देश में साल 1990 से 2016 के बीच हार्ट डिजीज (हृदय रोग) के मरीजों में 50 फीसदी की वृद्धि हुई है, जबकि डायबिटीज (मधुमेह) के मरीजों में 150 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई है. एक रिपोर्ट में यह बात सामने आई है. मोदी सरकार लोगों की सेहत की चिंता को लेकर ही आयुष्मान भारत जैसी योजना शुरू कर रही है. ऐसे में इस तरह की रिपोर्ट चिंताजनक है.
डायबिटीज से पीड़ित भारतीयों की संख्या 1990 में 2.6 करोड़ थी, जो 2016 में बढ़कर 6.5 करोड़ हो गई. फेफड़ों के मरीजों की संख्या इस दौरान 2.8 करोड़ से बढ़कर 5.5 करोड़ हो गई.
इंडियन कौंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर), पब्लिक हेल्थ फाउंडेशन ऑफ इंडिया (पीएचएफआई) और इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ मेट्रिक्स ऐंड इवोल्यूशन (आईएचएमई) की एक संयुक्त रिपोर्ट में यह बात सामने आई है.
कैंसर के मरीज हुए दोगुने
रिपोर्ट के अनुसार देश में 1990 के बाद से कैंसर मरीजों की संख्या दोगुनी हो चुकी है. समाचार एजेंसी आईएएनएस के मुताबिक, यह रिपोर्ट 1990 के बाद उपलब्ध बीमारियों के दर्ज आंकड़ों के आधार पर तैयार की गई है. इसे तैयार करने में विशेषज्ञों के अलावा देश भर के 100 से अधिक संस्थानों ने भी योगदान दिया है.
पिछड़े राज्यों में हैं ज्यादा मरीज
आईसीएमआर के महानिदेशक और स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के स्वास्थ्य शोध विभाग के सचिव प्रोफेसर बलराम भार्गव ने कहा, 'सबसे चिंता की बात यह है कि देश के पिछड़े राज्यों में सबसे ज्यादा हृदय रोग और मधुमेह के मरीज हैं. साथ ही, बच्चों को होने वाली बीमारियों से भी सबसे ज्यादा पीड़ित देश के पिछड़े राज्य ही हैं. इसलिए इन राज्यों में बीमारियों की रोकथाम के लिए अबिलंब कदम उठाए जाने की सख्त जरूरत है.'