वर्कआउट करना शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य दोनों के लिए फायदेमंद होता है. यह मांसपेशियों को मजबूत करता है, हड्डियों की मजबूती बढ़ाता है और वजन को नियंत्रित रखता है. रोजाना एक्सरसाइज से हार्ट हेल्दी रहता है और ब्लड सर्कुलेशन भी बेहतर रहता है. इसके अलावा, यह नींद की गुणवत्ता सुधारता है और रोगों से लड़ने की क्षमता बढ़ाता है. लेकिन यदि कोई सही तरह से एक्सरसाइज नहीं करता तो इसके नुकसान भी उसे हो सकते हैं.
हाल ही में एक 24 साले की लड़की को हॉस्पिटल में भर्ती होना पड़ा. इसका कारण था कि उसने वर्कआउट से पहले वॉर्मअप नहीं किया था. जैसे ही उसके मसल्स पर अधिक लोड पड़ा तो उसके मसल्स फट गए और विषाक्त पदार्थ रक्त में लीक होने लगे.
क्या था पूरा मामला?
द सन के मुताबिक, लड़की को रैबडोमायोलिसिस नामक बीमारी थी जिसमें अत्यधिक मेहनत करने के कारण मसल्स टूट जाते हैं और उनमें मौजूद विषाक्त पदार्थ खून में रिसने लगते हैं. ये विषाक्त पदार्थ किडनी को नुकसान पहुंचा सकते हैं और उन्हें काम करना बंद करने पर मजबूर कर सकते हैं, जिसका यदि शीघ्र इलाज न किया जाए तो मौत भी हो सकती है.
स्पिनिंग एक्सरसाइज कर रही थी लड़की
स्पिनिंग एक हाई इंटेंसिटी वाली इनडोर साइकिलिंग एक्सरसाइज है जो जांघों और ग्लूट्स के बड़े मसल्स को टारगेट करता है. स्पिनिंग के दो दिन बाद ही लड़की सीढ़ियां चढ़ने में असमर्थ हो गई थी क्योंकि उसकी जांघ काफी दर्द करने लगी थीं. लेकिन उसका दर्द असामान्य रूप से तेज थी और उसकी यूरीन का रंग भी भूरे रंग का हो गया था. ऐसे में एक्सपर्ट्स को समझ आ गया था कि कुछ तो खराब है. जब वह अस्पताल गई तो रिपोर्ट में पता चला कि उसकी क्रिएटिन काइनेज का स्तर जो मांसपेशियों के डैमेज होने का संकेत है वो सामान्य सीमा से 50 गुना अधिक था.
टेस्च और स्कैन से पता चला कि उसकी जांघों की मांसपेशी कोशिकाएं फट गई थीं, जिससे मायोग्लोबिन जैसे हानिकारक पदार्थ उसके ब्लड स्ट्रीम में चले गए थे जिससे उसकी किडनी पर भारी दबाव पड़ रहा था. 5 दिनों के ट्रीटमेंट के बाद उसके मसल्स से एंजाइम का स्तर कम हो गया था और उसकी किडनी की कार्यप्रणाली में सुधार होने लगा था.
डॉक्टर्स ने सलाह दी कि इनडोर एक्सरसाइज करने वालों को भी वार्म-अप और कूल-डाउन के बारे में जानकारी देनी चाहिए ताकि इस प्रकार की चोटों से बचा जा सके.
वॉर्मअप क्यों जरूरी है?
एक्सरसाइज से पहले वॉर्मअप करना बहुत जरूरी होता है क्योंकि यह शरीर को शारीरिक गतिविधि के लिए तैयार करता है. वॉर्मअप से मांसपेशियों में रक्त प्रवाह बढ़ता है, जिससे वे अधिक लचीली और सक्रिय हो जाती हैं. यह जोड़ों की मूवमेंट रेंज को बेहतर बनाता है और चोट लगने की संभावना को कम करता है. साथ ही, वॉर्मअप से दिल की धड़कन धीरे-धीरे बढ़ती है, जिससे कार्डियोवैस्कुलर सिस्टम एक्सरसाइज के लिए तैयार होता है. मानसिक रूप से भी वॉर्मअप आपको फोकस करने और एक्सरसाइज में बेहतर परफॉर्म करने में मदद करता है.
एक्सरसाइज के बाद कूल डाउन क्यों जरूरी है
एक्सरसाइज के बाद कूल डाउन करना शरीर के लिए उतना ही जरूरी है जितना वॉर्मअप. कूल डाउन से दिल की धड़कन और सांस धीरे-धीरे सामान्य स्तर पर आती है, जिससे शरीर को आराम मिलता है. यह मांसपेशियों में जमा लैक्टिक एसिड को हटाने में मदद करता है, जिससे जकड़न और दर्द (सोरनेस) कम होता है. कूल डाउन से ब्लड सर्कुलेशन संतुलित रहता है, जिससे चक्कर आने या थकावट की संभावना घटती है. साथ ही, यह मानसिक रूप से भी आपको रिलैक्स करता है और रिकवरी में मदद करता है. स्ट्रेचिंग करने से लचीलापन भी बेहतर होता है.