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Parenting: बच्चों की ये 7 बातें गलत रास्ते पर जाने के संकेत, देखते ही हो जाएं सावधान

Parenting tips: बढ़ती उम्र में बच्चे सही-गलत में फर्क नहीं कर पाते हैं और कभी-कभी कुछ ऐसा कर बैठते हैं जो सबके लिए मुसीबत बन जाता है. बच्चे की कुछ हरकतों को पहचान कर आप जान सकते हैं कि आपका बच्चा किन मानसिक स्थिति से गुजर रहा है. एक्सपर्ट्स के अनुसार बच्चों में ये 7 लक्षण दिखने पर पेरेंट्स को सावधान हो जाना चाहिए.

बढ़ती उम्र में बच्चों के बदलते व्यवहार पर ध्यान देना जरूरी हो जाता है बढ़ती उम्र में बच्चों के बदलते व्यवहार पर ध्यान देना जरूरी हो जाता है
स्टोरी हाइलाइट्स
  • बच्चों के बदलते व्यवहार पर दें ध्यान
  • गड़बड़ी का संकेत कुछ लक्षण
  • गलत-सही का फर्क समझाएं

Parenting tips: अक्सर पेरेंट्स को इस बात की चिंता रहती है कि उनका बच्चा क्या कर रहा है. बच्चा किसी गलत रास्ते पर ना चला जाए इसके लिए उस पर नजर रखने की कोशिश करते हैं. बढ़ती उम्र में बच्चे सही-गलत में फर्क नहीं कर पाते हैं और कभी-कभी कुछ ऐसा कर बैठते हैं जो सबके लिए मुसीबत बन जाता है. बच्चे की कुछ हरकतों को पहचान कर आप जान सकते हैं कि आपका बच्चा किन मानसिक स्थिति से गुजर रहा है. एक्सपर्ट्स के अनुसार बच्चों में ये 7 लक्षण दिखने पर पेरेंट्स को सावधान हो जाना चाहिए.

मूड स्विंग्स- मूड स्विंग्स होना आम बात है लेकिन बड़े होते बच्चों में हार्मोंस की वजह से ये बदलाव ज्यादा देखा जाता है. अगर आपका बच्चा अचानक से बहुत उदास या बहुत ज्यादा उत्साहित होने लगता है तो इस पर ध्यान देने की जरूरत है. अगर बच्चा बिना किसी कारण डिप्रेशन में जा रहा है तो ये चिंता की बात है. ऐसे में आपको धैर्य से काम लेना होगा. बच्चे से प्यार से बातें करके उसके व्यवहार में आ रहे बदलाव की असली वजह जानने की कोशिश करें.

दिलचस्पी ना लेना- हर बच्चे की आदत नहीं होती है कि वो लोगों से आसानी से मिलजुल जाए. इसका मतलब ये नहीं है कि बच्चे को कोई समस्या है. हालांकि अगर बच्चा किसी भी काम में दिलचस्पी नहीं ले रहा है या फिर वो किसी भी काम को बीच में ही छोड़ देता है तो ये एक चिंता की बात हो सकती है. ध्यान दें कि कहीं उसमें डिप्रेशन या फिर आत्मविश्वास की कमी जैसे लक्षण तो नहीं आ रहे हैं. 

चीजों को छुपाना- अगर आपसे कुछ छिपा कर कतरा है, भले ही वो काम मामूली सा क्यों ना हो लेकिन उसकी ये आदत संदेह पैदा करने के लिए काफी है. ध्यान ना देने पर धीरे-धीरे ये आदत किसी बड़ी चीज में भी बदल सकती है. बच्चें में चीजों को छिपाकर रखने की आदत आगे चलकर खतरनाक साबित हो सकती है. इसका मतलब है कि बच्चे को वो आदत पसंद आ रही है या फिर उसे आप पर भरोसा नहीं है. ये दोनों बाते चिंता बढ़ाने वाली हैं.

पढ़ाई में तेजी से पिछड़ना- अगर कोई बच्चा पढ़ाई में तेजी से पिछड़ रहा है और सामान्य से भी कम अंक ला रहा है तो इसका मतलब है कि कहीं न कहीं कुछ गड़बड़ है. इसके पीछे सीखने की अक्षमता, आलस, ज्यादा ध्यान ना देना या फिर कुछ घरेलू कारण हो सकते हैं. ये डिप्रेशन या फिर असंतोष का भी संकेत हो सकता है. ऐसे में बच्चे पर चिल्लाने या हाथ उठाने की बजाय मामले की तह तक जाएं.

दोस्तों का अचानक बदल जाना- नए दोस्त बनाना अच्छी बात है लेकिन चिंता की बात तब होती है जब बच्चे अपने ग्रुप को छोड़कर बिल्कुल नए लोगों के साथ घूमना ज्यादा पसंद करने लगें. पेरेंट्स के तौर पर आपके लिए ये जानना जरूरी हो जाता है कि आपका बच्चा किन लोगों से मिलता-जुलता है और पुराने दोस्तों को छोड़ने का क्या कारण था. रिश्तों में एक जटिलता होती है और इसे समझने के लिए बच्चों के पेरेंट्स की जरूरत होती है. किसी तकलीफ से बाहर निकलने के चक्कर में भी बच्चे गलत संगत में पड़ जाते हैं. इसलिए बच्चे की हरकत पर ध्यान दें.

पर्सनालिटी में बदलाव- युवावस्था में पर्सनालिटी में बदलाव आना आम बात है लेकिन इस पर नजर रखने की जरूरत है. जब बहुत ज्यादा चंचल बच्चे एकदम से शांत हो जाते हैं या फिर निराश होने लगते हैं तो इसका मतलब है कि वो किसी मुश्किल से गुजर रहे हैं. शायद बच्चा आपकी इच्छा के विपरीत कुछ काम कर रहा हो या हो सकता है कि उसे स्कूल में कुछ बच्चे परेशान कर रहे हों. ऐसे में शांत तरीके से बातचीत करके बच्चे के मन की बात जानी जा सकती है.

पहनावे में बदलाव- नए-नए लुक के साथ एक्सपेरिमेंट करना अच्छी बात है लेकिन युवा बच्चों में कपड़े चुनने के तरीके में बदलाव आना एक असुरक्षा की भावना भी हो सकती है. जैसे कि अचानक से ज्यादा ढीले-ढाले कपड़े पहनना शुरू करना जैसे कि वो कुछ छिपाने की कोशिश कर रहे हों या फिर कोई निशान छिपाने के लिए हमेशा फुल बाजू के कपड़े पहनना. ये सारी चीजें बताती हैं कि बच्चा अपने लुक को लेकर असुरक्षित महसूस करता है.

 

 

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