भारत के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की तबीयत पिछले 24 घंटों
में ज्यादा बिगड़ गई है और उन्हें जीवन रक्षक प्रणाली पर रखा गया है.
दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) ने एक बयान जारी कर यह
जानकारी दी है.
अटल बिहारी वाजपेयी 11 जून से एम्स में भर्ती हैं, लेकिन सूत्रों के मुताबिक, पिछले 24 घंटों में उनकी हालत ज्यादा बिगड़ गई है और वह जीवन रक्षक प्रणाली पर हैं.
बता दें, यूरिन, सीने और किडनी में इंफेक्शन के साथ-साथ अटल बिहारी वाजपेयी एक बेहद गंभीर बीमारी 'डिमेंशिया' से जूझ रहे हैं और 2009 से ही व्हीलचेयर पर हैं. आइए जानते हैं इस गंभीर बीमारी डिमेंशिया के क्या लक्षण होते हैं और इससे कैसे बचा जा सकता है...
डिमेंशिया क्या है- डिमेंशिया एक ऐसी बीमारी है, जिसमें आप चीजों को भूलने लगते हैं. आप का मूड स्विंग होने लगता है. काम में मन नहीं लगता और साथ ही आप चिड़चिड़े स्वभाव के हो जाते हैं. इतना ही नहीं बल्कि, इस बीमारी में व्यक्ति के सोचने-समझने की क्षमता के साथ चीजों को याद रखने की क्षमता भी कम हो जाती है.
क्यों होता है डिमेंशिया- दिमाग में बीटा एमेलॉड नाम के प्रोटीन के जमा होने के कारण डिमेंशिया की बीमारी होती है. दरअसल, इसके कारण दिमाग के न्यूरांस नष्ट हो जाते हैं. इसी वजह से याद रखने की ताकत कम होने लगती है. डिमेंशिया के कई प्रकार होते हैं. अलग-अलग प्रकार के डिमेंशिया से दिमाग के अलग-अलग हिस्सों पर असर पड़ता है.
बता दें, हिप्पोकैम्पस हमारे मस्तिष्क का एक प्रमुख घटक है. यह
चीजों को याद रखने में मदद करता है, लेकिन डिमेंशिया से पीड़ित
लोगों के मास्तिष्क के इसी हिससे की कोशिकाएं नष्ट हो जाती हैं, जिस वजह से
इस बीमारी से पीड़ित लोग चीजों को भूलने लगते हैं. इसके अलावा
डिमेंशिया के मुख्य कारणों में डिप्रेशन, अल्कोहल का ज्यादा सेवन, थायरॉयड
की समस्या, शरीर में विटामिन की कमी आदि हैं.
डिमेंशिया के मुख्य लक्षण- नाम, जगह, तुरंत की गई बातचीत को याद रखने में परेशानी होना, अवसाद से पीड़ित होना, संवाद स्थापित करने/बात करने में दिक्कत होना, व्यवहार में बदलाव आना, कुछ निगलने में दिक्कत होना, चलने-फिरने में परेशानी होना, निर्णय लेने की क्षमता का प्रभावित होना, चीजों को रखकर भूल जाना आदि डिमेंशिया के लक्षण हैं.
डिमेंशिया से बचने के उपाय- सोशल एक्टिविटी- एक स्टडी की रिपोर्ट के अनुसार ज्यादा से ज्यादा लोगों के बीच रहने से इस रोग से बचा जा सकता है. जितना हो सके परिवार, मित्र, बच्चों के साथ वक्त गुजारने से डिमेंशिया और अल्जाइमर का खतरा कम होता है.
शारीरिक रूप से एक्टिव- मानसिक सेहत हमारी शारीरिक गतिविधियों से जुड़ी हुई है. शारीरिक रूप से आप जितने एक्टिव होंगे डिमेंशिया और अल्जाइमर का खतरा उतना ही कम होगा.
स्वस्थ और संतुलित भोजन का प्रयोग करें- हेल्थ एक्सपर्ट का मानना है कि डिमेंशिया और अल्जाइमर से बचने के लिए स्वस्थ और संतुलित भोजन बेहद जरूरी है. अपने आहार में ताजा फल, सब्जी, मछली, दूध, अंडे का ज्यादा से ज्यादा प्रयोग करें.
बता दें, ज्यादातर डिमेंशिया के केस में 60 से 80 प्रतिशत केस अल्जाइमर के होते हैं. डिमेंशिया को बुढ़ापे की बीमारी माना जाता है जो आमतौर पर 60 साल की उम्र के बाद होता है. लेकिन लाइफस्टाइल में आए बदलाव के कारण यह कम उम्र में भी देखने को मिल रही है. इस बीमारी की वजह से तार्किक क्षमता और याद्दाश्त पर असर पड़ता है.