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एक ऐसे बच्चे की कहानी जिसे उसका टीचर नंगा करके पढ़ाता था...

मां-बाप को समझ ही नहीं आ रहा था उनका होशियार बेटा अचानक से बुद्धू कैसे बन गया. सबकुछ पहले के जैसा ही था फिर ऐसा क्या हो गया जो उनका बेटा गुमसुम हो गया...

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रूचिर अरूण के निर्देशन में बनी ये फिल्म बाल यौन शोषण के मुद्दे पर बात करती है रूचिर अरूण के निर्देशन में बनी ये फिल्म बाल यौन शोषण के मुद्दे पर बात करती है

ये कहानी अपू की है. अपू हमारे आपके घर के किसी भी आम बच्चे की तरह ही था. खेलता था...पढ़ता भी था और कहानियां भी बुनता था. दस साल के अप्पू की जिंदगी भी किसी वक्त नॉर्मल रही होगी लेकिन अचानक से उसकी जिंदगी बदल गई.

शाम 5 बजते ही वो गुमसुम हो जाता. मम्मी को लगता पढ़ना नहीं चाहता है, ट्यूशन नहीं जाना चाहता...इसलिए मुंह बिगाड़कर बैठा है. पांच बजने वाले होते तो उसकी नजरें घड़ी की सुइयों पर अटक जातीं. बड़ी वाली सुई जैसे ही 12 पर पर पहुंचती, अपू की आंखें फैल जातीं.

मां-बाप को समझ ही नहीं आ रहा था कि उनका होशियार बेटा अचानक से बुद्धू कैसे बन गया. सबकुछ पहले के जैसा ही था फिर ऐसा क्या हो गया जो उनका बेटा गुमसुम हो गया...

5 O'Clock Accidents अपू की कहानी है. पूरी फिल्म में आपको एक डरा-सहमा हुआ बच्चा दिखता है. डायरेक्टर रूचिर अरूण और प्रोड्यूसर अश्व‍िनी मिश्रा ने इस फिल्म के माध्यम से child sexual abuse के मुद्दे को उठाया है.

हालांकि ये कोई पहली फिल्म नहीं है जो child sexual abuse पर बात करती है. इससे पहले बहुत सी फिल्में इस मुद्दे पर बन चुकी हैं लेकिन ये कहने में कोई हिचक नहीं है कि रूचिर अरूण ने फिल्म को कहने के लिए जो तरीका अपनाया है, वो वाकई बहुत नया है.

फिल्म एक ऐसे मोड़ पर आकर खत्म होती है, जहां सिर्फ सवाल मिलते हैं. आप भी देखिए ये शॉर्ट फिल्म...हो सकता है, आपके बच्चे की खामोशी की भी वजह यही हो.

देखें ये शॉर्ट फिल्म:

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