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ब्रेस्ट कैंसर: 70 प्रतिशत महिलाओं को कीमोथेरेपी की जरूरत नहीं

दवाओं के एक मिश्रण को रक्त वाहिनियों के जरिए शरीर के विभिन्न भागों में पहुंचाया जाता है. ये दवाएं कैंसर की कोशिकाओं को बढ़ने से रोकती है.

प्रतीकात्मक तस्वीर प्रतीकात्मक तस्वीर

जो महिलाएं ब्रेस्ट कैंसर के शुरुआती स्टेज से गुजर रही हैं अब उन्हें कीमोथेरेपी कराने की जरूरत नहीं होगी. डॉक्टर्स की एक नई खोज के मुताबिक पीड़ित बिना कीमोथेरेपी के भी कैंसर से लड़ सकते हैं.

कीमोथेरेपी क्या है?

दवाओं के एक मिश्रण को रक्त वाहिनियों के जरिए शरीर के विभिन्न भागों में पहुंचाया जाता है. ये दवाएं कैंसर की कोशिकाओं को बढ़ने से रोकती है. क्योंकि कैंसर की कोशिकाएं 8 प्रकार की हो सकती हैं इसलिए 8 प्रकार की दवाइयों के मिश्रण को शरीर में इंजेक्शन के माध्यम से छोड़ा जाता है. इसके कई साइड इफेक्ट भी होते हैं.

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कीमोथेरेपी के साइड इफेक्ट-

- थकान

- उल्टी

- बालों का झड़ना

- मुंह में कड़वाहट

- त्वचा में रूखापन

- डायरिया या कब्ज

- इंफेक्शन का खतरा

कैसर के इतिहास में सबसे बड़ी खोज?

न्‍यू इंग्‍लैंड जर्नल ऑफ मेडिसिन में प्रकाशित इस रिसर्च को नेशनल कैंसर इंस्‍टीट्यूट ने फंड किया था. शोध के परिणामों की चर्चा शिकागो के अमेरिकन सोसायटी ऑफ क्लिनकल ऑन्‍कोलॉजी में की गई. इसे कैंसर की अब तक की सबसे बड़ी खोजों में से एक बताया जा रहा है.

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कीमोथेरेपी की जरूरत नहीं-

न्यूयॉर्क के मोन्टेफायर मेडिकल सेंटर के डॉक्टर और स्टडी के प्रमुख डॉक्‍टर जोसफ स्‍पारनो ने कहा, ‘यह अद्भुत है. शुरुआती ब्रेस्ट कैंसर से गुजर रही महिलाओं को सर्जरी और हार्मोन थेरेपी के अलावा और कुछ कराने की जरूरत नहीं है.'

जीन टेस्टिंग की जरूरत-

बोस्टन में डाना फार्बर कैंसर इंस्टीट्यूट के डॉक्टर हरोल्ड बर्सटेन ने कहा कि, 'ज्यादातर महिलाओं को लगता है कि अगर वे कीमोथेरेपी नहीं कराएंगी तो उनकी मृत्यु हो जाएगी. जबकि ऐसा बिल्कुल नहीं है.' गौरतलब है कि 10,273 रोगियों को एक टेस्ट Oncotype DX दिया गया. जिससे व्यक्ति के बायोप्सी सैम्पल के आधार पर जीन्स की ऐक्टिविटी को ट्रैक किया जा सके और कोशिकाओं पर हार्मोन थेरेपी के प्रभाव का पता लगाया जा सके. रिसर्च में पाया गया कि अगर जीन्स टेस्ट के आधार पर सर्जरी और हार्मोन थेरेपी की जाय तो  पीड़ित को कीमोथेरेपी की जरूरत नहीं होगी.

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