशा अपने डॉक्टर को इसके बारे में पहले बताना चाहिए.

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