Indias first AI blood test: ब्लड टेस्ट के जरिए आप अपने शरीर में होने वाली दिक्कतों का पता लगा सकते हैं. इसके जरिए आपकी ओवरऑल हेल्थ के बारे में पता चलता है, जैसे इंफेक्शन का पता चलना, डायबिटीज, कोलेस्ट्रॉल और आयरन लेवल आदि. ब्लड टेस्ट के जरिए डॉक्टर्स को भी किसी बिमारी के संकेतों का पहले ही पता लग जाता है. किसी भी बीमारी का पता लगाने के लिए ब्लड टेस्ट एक आसान तरीका है. लेकिन अब, ब्लड टेस्ट का एक नया तरीका सामने आ रहा है जिसके लिए ना तो आपको इंजेक्शन लगाने की जरूरत होगा ना आपका खून निकाला जाएगा.
ब्लड टेस्ट के इस नए तरीके में आपको एक ब्राइट रूम में अपने फेस को स्कैन करना होगा और मात्र 20 सेकेंड में आपको रिजल्ट दिख जाएगा. इस नए तरीके से आप अपना ब्लड प्रेशर, हीमोग्लोबिन लेवल, हार्ट रेट, ऑक्सीजन रेट और यहां तक की स्ट्रेस लेवल का भी पता लगा सकते हैं.
2024 में लॉन्च किए जाने वाले इस ऐप को हाल ही में हैदराबाद के सरकारी अस्पताल निलोफर अस्पताल में पेश किया गया. मैटरनिटी वार्ड में, इस ऐप ने प्रेग्नेंट महिलाओं में आयरन के लो लेवल की जांच करने में मदद की जिससे एनीमिया का इलाज समय रहते हो गया. एनीमिया की समस्या भारत में बेहद ही कॉमन है, खासतौर से महिलाओं में.
अब, डेवलपर्स इस ऐप को महाराष्ट्र में शुरू करने की तैयारी कर रहे हैं और धीरे-धीरे दूरदराज के आदिवासी इलाकों में इसका विस्तार करने की प्लानिंग बना रहे हैं, जहां ब्लड टेस्ट और साफ-सफाई एक बड़ी चुनौती बनी हुई है. क्विक वाइटल्स नाम के इस टूल के बारे में बताते हुए, बिसम फार्मास्यूटिकल्स के फाउंडर हरीश बिसम ने इस बारे में जानकारी शेयर की कि किस प्रकार यह ऐप देश भर में डायग्नोस्टिक हेल्थ केयर में बदलाव लाने के लिए तैयार है.
भारत का पहला AI ब्लड टेस्टिंग टूल
सिंगल यूजर ऐप को क्विक वाइटल्स कहा जाता है, जबकि सरकारी अस्पताल में शुरू किए गए मल्टीपल यूजर ऐप को अमृत स्वस्थ भारत कहा जाता है. इसमें सुई के बिना ही आपकी सेहत के बारे में इंस्टेंट पता लगाया जा सकता है. इसमें एक मिनट से भी कम का समय लगता है. ये टूल फोटोप्लेथिस्मोग्राफी (पीपीजी) का इस्तेमाल करता है जो एक ऐसी विधि है जो स्किन के जरिए लाइट अवशोषण में बदलाव का पता लगाकर शरीर में होने वाली दिक्कतों के बारे में बताता है.
हरीश बिसम ने इंडिया टुडे.इन से बात करते हुए बताया, "जब लाइट आपके शरीर में प्रवेश करती है, तो उसका कुछ हिस्सा वापस रिफ्लेक्ट होता है. फोन के सेंसर इस रिफ्लेक्टेड लाइट को पकड़ लेते हैं. ये ऐप विश्लेषण करने के लिए बिल्ट-इन एल्गोरिदम के साथ-साथ फोटोप्लेथिस्मोग्राफी नाम की तकनीक का उपयोग करता है. यही कारण है कि ऐप थोड़ा बड़ा है, ये इस मुश्किल डेटा को प्रोसेस करता है."
जब डेटा ऐप पर भेजा जाता है, तो यह आपकी आर्टरीज में बहने वाले खून की जांच करता है. बिसम ने कहा, "ये कई एल्गोरिदम और फोटोप्लेथिस्मोग्राफी का कॉम्बिनेशन है जो लाइट सिग्नल्स को समझने और एक्यूरेट रीडिंग देने के लिए एक साथ काम करते हैं."
ब्लड टेस्ट के मुकाबले ये कितना एक्यूरेट है?
बिसम ने कहा कि, आमतौर पर किए जाने वाले ब्लड टेस्ट में भी कई बार वेरिएशन देखने को मिलते हैं. उदाहरण के लिए एक लैब से किए गए टेस्ट में हीमोग्लोबिन का लेवल 11.5 आता है तो दूसरे लैब से किए गए टेस्ट में हीमोग्लोबिन का लेवल 12.2 आता है. ये बहुत ही कॉमन है.
वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन के स्टैंडर्ड के मुताबिक, हीमोग्लोबिन टेस्ट में 7 फीसदी वेरिएंशन को स्वीकार किया जाता है. वहीं, ब्लड प्रेशर के लिए, WHO 7% मार्जिन की अनुमति देता है, जबकि अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन 10% तक की अनुमति देता है. इल टूल के लिए लाइट का एक अच्छा सोर्स चाहिए होता है चाहे वो नेचुरल हो या आर्टिफिशियल . साथ ही जरूरी है कि स्कैन के दौरान फोन को स्थिर रखा जाए.
इस टूल के जरिए इन समस्याओं का लग सकता है पता-
यह ऐप एनीमिया जैसी कंडीशन के लिए इंस्टेंट, स्क्रीनिंग करता है, जिससे महिलाओं और बच्चों में एनीमिया का जल्द से जल्द पता लगाया जा सकता है. निलोफर अस्पताल के डॉ. रवि कुमार ने बताया कि ये ऐप प्रेग्नेंट महिलाओं और बच्चों के लिए सबसे ज्यादा फायदेमंद साबित होगा. इससे उनके शरीर में खून की कमी का तुरंत पता लगाया जा सकता है.
एनीमिया का समाधान
इस ऐप की मदद से एनीमिया की इंस्टेंट जांच की जा सकती है जिससे समय से पहले ही किसी भी व्यक्ति के शरीर में खून की कमी का पता लगाया जा सकता है. राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग के सदस्य डॉ. संतोष क्रालेटी ने इंडिया टुडे.इन को बताया, भारत में लगभग 40 फीसदी माताएं एनीमिया से पीड़ित हैं. इसलिए ऐसे टेस्ट होने जरूरी है जिससे बड़े स्चर पर स्क्रीनिंग हो सकते हैं. जल्दी से जल्द , ज्यादा से ज्यादा लोग कवर किए जा सके, ताकि एनीमिया की समस्या से समय रहते निपटा जा सके.
उन्होंने कहा कि यह ऐप स्कूली बच्चों की जांच करने और नेशनल चाइल्ड हेल्थ प्रोग्राम, एडल्ट हेल्थ प्रोग्राम, राष्ट्रीय किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम और अन्य एनसीडी (गैर-संचारी रोग) पहलों जैसे हेल्थ प्रोग्राम में बहुत फायदेमंद हो सकता है.
उन्होंने कहा, "हमारे पास पहले से ही एआई-बेस्ड इंटरवेंशन हैं, खासतौर से खांसी, ट्यूबरक्लोसिस और बाकी कंडीशन के लिए, जो स्क्रीनिंग में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं. मेरा मानना है कि ये टूल बड़े सामुदायिक स्क्रीनिंग कार्यक्रमों के लिए भी बहुत मूल्यवान होगा."
उन्होंने कहा कि जल्द ही इस ऐप को प्राइमरी हेल्थ केयर सेंटर्स और आयुष्मान भारत जैसे प्लेटफॉर्मों के साथ जोड़ा जाएगा.
डेटा प्राइवेसी और सिक्योरिटी
बिसम ने बताया कि क्विक वाइटल्स ने मरीजों की मेडिकल इंफॉर्मेशन की सुरक्षा के लिए कड़े उपाय लागू किए हैं. उन्होंने कहा, यह सिस्टम मल्टीपल-यूजर रजिस्ट्रेशन की अनुमति देता है, जिससे यह सुनिश्चित किया जाता है कि सिर्फ डॉक्टर की मरीज के डेटा देख सके. मरीज के सभी डेटा को सुरक्षित रखने के लिए खी तरह के नियम भी बनाए गए हैं.