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चॉकलेट खाना तो दूर देखने के लिए तरस जाएंगे लोग, ये है वजह

आपने बिल्कुल सही पढ़ा है और चॉकलेट का वजूद मिटने की वजह होगी ग्लोबल वॉर्मिंग. दरअसल जिस पौधे से चॉकलेट बनाया जाता है उसे ककाओ कहते हैं. इसे एक खास तरह के वातावरण में ही उगाया जा सकता है. इसकी खेती भूमध्य रेखा के 20 डिग्री उत्तर और 20 डिग्री दक्षिण तक के क्षेत्रों में ही होती है.

चॉकलेट के दीवानों, जल्द ही दुनिया से खत्म हो जाएगा चॉकलेट! चॉकलेट के दीवानों, जल्द ही दुनिया से खत्म हो जाएगा चॉकलेट!

चॉकलेट का नाम सुनते ही मुंह में पानी आने लगता है. बच्चों को खुश करना हो या गर्लफ्रेंड का खराब मूड ठीक, सबका इलाज चॉकलेट है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि जल्द ही दुनिया से चॉकलेट खत्म हो जाएगा.

आपने बिल्कुल सही पढ़ा है और चॉकलेट का वजूद मिटने की वजह होगी ग्लोबल वॉर्मिंग. दरअसल जिस पौधे से चॉकलेट बनाया जाता है उसे ककाओ कहते हैं. इसे एक खास तरह के वातावरण में ही उगाया जा सकता है. इसकी खेती भूमध्य रेखा के 20 डिग्री उत्तर और 20 डिग्री दक्षिण तक के क्षेत्रों में ही होती है. जहां पर तापमान में कोई भी उतार-चढ़ाव नहीं देखने को मिलता है. लेकिन ग्लोबल वॉर्मिंग के कारण अब तापमान में लगातार परिवर्तन देखने को मिल रहा है. जहां इसकी खेती होती है वहां का तापमान भी बढ़ रहा है. इसीलिए अनुमान लगाया जा रहा है कि 2050 तक लगातार बढ़ते हुए तापमान के कारण काकाओ की पैदावार काफी कम हो जाएगी.

इस खबर का असर चॉकलेट बनाने वाली कंपनियों पर भी दिख रहा है. फूड और कैन्डी बनाने वाली कंपनी 'मार्स' इससे बेहद चिंतित है. इस समस्या के निपटने के लिए 'मार्स', यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया के साथ मिलकर रिसर्च भी कर रही है.

अगर जल्द ही कोई रास्ता ना निकाला गया तो वो दिन दूर नहीं जब हम चॉकलेट देखने के लिए तरस जाएंगे. चॉकलेट के व्यार से जुड़ी हुई कंपनियां डूब जाएंगी और लोगों को रोजगार से भी हाथ धोना पड़ेगा.

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