Male infertility is rising: शादियों से पहले अक्सर लोग पहले एक-दूसरे की हेल्थ प्रॉब्लम्स के बारे में डिस्कस करते थे लेकिन समय के साथ अब ये ट्रेंड बदल गया है. अब कपल शादी से पहले हेल्थ चेकअप करवा रहे हैं और उनमें से भी शादी करने जा रहे कुछ कपल चुपचाप फर्टिलिटी टेस्ट करवा रहे हैं. फैमिली प्लानिंग को लेकर इस मामले में पुरुष भी गंभीरता दिखाते हुए फर्टिलिटी टेस्ट करा रहे हैं.
डॉक्टर्स के मुताबिक, ओपीडी में ऐसे कपल बढ़ गए हैं जो शादी के बाद किसी अनचाही परेशानी से बचने के लिए पहले ही अपना फर्टिलिटी टेस्ट करा रहे हैं ताकि आगे चलकर कोई परेशानी ना हो. दिलचस्प यह है कि कई मामलों में समस्या वहीं सामने आती है, जहां समस्या की कम उम्मीद होती है.
फर्टिलिटी एक्सपर्ट डॉ. अंजलि मालपानी ने इंडियन एक्सप्रेस से बताया, दुनिया भर में शुक्राणुओं की संख्या गिर रही है. 2022 में हुए एक मेटा-विश्लेषण के अनुसार, 2022 की मेटा-एनालिसिस में 1973 से 2018 के बीच पुरुषों में औसत स्पर्म कंसन्ट्रेशन में 51.6 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई.
डॉ. अंजलि का कहना है, 'WHO, 15 मिलियन प्रति मिलीलीटर को नॉर्मल रेंज का निचला स्तर मानता है. 1990 में जब मैंने देश का पहला स्पर्म बैंक शुरू किया था, तब डोनर के लिए इससे कहीं ज्यादा काउंट जरूरी होता था. आज वैसी स्थिति संभव ही नहीं.'
गुरुग्राम स्थित मेदांता हॉस्पिटल के यूरोलॉजी और रीनल केयर डिपार्टमेंट के प्रोफेसर एमेरिटस डॉ. नर्मदा प्रसाद गुप्ता का कहना है, 'हाल ही के महीनों में उनकी ओपीडी में ऐसे युवाओं की संख्या तेजी से बढ़ी है जो अपना फर्टिलिटी टेस्ट करा रहे हैं.
डॉ. गुप्ता ने एक केस को याद करते हुए बताया, 'एक कपल जिसकी शादी को 5 साल हो गए थे वो मेरे पास आया था. उनकी फैमिली के दबाव में जब फर्टिलिटी टेस्ट कराया गया तो लड़की के सारे टेस्ट नॉर्मल निकले. वहीं जब लड़के का टेस्ट कराया गया तो रिपोर्ट में जन्मजात समस्या के कारण लो स्पर्म काउंट सामने आया.'
'दूसरे मामले में एक लड़की ने शादी से पहले होने वाले दूल्हे का टेस्ट कराने की डिमांड की थी. यानी कि अब लड़कियां और लड़के दोनों अपने फ्यूचर में फर्टिलिटी की समस्याओं से बचने को लेकर मेंटली रूप से तैयार रहना चाहते हैं.'
'हालांकि अब भी महिलाओं को ही बांझपन से जोड़कर देखा जाता है लेकिन कुछ आंकड़े बताते हैं कि देश में कुल बांझपन के मामलों में से 40 प्रतिशत पुरुषों की वजह से, 40 प्रतिशत महिलाओं की वजह से, 10 प्रतिशत दोनों पार्टनर्स की वजह से और 10 प्रतिशत मामलों का कारण अभी तक पता नहीं चला.'
पुरुषों में बांझपन को आमतौर पर 1 साल तक रेगुलर और बिना प्रोटेक्शन के संबंध बनाने के बाद पार्टनर के प्रेग्नेंट ना होने की स्थिति को माना जाता है. डॉ. गुप्ता का कहना है, 'मामला सिर्फ स्पर्म काउंट का नहीं है. स्पर्म मोटेलिटी और उनके शेप (morphology) से भी है.
AIIMS की एक स्टडी में पुरुष बांझपन के जिन कारणों को सबसे कॉमन कारण माने गए थे उनमें एजूस्पर्मिया (जहां सैम्पल में स्पर्म ही नहीं मिलते) और OATS सिंड्रोम शामिल थे जिसमें स्पर्म की संख्या, मोटाइल स्पर्म मोटेलिटी (sperm motility) या शेप (morphology) नॉर्मल से कम होता है.
पुरुषों में फर्टिलिटी को प्रभावित करने वाले कारक महिलाओं की तरह ही हैं जैसे, उम्र बढ़ने के साथ स्पर्म की क्वालिटी गिरना, जिसे मेल बायोलॉजिकल क्लॉक कहा जाता है. इसके अलावा धूम्रपान, शराब, गलत खानपान, तनाव और लंबे वर्किंग ऑवर जैसी लाइफस्टाइल की आदतें स्पर्म डीएनए को नुकसान पहुंचाती हैं.
डॉ. गुप्ता हाल ही की रिसर्च का हवाला देते बताते हैं, 'एयर पॉल्यूशन, कैमिकल्स, माइक्रो और नैनोप्लास्टिक्स, हार्मोन-डिसरप्टिंग पदार्थ भी स्पर्म क्वालिटी को बुरी तरह प्रभावित कर रहे हैं. BPA, Phthalates और कई कीटनाशक शरीर के हार्मोन का संतुलन बिगाड़ देते हैं. PM 2.5 और हेवी मेटल्स जैसे प्रदूषक फ्री रेडिकल्स बनाते हैं जो स्पर्म डीएनए और टेस्टिस को नुकसान पहुंचाते हैं. नैनोप्लास्टिक्स स्पर्म प्रोटीन को ही खराब कर देते हैं.'