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बेटी को शुरू होने वाले हैं पीरियड्स? पैरेंट्स जरूर बताएं ये बातें

अधिकांश लड़कियों को 21 से 35 दिनों के बीच मासिक धर्म होता है. मासिक धर्म में ब्लीडिंग दो से सात दिनों तक चलती है. ये प्रक्रिया सभी में अलग-अलग तरह से काम करती है. हो सकता है कि आपके पीरियड्स हर महीने हमेशा तय वक्त पर ना आएं. खासकर मासिक धर्म की शुरुआत में इसका समय ऊपर-नीचे हो सकता है और काफी दर्दनाक भी होता है इसलिए मां-बाप को पीरियड्स की शुरुआत में अपनी बेटी का खास ख्याल रखना चाहिए.

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पीरियड्स से जुड़ी ये जरूरी बातें लड़कियों को जरूर पता होनी चाहिए
पीरियड्स से जुड़ी ये जरूरी बातें लड़कियों को जरूर पता होनी चाहिए

किसी भी लड़की में पीरियड्स एक प्राकृतिक और सामान्य प्रक्रिया है. पीरियड्स जिसे हिंदी में मासिक धर्म कहते हैं, इसमें कुछ दिनों के लिए लड़की के गर्भाशय से थोड़ा सा खून योनि के जरिए बाहर निकलता है और ये साइकल हर महीने एक से पांच दिन तक चलता है. हर महीने एक से पांच दिन तक चलने वाली इस प्रक्रिया की वजह से ही इसे मासिक धर्म या माहवारी कहा जाता है. हर लड़की में मासिक धर्म की शुरुआत उसकी प्यूबर्टी यानी उसकी 11 से 15 साल के बीच की आयु में होती है जो बहुत छोटी उम्र होती है. कई लड़कियों को इससे पहले ही पीरियड्स शुरू हो जाते हैं.

पीरियड्स की शुरुआत कई लड़कियों के लिए दर्दनाक अनुभव हो सकता है. दर्द के अलावा कई लड़कियों में छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा, बेचैनी या चिड़चिड़ाहट जैसे मूड स्विंग्स के लक्षण भी दिखाई देते हैं इसलिए इस स्थिति में मां-बाप को अपनी बेटी का खास ख्याल रखना चाहिए. मांओं को अपनी बेटी को बताना चाहिए कि ये उसके जीवन की एक बेहद सामान्य प्रक्रिया है और उसके लिए बहुत जरूरी भी है. 

जानें मासिक धर्म से जुड़ी अहम बातें

मासिक धर्म शरीर के हार्मोन द्वारा नियंत्रित होता है. मासिक धर्म गर्भावास्था की प्रक्रिया का एक अहम पड़ाव है. लड़कियों के शरीर में पीरियड की शुरुआत होने का मतलब है कि उनका शरीर खुद को संभावित गर्भावस्था (प्रेग्नेंसी) के लिए तैयार कर रहा है.

अधिकांश महिलाओं को 21 से 35 दिनों के बीच मासिक धर्म होता है. मासिक धर्म में ब्लीडिंग दो से सात दिनों तक चलती है. ये प्रक्रिया सभी में अलग-अलग तरह से काम करती है. हो सकता है कि आपके पीरियड्स हर महीने हमेशा तय वक्त पर ना आएं. खासकर मासिक धर्म की शुरुआत में इसका समय ऊपर-नीचे हो सकता है क्योंकि इसे आपके शरीर के साथ संतुलन बनाने में कुछ साल लग सकते हैं. हैरानी की बात है कि कई महिलाओं को अपने पूरे जीवन में कभी भी रेगुलर पीरियड्स नहीं होते हैं.

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मासिक धर्म के लक्षण क्या हैं और इस स्थिति में क्या करना चाहिए

मासिक धर्म होने पर महिलाओं के प्राइवेट पार्ट से ब्लीडिंग होती है. इसके लिए आप पैड, टैम्पोन, पीरियड अंडरवियर या मैन्सट्रुअल कप का उपयोग कर सकते हैं ताकि ये आपके कपड़ों पर न लगे. कई महिलाओं को मासिक धर्म से पहले और उस दौरान पेट में दर्द, ऐंठन होता है जो Premenstrual syndrome (PMS) के लक्षण हैं. 

क्या होता है Premenstrual syndrome (PMS) 
PMS तब होता है जब आपके मासिक धर्म चक्र को नियंत्रित करने वाले हार्मोन आपके मासिक धर्म के समय के आसपास आपके शरीर और भावनाओं में बदलाव लाते हैं. इसमें सबसे कॉमन लक्षण दर्द (ये आपके पेट के निचले हिस्से या पीठ के निचले हिस्से में होता है), ब्लोटिंग (जब आपका पेट फूला हुआ महसूस करता है), स्तनों में दर्द, थकान, मूड स्विंग्स हैं.

शुरुआत में ये हर लड़की को बहुत दर्दनाक लगते हैं. लेकिन वास्तव में ये इस बात की निशानी है कि आपका शरीर स्वस्थ है और ये अपनी सामान्य प्रक्रिया के साथ बढ़ रहा है. पीरियड्स आपको स्कूल जाने, खेलने-कूदने, स्विमिंग या अपने दोस्तों के साथ घूमने-फिरने से नहीं रोकता है. आप अपनी पीरियड्स में सामान्य फिजिकल एक्टिविटीज कर सकते हैं. 

कुछ लोगों को हर पीरियड में पीएमएस होता है. कई लोगों को कभी-कभी, कई लोगों में कुछ लक्षण होते हैं जबकि कई लोगों को पीएमएस नहीं होता है.

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पीरियड्स के दर्द में क्या करें और क्या नहीं

पीरियड्स के दौरान ज्यादातर महिलाओं को पेट में दर्द और ऐंठन होती है जिसे पीरियड्स क्रैम्प्स या मैंस्ट्रुअल क्रैम्प्स भी कहते हैं. पीरियड्स के दौरान आपका शरीर हार्मोन का उत्पादन करता है जिससे गर्भाशय में संकुचन होता है. यही संकुचन आपको मेंस्ट्रुअल क्रैम्प के तौर पर महसूस होते हैं. इसमें पेट दर्द के अलावा कई बार पैर और पीठ में भी दर्द होता है.

कमर, पेट और उसके निचले हिस्से में दर्द आपके मासिक धर्म से पहले/उस दौरान होने वाले सबसे आम लक्षणों में एक है. ये कभी-कभी हल्का हो सकता है और कई बार काफी भयानक हो सकता है.ज्यादा दर्द होने पर आप दर्द की दवा (जैसे इबुप्रोफेन) खाकर इसे शांत कर सकते हैं जहां दर्द हो रहा है वहां हीटिंग पैड लगाने, गर्म पानी से नहाने, व्यायाम करने या अपने शरीर को स्ट्रेच करने से भी मदद मिल सकती है.

क्यों मिस होते हैं पीरियड्स

पीरियड्स मिस होने के कारण होते हैं. कई बार हार्मोनल बदलाव की वजह से भी ऐसा होता है. इसके अलावा तनाव, कम वजन, अधिक व्यायाम करने, मोटापा, रजोनिवृत्ति और गर्भावस्था की वजह से भी पीरियड्स मिस होते हैं.

 

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