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लाइफस्टाइल

जानें- गर्भवती महिलाओं की भावनाओं का बच्चे पर क्या होता है असर?

जानें- गर्भवती महिलाओं की भावनाओं का बच्चे पर क्या होता है असर?
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मां बनना हर महिला के लिए सौभाग्य की बात होती है. हर गर्भवती महिला के अपने कुछ खास अनुभव होते हैं. गर्भावस्था के दौरान गर्भवती महिलाओं के मन में कई तरह की भावनाएं उत्पन्न होती हैं. गर्भवती महिला जो भी महसूस करती है उसका असर गर्भ में पल रहे शिशु पर पड़ता है.
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आइए जानें, गर्भ में शिशु को मां की किन-किन भावनाओं का अहसास होता है और क्यों...
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प्यार का अहसास होना- लोगों का प्यार और उनकी केयर पाना दुनिया का सबसे खूबसूरत अहसास होता है, क्योंकि ये अहसास हमें बेहद खास महसूस कराता है. इससे जहां एक ओर तनाव कम होता है, वहीं चेहरे पर चमक भी आ जाती है.
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गर्भावस्था के दौरान जब आपको दूसरों से प्यार मिलता है तो उसका सीधा असर गर्भ में पल रहे शिशु पर पड़ता है. साथ ही इससे ब्लड प्रेशर नॉर्मल रहता है और गर्भावस्था से संबंधित कई खतरे भी कम हो जाते हैं.
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जलन की भावना- जलन और ईर्ष्या की भावना लगभग हर व्यक्ति में होती है. लेकिन गर्भावस्था के दौरान गर्भवती महिलाओं को सभी प्रकार की नकारात्मक भावनाओं से दूर रहना चाहिए. दरअसल, व्यक्ति में जलन की भावना उत्पन्न होने से उनके शरीर में स्ट्रेस हार्मोन निकलता है, जो गर्भ में पल रहे शिशु पर बुरा असर डालता है.


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इसके अलावा जलन, बदले और ईर्ष्या की भावना से  गर्भवती महिलाओं को सोने और खाने में परेशानी भी हो सकती है. जो बच्चे की सेहत के लिए सही नहीं है.
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खुशी महसूस करना- अगर गर्भवती महिलाओं को किसी भी कारण खुशी का एहसास होता है, तो इससे गर्भ में मौजूद शिशु भी वही महसूस करता है. खुश रहने से गर्भवती महिला का ब्लड प्रेशर और हार्ट रेट संतुलित रहता है. साथ ही गर्भ में शिशु को ज्यादा खून पहुचंता है, जिससे शिशु में बीमारी और इंफेक्शन होने का खतरा कम हो जाता है.
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कॉन्फिडेंट महसूस करना- गर्भवती महिलाओं में आत्मविश्वास होने से सिर्फ उन्हें ही अच्छा महसूस नहीं होता है, बल्कि शिशु पर भी इसका अच्छा प्रभाव पड़ता है. हालांकि, गर्भावस्था की हालत में महिला को कई मुश्किलों का सामना करना पड़ता है, लेकिन जितना हो सके गर्भवती महिलाओं को अच्छा महसूस करने की कोशिश करनी चाहिए.
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बता दें, गर्भावस्था के दौरान खुद पर कॉन्फिडेंस रखने से मुहांसे होने की संभावना भी कम हो जाती है. साथ ही चेहरे पर ग्लो भी आता है.

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उदास होना- जब कोई आपका विश्वास तोड़ता है तो आपका दिल टूट जाता है. कहा जाता है कि किसी से धोखा खाने पर जो दर्द होता है वो शरीर पर लगी किसी चोट के समान होता है. इससे आपके मूड और भूख पर भी असर पड़ता है.
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लेकिन गर्भवती महिलाओं को इन सभी भावनाओं से खुद को दूर रखना चाहिए, क्योंकि मां के साथ ये सभी भावनाएं गर्भ में मौजूद शिशु भी महसूस करता है. इसलिए जीवन में चाहें अच्छा या बुरा कैसा भी समय आए गर्भवती महिलाओं को हमेशा खुश रहने की कोशिश करनी चाहिए, ताकि शिशु की सेहत अच्छी बनी रहे.

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ज्यादा चिंता करना- अधिकतर गर्भवती महिलाएं घर, परिवार, बच्चे का जन्म, बच्चे का फ्यूचर और कई दूसरी चीजों को लेकर काफी चिंतित रहती हैं. खासकर जो महिलाएं पहली बार मां बनती हैं उनमें ये चिंता ज्यादा देखी जाती है, क्योंकि जीवन में एक नए सदस्य के आने से जीवन पूरी तरह बदल जाता है.
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अगर आप भी उन महिलाओं में से एक हैं जो गर्भावस्था के दौरान ज्यादा चिंता करती हैं तो संभल जाएं. दरअसल, ज्यादा चिंता करने से शरीर में कोर्टिसोल हार्मोन निकलता है. ये हार्मोन डिप्रेशन, थकावट, सिर दर्द और ब्लड प्रेशर जैसी समस्याओं को बढ़ाने का काम करता है.

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बेहतर होगा कि गर्भवती महिलाएं चिंता होने पर योगा करें या सॉफ्ट म्यूजिक सुनें, जिससे उनको सुकून और शांति का अहसास हो सके.
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