आपने सुना ही होगा कि बेली फैट यानी पेट के आसपास की चर्बी डायबिटीज, हार्ट डिसीज और कुछ प्रकार के कैंसर समेत कई बीमारियों का जोखिम बढ़ा सकती है. इसके अलावा यह ब्लड प्रेशर, बैड कोलेस्ट्रॉल के स्तर, स्लीप एपनिया, फैटी लिवर और स्ट्रोक का भी रिस्क बढ़ाती है. वहीं, एक नई रिसर्च में पाया गया है कि यह आपको सोरायसिस बीमारी का भी शिकार बना सकती है.
रिसर्च में दावा किया गया है कि शरीर के मध्य के हिस्से में चर्बी खास तौर पर पेट के आसपास की चर्बी पूरे शरीर में जमा होने वाले फैट तुलना में सोरायसिस की बीमारी का रिस्क अधिक बढ़ाती है. खासतौर पर महिलाओं में इसका रिस्क ज्यादा पाया गया इसलिए सोरायसिस में वेट मैनेजमेंट बहुत जरूरी है.
क्या है सोरायसिस
सोरायसिस एक क्रॉनिक इंफ्लेमेशन वाली स्किन कंडीशन है जिसमें स्किन सेल्स सामान्य से तेज गति से बढ़ती हैं जिससे स्किन की सतह पर पपड़ीदार और खुजलीदार पैच बन जाते हैं. यह कोई सामान्य बीमारी नहीं है बल्कि एक ऑटोइम्यून कंडीशन है जिसमें शरीर का इम्यून सिस्टम त्वचा की कोशिकाओं को असामान्य रूप से बढ़ने का संकेत देता है और शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली ही त्वचा कोशिकाओं पर हमला करती हैं. सोरायसिस से पीड़ित कई व्यक्तियों में शरीर में फैट का स्तर भी बढ़ा हुआ होता है.
रिसर्च में यह बात साफ है कि शरीर में वसा के बढ़ते स्तर से सोरायसिस होने का जोखिम बढ़ जाता है लेकिन इसमें जीन्स की क्या भूमिका, ये स्पष्ट नहीं है.
बेली फैट और सोरायसिस
ब्रिटेन के किंग्स कॉलेज लंदन के शोधकर्ताओं ने बताया है कि बेली फैट और सोरायसिस के बीच कनेक्शन है भले ही उस व्यक्ति के जीन्स में इस बीमारी का रिस्क ना हो लेकिन पेट की चर्बी इस बीमारी को अकेले ही बढ़ा सकती है.
जर्नल ऑफ इन्वेस्टिगेटिव डर्मेटोलॉजी में प्रकाशित इस अध्ययन में रिसर्च टीम ने 3,30,000 से अधिक लोगों के डेटा का एनालिसिस किया था जिसमें सोरायसिस से पीड़ित 9,000 से अधिक लोग शामिल थे. उन्होंने पारंपरिक तरीकों और एडवांस्ड इमेजिंग तकनीकों दोनों का इस्तेमाल करके शरीर में फैट के 25 अलग-अलग मापों की जांच की थी. उन्होंने इस दौरान देखा कि यह कौन से हिस्से का फैट सोरायसिस से कैसे जुड़ा है जिसके बाद ये नतीजे सामने आए. महिलाओं में इसका खतरा अधिक पाया गया.