
कभी कोर्ट की तरफ जाते हुए आपने गौर किया होगा कि हर वकील लगभग एक जैसी ड्रेस में दिखता है, काला कोट, सफेद शर्ट और गले में सफेद नेकबैंड (जिसे आम भाषा में सफेद पट्टी कह देते हैं). पहली नजर में ये बस एक फॉर्मेलिटी लग सकती है लेकिन इस ड्रेस के पीछे इतिहास, सिंबॉलिज्म और कानूनी नियम तीनों जुड़े हैं. इंग्लैंड के बादशाहों के दौर से लेकर इंडिया के Advocates Act 1961 तक, इस काले-सफेद यूनिफॉर्म ने वक़्त के साथ कई बदलाव देखे लेकिन इसकी मूल भावना आज भी वही है: न्याय के प्रति समर्पण, अनुशासन और आम आदमी के लिए भरोसे की एक पहचान. आइए इस पूरी कहानी को थोड़ा डिटेल में समझते हैं.

इंग्लैंड के किंग्स के दौर से लेकर इंडिया के Advocates Act 1961 और Bar Council of India के ड्रेस कोड तक, इस ब्लैक एंड व्हाइट यूनिफॉर्म ने बहुत लंबा सफर तय किया है फिर भी इसका बेसिक मैसेज आज भी वही है, न्याय के लिए समर्पण, अनुशासन और आम लोगों के लिए भरोसा. वकीलों का काला कोट पहनना सीधे तौर पर ब्रिटिश लीगल सिस्टम से जुड़ा है.
ब्रिटिश लीगल हिस्ट्री पर लिखे कई आर्टिकल्स में बताया गया है कि 1327 में इंग्लैंड के किंग एडवर्ड III के समय जजों और वकीलों के लिए ड्रेस कोड तय किया गया था जिसमें लंबे गाउन और विग शामिल थे. ऐसा इसलिए भी पहनते थे ताकि उनकी पहचान आम लोगों से अलग हो सके.
Legally Flawless वेबसाइट के मुताबिक, 17वीं सदी में किंग्स चार्ल्स II की 1685 में मौत के बाद जज और वकीलों ने शोक के तौर पर काले गाउन पहनने शुरू किए और यही ड्रेस धीरे-धीरे कोर्ट की रेगुलर ड्रेस बन गए और यही मॉडल इंडिया सहित दूसरे देशों में भी फॉलो किया गया. इंडिया में आज भी आप सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट्स के बाहर वकीलों को उसी ब्रिटिश मॉडल से मिलते-जुलते काले गाउन और कोट में देखते हैं, बस विग का चलन धीरे-धीरे खत्म हो चुका है.
Livelaw.in के मुताबिक, दुनिया भर में काले कलर को ऑथॉरिटी, सीरियसनेस और डिग्निटी का रंग माना जाता है. काला रंग सम्मान, ज्ञान और न्याय जैसे मूल्यों की तरफ इशारा करता है जिन्हें हर वकील और जज को कैरी करना होता है.
ALC Law College के ब्लॉग के मुताबिक, वकील काला कोट पहनकर 'न्याय के प्रति समर्पण' का प्रतीक बनते हैं इसलिए वे लोग काले रंग का कोट पहनते हैं.
काले कोट के साथ जो सफेद शर्ट और गले में दो स्ट्रिप वाली सफेद पट्टी दिखती है, उसके पीछे भी अपना एक अर्थ छिपा है. LiveLaw पर दी गई जानकारी के मुताबिक, सफेद रंग रोशनी, अच्छाई, निर्दोषता और पवित्रता का प्रतीक माना जाता है इसलिए इसे आम आदमी की उम्मीद और न्याय की पवित्रता से जोड़ा जाता है.
KLE Law College की वेबसाइट के मुताबिक, इस सफेद नेकबैंड की दो पट्टियां 'Tablets of Stone' या 'Ten Commandments' वाले दो पत्थर के पट्टों की तरह मानी जाती हैं जो ईश्वर और इंसान दोनों के कानून को कैरी करने का प्रतीक हैं.
ALC के ब्लॉग के मुताबिक, ये काला–सफेद कॉन्ट्रास्ट कलर इस बात का संदेश होता है कि सख्त दिखने वाले सिस्टम के भीतर निष्पक्षता, रोशनी और नैतिकता को जगह दी गई है.