scorecardresearch
 

38 किलो वजन, 23 इंच कमर फिर भी डिप्रेशन में थीं Uorfi Javed! बताया जरूरत से ज्यादा कम खाना क्यों है खतरनाक

Uorfi Javed Thinnest Phase: उर्फी जावेद ने कुछ दिनों पहले सोशल मीडिया पर एक स्टोरी शेयर की थी. इसमें उन्होंने अपनी वेट लॉस जर्नी के उस दौर को याद किया, जब एक्सट्रीम डाइट की वजह से उनका वजन सिर्फ 38 किलो रह गया था. बहुत कम खाना खाने के कारण वो बीमार और डिप्रेस्ड रहन लगी थीं. इसका असर उनकी डेली लाइफ पर साफ तौर पर दिखने लगा था.

Advertisement
X
उर्फी जावेद ने बताया एक्सट्रीम डाइट के साइड इफेक्ट्स(Photo-  Instagram @/ Uorfi)
उर्फी जावेद ने बताया एक्सट्रीम डाइट के साइड इफेक्ट्स(Photo- Instagram @/ Uorfi)

आज के दौर में वजन बढ़ना आम बात हो गया है. कई बार लोग बढ़े हुए वजन को कम करने के लिए जरूरत से ज्यादा कम खाना शुरू कर देते हैं. इसका असर सिर्फ शरीर पर ही नहीं, बल्कि स्किन और मेंटल हेल्थ पर भी पड़ता है. कुछ ऐसा ही एक्ट्रेस उर्फी जावेद के साथ भी हुआ.

उर्फी जावेद ने सोशल मीडिया पर एक स्टोरी शेयर किया था जिसमें उन्होंने बताया कि पिछले साल उनका वजन लगभग 38 किलो था. इसके बावजूद वो उस समय काफी बीमार और डिप्रेस्ड थीं. उर्फी के मुताबिक, बहुत कम खाने की आदत ने उनकी रोजाना की जिंदगी और मूड पर बुरा असर डाला था.

खाना कम खाने के कारण हो गया था बुरा हाल
उर्फी का कहना है कि भले ही उस दौरान वो पतली थीं लेकिन बिल्कुल भी हेल्दी नहीं थीं. पूरे दिन में वो मुश्किल से एक बार खाना खाती थीं, वह भी बिना कार्ब्स वाला. इसकी वजह से वह हर समय चिड़चिड़ी, गुस्सैल और इरिटेटेड रहती थीं. उन्हें सूजन जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा था. इसका असर उनकी स्किन और सेहत दोनों पर नजर आने लगा था.

23 इंच कमर होने के बावजूद उनका चेहरा इतना सूजा हुआ रहता था कि लोगों को लगने लगा था कि उन्होंने गलत तरीके से फिलर्स करवा लिए हैं. उर्फी ने साफ किया कि ठीक से खाना न खाने और अपनी एलर्जी को नजरअंदाज करने की वजह से सूजन बढ़ गई थी, जिससे साइनस और लिंफेटिक ड्रेनेज की समस्या हो गई. 

Advertisement

उर्फी का कहना है कि अब वो पहले से बेहतर हैं. हालांकि, कभी-कभी चेहरे पर सूजन आ जाती है लेकिन अब वह खुद को पहले से कहीं ज्यादा अच्छा महसूस कर रही हैं. इस पूरे सफर में वेट लिफ्टिंग ने उनकी काफी मदद की है.

हेल्थ एक्सपर्ट का क्या कहना है
इस बारे में डॉक्टर पल्लेटी शिव कार्तिक रेड्डी इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में बताए था कि लंबे समय तक बहुत कम खाना, खासकर कार्बोहाइड्रेट न लेने से दिमाग में एनर्जी की कमी हो सकती है. कार्ब्स से मिलने वाला ग्लूकोज दिमाग को एनर्जी देता है. जब यह लंबे समय तक नहीं मिलता तो सेरोटोनिन, डोपामिन जैसे हार्मोन प्रभावित होते हैं. इससे उदासी, चिड़चिड़ापन, एंग्जायटी, ध्यान की कमी और डिप्रेशन जैसे लक्षण दिख सकते हैं. 

वजन घटने के बाद रिकवरी में वेट ट्रेनिंग का रोल
अगर वेट ट्रेनिंग सही तरीके से की जाए तो यह रिकवरी में काफी मदद कर सकती है. इससे खोई हुई मसल्स को दोबारा बनने लगती है, हड्डियां मजबूत होती हैं, हार्मोन बैलेंस बेहतर होता है और मेटाबॉलिज्म भी बेहतर होता है. इसके साथ ही वेट ट्रेनिंग करने से इंसान खुद को पहले से ज्यादा स्ट्रॉन्ग और कॉन्फिडेंट फील करता है.

हालांकि, लंबे समय तक ठीक से खाना न खाने के बाद वेट ट्रेनिंग की शुरुआत बहुत सावधानी से करनी चाहिए. सबसे पहले शरीर को सही न्यूट्रिशन देना जरूरी है, जिसमें भरपूर मात्रा में कैलोरी, प्रोटीन और जरूरी विटामिन-मिनरल शामिल हो इसके बाद ही हल्की एक्सरसाइज शुरू करनी चाहिए और शरीर को पूरा आराम भी देना चाहिए. सही डाइट और डॉक्टर की सलाह के साथ की गई वेट ट्रेनिंग लंबे समय में फिजिकली और मेंटली हेल्दी रहने में मदद करती है.

---- समाप्त ----
Live TV

Advertisement
Advertisement