Impact of daily used water bottles: रोजाना इस्तेमाल होने वाली वॉटर बॉटल आपकी सेहत पर गहरा असर डाल सकती है क्योंकि जिम बैग, ऑफिस डेस्क और बेडसाइड टेबल से लेकर हर जगह पानी की बोतलें हमारी रोजमर्रा की लाइफ का अहम हिस्सा बन गई हैं. लोग बॉटल खरीदते समय कुछ नहीं सोचते, बस देखते हैं कि वो इजी टू कैरी हों, दिखने में अच्छी हों, और ग्रिप अच्छी हो. वो बॉटल किस मेटेरियल से बनी है, क्या वो पानी देर तक रखने के लिए सेफ है या नहीं, इस बारे में काफी कम लोग ही देखते हैं.
लोग शायद ही कभी इस बारे में सोचते हैं कि वो जो पानी पी रहे हैं वो उनकी सेहत पर कहीं अधिक नेगेटिव असर डाल सकता है. इसका कारण है कि बॉटल जिन चीजों से बनती है, उनमें से किसी में खतरनाक कैमिकल निकल सकते हैं, पानी का स्वाद बदल सकता है या अगर ठीक से साफ न किया जाए तो उनमें बैक्टीरिया पनप सकते हैं.
अब ऐसे में कांच, तांबा, स्टील या प्लास्टिक की बोतल में से कौन सी अधिक सुरक्षित है ये जानना काफी जरूरी है. तो आइए इन चारों बॉटल्स के बारे में जानते हैं कि कौन सी बॉटल यूज में लाना सही है.
ग्लास बॉटल पानी का ओरिजिनल टेस्ट बनाए रखती है क्योंकि यह कोई केमिकल नहीं छोड़ती. नॉन-पोरस यानी इसमें कोई छेद ना होने से इसमें बैक्टीरिया नहीं चिपकते और इसे साफ करना भी आसान होता है. कांच की बोतल की सबसे खास बात ये होती है कि ये BPA-फ्री होती है.
Aquasana स्टडी कहती है, 'ग्लास बॉटल हेल्थ और एनवायरनमेंट के लिए बेहतर होती है और नैचुरल टेस्ट और हाइजीन की दृष्टि से भी ये बेहतर होती हैं.' ट्रैवल, ऑफिस, घर आदि के लिए ये बोतल अच्छी होती हैं लेकिन इनका एक नुकसान ये है कि ये चिकनी होती हैं. अगर इनमें ग्रिप ना हो तो ये हाथ से छूटकर गिर भी सकती हैं.
स्टील की बोतल ड्यूरेबल, हल्की और इंसुलेटेड रहती है जो पानी को लंबे समय तक ठंडा-गर्म रखती हैं. ये नॉन-टॉक्सिक, मोल्ड-फ्री और BPA फ्री होती हैं. इन्हें साफ करना कांच की बोतल से थोड़ा मुश्किल होता है और सस्ती स्टील की बॉटल्स में मेटालिक टेस्ट आने लगता है और साफ न करने पर गंध आने लगती है.
World Steel Association की रिसर्च के मुताबिक, स्टील हाइजीनिक माइक्रोप्लास्टिक्स से मुक्त होती है. रोजाना यूज के लिए टॉप चॉइस हो सकती है.
कॉपर यानी तांबा एंटीमाइक्रोबियल है जो बैक्टीरिया (ई. कोलाई) को मारता है और डाइजेशन भी सुधारता है. जर्नल ऑफ हेल्थ पॉपुलेशन एंड न्यूट्रिशन स्टडी में पब्लिश हुई रिसर्च इस बोतल के कई आयुर्वेदिक फायदे की भी पुष्टि करती है.
हालांकि यदि तांबे की बोतल में पानी देर तक रखा जाए या फिर उसमें से अधिक कॉपर लीक हो रहा हो तो कॉपर टॉक्सिसिटी की समस्या हो सकती है जिससे लिवर-किडनी संबंधी समस्याएं हो सकती हैं. तांबे की बॉटल में एसिडिक ड्रिंक्स नहीं रखना चाहिए. हालांकि इसकी बॉटल्स पर अभी और स्टडीज की जरूरत है.
प्लास्टिक की बोतल से BPA केमिकल लीक होते हैं जो कि शरीर के अंदर जाकर खून में मिलकर अंगों तक पहुंच जाते हैं. इससे कैंसर और हार्ट रिस्क भी बढ़ सकता है.
Concordia यूनिवर्सिटी के मुताबिक, प्लास्टिक बॉटल यूज करने से सालाना 90,000 एक्स्ट्रा पार्टिकल्स आपके शरीर में जाते हैं. नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ की स्टडी के मुताबिक, प्लास्टिक की बॉटल बैक्टीरिया का हब होती हैं इसलिए इनमें पानी पीने से बचना चाहिए.