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जवानी में बढ़ा कूल्हों का दर्द... 20-30 की उम्र वालों को अधिक खतरा! एक्सपर्ट ने दी चेतावनी

ऑर्थोपेडिक्स एक्सपर्ट के मुताबिक, लंबे समय तक बैठे रहने से हिप्स मसल्स और हड्डियां कमजोर हो जाती हैं जिससे दर्द, अकड़न और समय से पहले ही कमजोरी आ जाती है. इससे बचने के क्या तरीके हैं, वो जानेंगे.

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हिप्स पेन की शिकायत कम उम्र के लोगों में भी देखने मिल रही है. (Photo: ITG)
हिप्स पेन की शिकायत कम उम्र के लोगों में भी देखने मिल रही है. (Photo: ITG)

पहले जहां ऑफिस में साधारण सी कुर्सी हुआ करती थीं, वहीं आजकल के मॉडर्न ऑफिसों में काफी शानदार, सॉफ्ट और फ्लेग्जिबल चेयर्स आ गई हैं. ऐसे में कई लोग ऑफिस की शिफ्ट हो या वर्क फ्रॉम होम, लोग घंटों एक ही जगह बैठकर काम कर रहे हैं और ये उनकी लाइफ का अहम हिस्सा बन गया है. लेकिन ऑफिस या घर में चेयर्स पर घंटों बैठे रहना आपके हिप्स (Hips) को समय से पहले कमजोर बना रही है. ऑर्थोपेडिक एक्सपर्ट्स के मुताबिक, लंबे समय तक बैठकर काम करने की वजह से हिप्स की ताकत और स्थिरता कम हो रही है जिसका असर 20 और 30 साल के वयस्कों में भी देखने मिल रहा है. ये समस्या आगे चलकर खतरनाक रूप ले सकती है और पीठ दर्द नहीं, हिप्स के मसल्स, हड्डियों और मूवमेंट पर भी असर डाल सकती है.

एक्सपर्ट क्यों दे रहे चेतावनी?

आर्टेमिस हॉस्पिटल्स के ऑर्थोस्पाइन और ऑर्थोपेडिक्स डॉ. धीरज बठेजा का कहना है, 'जब कोई लंबे समय तक बैठता है उसके हिप्स एक ही 'फ्लेक्स्ड' पोजीशन में लॉक हो जाते हैं. ऐसा करने से हिप्स के मुख्य मसल्स जिन्हें ग्लूट्स और हिप फ्लेक्सर्स कहते हैं वो सुस्त अवस्था में आने लगते हैं. ऐसे में जब ग्लूट्स कमजोर हो जाते हैं तो वो पेल्विस को सही सपोर्ट नहीं दे पाते जिससे शरीर का बैलेंस बिगड़ने लगता है. 

इसके अलावा हिप फ्लेक्सर्स के कड़क (टाइट) होने से हिप्स की फ्लेग्जिबिलिटी कम होने लगती है जिसके कारण चलना, झुकना या सीढ़ियां चढ़ना जैसे सामान्य काम भी भारी पड़ने लगते हैं.

हैदराबाद के केयर हॉस्पिटल के ऑर्थोपेडिक सर्जन डॉ. ई.एस. राधे श्याम का कहना है कि जब हिप्स मसल्स का उपयोग कम होने लगता है तो वो मसल्स कन्फ्यूज हो जाते हैं कि उन्हें कैसे फंक्शन करना है. जब हम आप कोई मोबिलिटी नहीं करते हैं, चलते-फिरते नहीं हैं तो हिप्स को सपोर्ट करने वाले मसल्स कमजोर हो जाते हैं जिससे ज्वाइंट्स की ताकत कम होने लगती है.

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यंगस्टर्स भी खतरे में

ऑर्थोपेडिक एक्सपर्ट्स का कहना है कि हॉस्पिटल्स और क्लीनिकों में ऐसे वयस्क अधिक आ रहे हैं जिनकी उम्र 20 से 30 साल के बीच है और जिनके हिप्स में अकड़न और दर्द की शिकायत है. उन लोगों को वो समस्याएं हैं जो पहले सिर्फ बुजुर्गों में देखने मिलती थीं. ब्लड सर्कुलेशन की कमी और मसल्स में अकड़न होना उनमें मुख्य कारण देखे जा रहे हैं.

सीके बिड़ला हॉस्पिटल (CMRI) के ऑर्थोपेडिक्स डिपार्टमेंट के डायरेक्टर डॉ. राकेश राजपूत के मुताबिक, हिप्स की समस्या सिर्फ वहीं तक सीमित नहीं रहती बल्कि यह आगे चलकर कमर के निचले हिस्से और घुटनों में भी दर्द का कारण बन सकती है.

हालांकि फ्रैक्चर की समस्या बुजुर्गों में ज्यादा होती है लेकिन एक्सपर्ट्स का मानना है कि लंबे समय तक एक्टिव न रहने से भी हड्डियों को अप्रत्यक्ष रूप से नुकसान पहुंचता है.  

जब हड्डियों पर वजन या प्रेशर (लोड) नहीं पड़ता तो उनकी डेंसिटी (घनत्व) कम होने लगती है. फिर ऐसे में कमजोर मसल्स आपको उस समय सपोर्ट नहीं कर सकते जब आप गिरते हैं या चोट लगती है. खराब डाइट, विटामिन-D की कमी और स्मोकिंग इस खतरे को और ज्यादा गंभीर बना देते हैं.

कितनी देर बैठना खतरनाक है?

डॉक्टर्स का मानना है कि वैसे तो एक जगह लंबे समय बैठने का कोई एक निश्चित पैमाना नहीं है लेकिन लगातार बैठने से बचें. एक्सपर्ट्स की सलाह है कि हर 30 से 45 मिनट के बाद अपनी जगह से उठें और टहलें. अगर आप दिन में 6 से 8 घंटे बैठते हैं, तो बीच-बीच में ब्रेक लेना जरूरी है.

हिप्स मजबूत रखने के लिए ये उपाय भी करें

  • हर 45 मिनट पर कम से कम 2 से 5 मिनट के लिए चलें-फिरें.
  • हफ्ते में 2-3 बार स्क्वाट्स (Squats), लंजेस (Lunges) और ग्लूट ब्रिज जैसी एक्सरसाइज करें.
  • हिप्स और हैमस्ट्रिंग के मसल्स को स्ट्रेच करें.
  • बैठते समय कूल्हों को घुटनों से थोड़ा ऊपर रखें और झुककर न बैठें.
  • प्रोटीन, कैल्शियम और विटामिन-D का पर्याप्त सेवन करें.
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