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इस एक गलती से स्पर्म काउंट और क्वॉलिटी दोनों हो रही बेकार, पुरुष तुरंत दें ध्यान

बदलते लाइफस्टाइल के चलते मोटापा आजकल के समय में काफी आम समस्याओं में से एक है. मोटापे के कारण लोगों को कई तरह की बीमारियों का सामना करना पड़ता है. जहां एक ओर महिलाओं को मोटापे के चलते गर्भधारण में दिक्कतें होती हैं वहीं पुरुषों में इसके कारण स्पर्म काउंट काफी कम होता है.

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photo credit: Getty Images
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स्टोरी हाइलाइट्स
  • मोटापे के कारण कम होता है स्पर्म काउंट
  • ये चीजें हैं स्पर्म काउंट कम होने के पीछे की वजह

आजकल के समय में मोटापा काफी आम समस्या हो चुकी है. मोटापा बढ़ने से कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है. इसके लिए आपका खानपान और कुछ आदतें जिम्मेदार होती हैं. मोटापे से पीड़ित लोगों को सेहत से जुड़ी कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता है जिसमें से एक है स्पर्म काउंट कम होना. रिसर्चर्स का कहना है कि वजन कम करने से पुरुषों में स्पर्म काउंट डबल हो सकता है. डेनमार्क के वैज्ञानिकों ने इसके लिए एक स्टडी की जिसमें 56 पुरुषों को शामिल किया गया. 

स्टडी में शामिल सभी लोगों को 8 हफ्तों तक डाइट पर रखा गया और हर दिन मात्र 800 कैलोरी ही दी गई. स्टडी की शुरुआत में जिन पुरुषों का बीएमआई 32 था, उनका इस दौरान 16.5 किलो तक वजन कम हुआ. वहीं, स्टडी के ही दौरान इन सभी पुरुषों के स्पर्म काउंट में 41 फीसदी की बढ़ोतरी भी दर्ज की गई. स्टडी के दौरान जिन लोगों का वजन कम हुआ और जिन लोगों ने एक साल तक अपने कम वजन को मेनटेन करके रखा उन लोगों में स्पर्म काउंट दोगुना पाया गया. 

हालांकि, कोपहेगन यूनिवर्सिटी के एक्सपर्ट्स ने भी पाया कि जिन लोगों का बैली फैट ज्यादा था उन सभी लोगों की सीमन की क्वॉलिटी काफी बेकार थी. 

पुरुषों में स्पर्म काउंट 17 साल की उम्र से लेकर 40 तक पीक पर रहता है जिसके बाद यह कम होना शुरू हो जाता है. बता दें कि प्रति मिलीलीटर सीमन में 15 मिलियन स्पर्म का होना एक नॉर्मल स्पर्म काउंट माना जाता है.  समय के साथ ही पुरुषों में स्पर्म काउंट काफी कम होने लगा है. इसके लिए वैज्ञानिक मोटापा, खराब डाइट और प्रदूषण को जिम्मेदार मानते हैं. 

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स्पर्म काउंट कम होने के कारण ही आजकल के समय में बहुत से शादीशुदा लोगों को बच्चे पैदा करने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. इससे पहले मोटापे को लेकर यह सुझाव दिया गया था कि इससे पुरुषों में टेस्टोस्टेरोन लेवल कम होता है जिससे स्पर्म उत्पादन कम होता है. 

इससे पहले यूटा यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने पाया था कि मोटे लोगों में अपनी उम्र के बाकी लोगों की तुलना में स्पर्म काउंट काफी कम होता है. 

 

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