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खूबसूरती का जापानी तरीका... झुर्रियों में भी कैसे दिखते हैं इतने सुंदर? आप भी आजमाएं

जापानी लोग 'शिबुई' सिद्धांत फॉलो करते हैं जो उन्हें उम्र बढ़ने के साथ-साथ लाइफ में हमेशा, हर स्थिति में पॉजिटिव रहने में मदद करता है. इस सिद्धांत को फॉलो कैसे करते हैं, सही तरीका क्या है, इस बारे में जानेंगे.

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जापानी लोगों की स्किन हमेशा ग्लो करती है. (Photo: ITG)
जापानी लोगों की स्किन हमेशा ग्लो करती है. (Photo: ITG)

आज की तेज रफ्तार जिंदगी में समय कब निकल जाता है, पता ही नहीं चलता. समय के साथ उम्र का बढ़ना काफी अहम बात है. उम्र के साथ-साथ लोग एंग्जाइटी, कंपेरिजन, डिमोटिवेशन, स्ट्रेस जैसी चीजों से भी घिरे रहते हैं जो उम्र का असर जल्दी आपके चेहरे पर दिखाने लगता है. फिर झुर्रियां छुपाने से लेकर जवानी बनाए रखने की होड़ तक, लोग बढ़ती उम्र को स्वीकारने के बजाय उससे लड़ते दिखते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं जापानी लोग कैसे उम्र पर जीत हासिल करते हैं?

दरअसल, जापानी लोग एक पुरानी परंपरा को फॉलो करते हैं जिसका नाम है 'शिबुई'. उनका यह सिद्धांत सादगी, संतुलन और स्वाभाविक सुंदरता पर भरोसा करता है और वे लोग उसी से उम्र को मात देते हैं और उनकी स्किन भी ग्लो करती रहती है. शिबुई सिद्धांत क्या है, यह कैसे काम करता है, इस बारे में भी जान लीजिए.

क्या है शिबुई सिद्धांत?

जानकारी के मुताबिक, शिबुई जापान की एक पारंपरिक जीवन-दृष्टि है जो दिखावे और बनावटीपन के बजाय सरलता, संतुलन और गहराई पर जोर देती है. यह सिद्धांत मानता है कि जैसे उम्र के साथ इंसान का अनुभव बढ़ता है, सोच मजबूत होती है और जीवन को देखने का नजरिया साफ होता जाता है, उसी तरह किसी भी चीज की असली खूबसूरती समय के साथ उभरती है.

शिबुई खासतौर पर उन लोगों के लिए मददगार हो सकता है जो उम्र बढ़ने को लेकर डिप्रेशन में रहते हैं या जिन्हें लगता है कि समय उनके हाथ से तेजी से निकल रहा है. यह सिद्धांत उन्हें याद दिलाता है कि उम्र कोई दौड़ नहीं, बल्कि एक जर्नी है जिसे खुशी-खुशी जिया जा सकता है.

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उम्र बढ़ने को लेकर सोच बदलनी जरूरी

जापानी लोगों का मानना है कि आज की सोशल मीडिया की दुनिया में जवानी को सक्सेस और खूबसूरती से जोड़ दिया गया है. इससे लोग उम्र बढ़ने को अपनी नाकामी समझने लगते हैं. उनकी यही सोच डिप्रेशन, एंग्जायटी और सेल्फ-डाउट को जन्म देती है. शिबुई इस मेंटल प्रेशर को कम करता है और सिखाता है कि हर उम्र की अपनी अलग अहमियत और खूबसूरती होती है.

मेंटल हेल्थ में सुधार करता है शिबुई

मेंटल हेल्थ एक्सपर्ट्स का मानना है कि उम्र को एक्सेप्ट करना आत्म-संतोष और शांति की दिशा में पहला कदम है. शिबुई इंसान को सिखाता है कि खुद की तुलना दूसरों से नहीं करनी चाहिए और अपनी मौजूदा स्थिति को ही बैलेंस करना चाहिए. उनकी यह सोच डिप्रेशन और आत्म-असंतोष से बचाने में मदद कर सकती है.

कैसे अपनाएं शिबुई सिद्धांत?

शिबुई को किसी खास उम्र में अपनाने की जरूरत नहीं है इसे किसी भी उम्र के लोग अपना सकते हैं. इसे आप तब अपना सकते हैं जब आप कम लेकिन अर्थपूर्ण चीजों को चुनना चाहते हों, शरीर में आए बदलावों को स्वाभाविक मानने की क्षमता रखते हों या फिर खुद के साथ दयालुता की भावना रखते हों. यदि आपमें ये सारी आदतें हैं तो यही आगे चलकर उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को धीमा बना देती हैं.

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शिबुई को अपनाने के लिए किसी को भी अपनी लाइफ में बड़े-बड़े बदलाव करने जरूरी नहीं है. दिखावे की बजाय कंफर्ट और बैलेंस लाइफ को प्रायोरिटी दें. हमेशा अपने अचीवमेंट और एक्सपीरियंस वैल्यू दें. बॉडी और सोल की लिमिट को समझें. यह तरीका न सिर्फ मेंटल स्टेबिलिटी देता है, बल्कि जीवन को बोझिल होने से भी बचाता है.

शिबुई हमें सिखाता है कि उम्र बढ़ना कमजोरी नहीं, बल्कि जीवन का स्वाभाविक और सुंदर हिस्सा है. अगर हम इस सोच को अपनाएं तो न सिर्फ मेंटल हेल्थ बेहतर होगी बल्कि लाइफ के हर मोड़ पर आप पॉजिटिव रहेंगे.

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