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Malaria Fever: कैसे होता है मलेरिया का बुखार? जानें इसके लक्षण, इलाज और बचाव

Malaria Fever: मलेरिया के मच्छर के काटने की वजह से व्यक्ति को बुखार और सिर दर्द होना शुरू हो जाता है. मलेरिया में बुखार कभी कम हो जाता है तो कभी ज्यादा हो जाता है. मलेरिया सहारा अफ्रीका और एशिया के ज्यादातर  देशों में पाया जाता है. WHO के अनुसार मलेरिया के दक्षिण पूर्व एशिया में कुल 77% मामले भारत देश में है और गुजरात, राजस्थान, कर्नाटक, गोवा, छत्तीसगढ़, झारखंड, ओडिशा, दक्षिणी मध्यप्रदेश और पूर्वोत्तर राज्यों में मलेरिया का संक्रमण अधिक है.

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कैसे होता है मलेरिया का बुखार? जानें इसके लक्षण, इलाज और बचाव कैसे होता है मलेरिया का बुखार? जानें इसके लक्षण, इलाज और बचाव

Malaria Fever: मलेरिया एनोफ़िलेज़ मादा मच्छर के काटने से होता है. इस प्रजाति के मच्छर बारिश के मौसम में अधिक होते है. इस प्रजाति की उत्पत्ति इसी बारिश के मौसम में होती है. मलेरिया के मच्छर के काटने की वजह से व्यक्ति को बुखार और सिर दर्द होना शुरू हो जाता है. मलेरिया में बुखार कभी कम हो जाता है तो कभी ज्यादा हो जाता है. मलेरिया सहारा अफ्रीका और एशिया के ज्यादातर  देशों में पाया जाता है.

भारत देश में मलेरिया पूरे साल पाया जाता है लेकिन बारिश के मौसम में इसका संक्रमण ज्यादा फैल जाता है. WHO के अनुसार मलेरिया के दक्षिण पूर्व एशिया में कुल 77% मामले भारत देश में है और गुजरात, राजस्थान, कर्नाटक, गोवा, छत्तीसगढ़, झारखंड, ओडिशा, दक्षिणी मध्यप्रदेश और पूर्वोत्तर राज्यों में मलेरिया का संक्रमण अधिक है. 

मलेरिया के लक्षण (Symtoms of Malaria Fever)

बुखार आना, सिर दर्द होना, उल्टी होना, मन का मचलना, ठंड लगना, चक्कर आना, थकान होना, पेट दर्द, तेज से सांस लेना आदि लक्षण हैं.   

मलेरिया के प्रकार (Types of Malaria)

1.प्लास्मोडियम फैल्सीपैरम (P. Falciparum)- इस रोग से पीड़ित व्यक्ति एकदम बेसुध हो जाता है. उसे पता ही नहीं होता कि वो बेहोशी में क्या बोल रहा है. रोगी को बहुत ठंड लगने के साथ उसके सिर में दर्द बना रहता है. लगातार उल्टियां होने से इस बुखार में व्यक्ति की जान भी जा सकती है. 

2.सोडियम विवैक्स (P. Vivax)- ज्यादातर लोग इस तरह के मलेरिया बुखार से पीड़ित होते हैं. विवैक्स परजीवी ज्यादातर दिन के समय काटता है. यह मच्छर बिनाइन टर्शियन मलेरिया पैदा करता है जो हर तीसरे दिन अर्थात 48 घंटों के बाद अपना असर दिखाना शुरू करता है. इस रोग से पीड़ित व्यक्ति को कमर दर्द, सिर दर्द, हाथों में दर्द, पैरों में दर्द, भूख ना लगने के साथ तेज बुखार भी बना रहता है. 

3.प्लाज्मोडियम ओवेल मलेरिया (P. Ovale)- इस तरह का मलेरिया बिनाइन टर्शियन मलेरिया उत्पन्न करता है. 

4.प्लास्मोडियम मलेरिया (P. malariae)- प्लास्मोडियम मलेरिया एक प्रकार का प्रोटोजोआ है, जो बेनाइन मलेरिया के लिए जिम्मेदार होता है. हालांकि यह मलेरिया उतना खतरनाक नहीं होता जितना प्लास्मोडियम फैल्सीपैरम (Plasmodium falciparum) या प्लास्मोडियम विवैक्स होते हैं. इस रोग में क्वार्टन मलेरिया उत्पन्न होता है, जिसमें मरीज को हर चौथे दिन बुखार आ जाता है.इसके अलावा रोगी के यूरिन से प्रोटीन निकलने लगते हैं. जिसकी वजह से शरीर में प्रोटीन..की कमी होकर उसके शरीर में सूजन आ जाती है. 

5.प्लास्मोडियम नोलेसी ( P. knowlesi)- यह दक्षिण पूर्व एशिया में पाया जाने वाला एक प्राइमेट मलेरिया परजीवी है. इस मलेरिया से पीड़ित रोगी को ठंड लगने के साथ बुखार बना रहता है. बात अगर इसके लक्षण की करें तो रोगी को सिर दर्द, भूख ना लगना जैसी परेशानियां झेलनी पड़ सकती हैं.

मलेरिया का इलाज (Treatment for Malaria)

मलेरिया के इलाज के लिए अनेक प्रकार की दवाईयां उपलब्ध है लेकिन यह सभी दवाएं रोग की गंभीरता पर निर्भर करती है. जैसे एंटीमलेरियल ड्रग्स, लक्षणों व बुखार को ठीक करने के लिए दवाएं, एंटिसिजिर दवाएं और इलेक्ट्रोलइट्स शामिल है. इसके  इलाज के लिए मरीज को कुछ दिन आइसीयू में भर्ती भी होना पड़ता है.

मलेरिया का निदान (Diagnose Malaria)

मरीज के शरीर से ब्लड का सैंपल लिया जाता है और इसी सैंपल से ब्लड स्मियर तैयार किया जाता है.ब्लड स्मियर में मलेरिया परीजिवी की अनुपस्थिति के कारण यदि डॉक्टर को शंका है तो वह अगले 36 घंटो तक 8 से 12 घंटे में दुबारा परीक्षण करना चाहिए. मलेरिया परजीवी की संख्या रक्त में कम या ज्यादा हो रही है तो इसकी जांच डॉक्टर द्वारा की जाती है.

मलेरिया से बचाव (Preventing Malaria Fever)

मलेरिया के मच्छर अधिकतर शाम या रात को काटते है इसलिए इस समय संभव हो तो घर में ही रहे.मलेरिया से बचने के लिए उन कपड़ों का उपयोग करे जो शरीर के अधिकांश हिस्से को ढक सके. घर के आस पास बारिश के पानी या गंदे पानी को जमा ना होने दे. यदि किसी व्यक्ति के शरीर में बुखार तेजी से बढ़ रहा है तो उसे किसी डॉक्टर की सलाह व जांच करवानी चाहिए.मलेरिया रोग की संभावना को कम करने के लिए एंटिमलेरियल दवा लेनी चाहिए. 

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