scorecardresearch
 

शुरुआत में ही सेहत की जांच कराना बेहतर

जल्दी रोकथाम ही हाइ ब्लडप्रेशर, डायबिटीज और ऐसे अन्य गंभीर रोगों में सुरक्षा का सर्वोत्तम साधन है जो पहले से कहीं कम उम्र में लोगों को अब अपनी चपेट में लेने लगे हैं.

Advertisement
X

आज हम एक ऐसी दुनिया में जी रहे हैं, जिसमें जड़ पकड़ लेने वाली गंभीर किस्म की, चयापचयी यानी मेटाबोलिक और कैंसर जैसी बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं. स्वास्थ्य की ऐसी समस्याओं से जूझते युवा वर्ग की संख्या में तेजी से वृद्धि इसलिए और भी चिंता पैदा करती है क्योंकि उनकी यह उम्र जिंदगी का भरपूर मजा लेने की होती है. उम्र के तीसरे दशक में दिल का दौरा पड़ने या कैंसर से पीड़ित होने वाले रोगियों का दिखना अब आम बात हो गई है. कम उम्र में हाइ ब्लडप्रेशर, डायबिटीज और दूसरे गंभीर रोग होने से जिंदगी की चुनौतियों का सामना करने की क्षमता कम होती है और मन अवसाद से भर जाता है.

गंभीर और मेटाबोलिक रोगों में तेजी आने के कई कारण हैं. इन विकृतियों में डायबिटीज, उच्च रक्तचाप, हृदय धमनियों के रोग, आंतों की बीमारियां, ऑस्टियोपोरोसिस और थायरॉयड की विकृतियां शामिल हैं. भारत में हर तीन में से एक व्यक्ति डायबिटीज या हाइ ब्लडप्रेशर से जूझ रहा है और करीब 12 फीसदी आबादी डायबिटीज पीड़ित है यानी दुनिया भर में ये रोग सबसे ज्यादा भारत में हैं. इसी तरह हर आयु वर्ग में और स्त्री और पुरुषों में समान रूप से कैंसर का फैलाव हुआ है. चालीस वर्ष से ऊपर की हर तीन में से लगभग एक महिला स्तन कैंसर, गर्भाशय कैंसर, या ऑस्टियोपोरोसिस से पीड़ित हो सकती हैं. इसी तरह पुरुषों में प्रोस्टेट कैंसर, फेफड़े का कैंसर, आमाशय का कैंसर, और हृदय रोग जैसी समस्याएं बढ़ रही हैं.

इनमें से अनेक रोगों के पीड़ितों की संख्या बढऩे के पीछे मूलरूप से जेनेटिक, जीवन-शैली और परिवेश संबंधी कारण जिम्मेदार हैं. जेनेटिक कारणों पर तो हमारा कोई नियंत्रण नहीं है लेकिन अपनी जीवन शैली और माहौल में बदलाव लाकर हम इनमें से अनेक विकृतियों से बचने या उन्हें टालने की कोशिश तो कर ही सकते हैं. अपने बचाव के लिए एहतियात के तौर पर स्वास्थ्य की जांच कराना जरूरी है ताकि पता चल सके कि स्थिति क्या है और खतरे की आशंका कहां है. हमें याद रखना चाहिए कि ज्यादातर मामलों में जल्दी निदान हो जाए तो समाधान हो सकता है.

Advertisement

आम तौर पर लोग सवाल करते हैं कि स्वास्थ्य जांच की शुरुआत किस उम्र में होनी चाहिए? एहतियाती तौर पर स्वास्थ्य की जांच इसलिए नहीं करानी चाहिए कि हम अस्वस्थ हैं, बल्कि इसका मकसद तो स्वस्थ रहना है. इसलिए यह काम जल्दी से जल्दी यानी कोई रोग होने से पहले शुरू कर देना चाहिए. स्वास्थ्य की जांच सबके लिए एक समान भी नहीं हो सकती. हर स्त्री या पुरुष को अपनी आयु, स्वास्थ्य और रोगों की स्थिति, जोखिम वाले कारकों की उपस्थिति के अनुरूप जांच करवानी चाहिए. तीस वर्ष के स्वस्थ व्यक्ति के लिए डायबिटीज, हाइ ब्लडप्रेशर या हृदय रोग के लक्षणों की पहचान के लिए बुनियादी जांच से भी काम चल सकता है लेकिन चालीस वर्ष की अवस्था में किसी स्वस्थ महिला को स्तन और गर्भाशय कैंसर जैसे रोगों और स्वस्थ पुरुष को प्रॉस्टेट कैंसर और हृदय धमनी के रोग जैसी अवस्थाओं के लक्षणों की जांच कराना भी जरूरी हो सकता है. इसके अलावा रहन-सहन, परिवार के दूसरे लोगों में रोगों की स्थिति और व्यक्ति के अपने स्वास्थ्य को देखते हुए जोखिम के दूसरे लक्षणों की जांच की आवश्यकता भी हो सकती है.

भारत में 40 वर्ष से ऊपर की महिलाओं के लिए ऑस्टियोपोरोसिस, स्तन कैंसर, गर्भाशय या सर्वाइकल कैंसर और मेटाबोलिक विकृतियों की जांच अवश्य होनी चाहिए. कुछ सामान्य टेस्ट तो होते ही हैं, उनके अलावा कुछ विशेष और व्यक्ति अथवा रोग विशेष से संबद्ध जांच कराना भी जरूरी हो सकता है. लगातार मॉडर्न होती टेक्नोलॉजी के इस युग में आजकल हर रोग विशेष के लक्षण बताने वाले अनेक प्रयोगशाला संकेत यानी क्लीनिकल लैब बायोमार्कर्स भी हैं.

Advertisement

इसी तरह से 40 साल से ज्यादा के पुरुषों के लिए हृदय और नसों के रोग, प्रोस्टेट और फेफड़े का कैंसर, डायबिटीज होने पर गुर्दे की स्थिति, मेटाबोलिक विकृतियों और आंत्रशोथ संबंधी विकृतियों की जांच आवश्यक है. हृदय रोग संबंधी व्यापक जांच में ट्रेडमिल टेस्ट, ईकोकार्डियोग्राफी और होमोसिस्टाइन और लिपोप्रोटीन-ए जैसे निश्चित संकेतक शामिल हैं.

इसमें कोई संदेह नहीं कि व्यक्ति विशेष के लिए जोखिम पैदा करने वाले कारकों, मेडिकल हिस्ट्री पर चर्चा करने और आवश्यक स्वास्थ्य संबंधी जांच के बारे में फैसला लेने के लिए डॉक्टर से परामर्श भी आवश्यक है. अक्सर लोग इसलिए स्वास्थ्य जांच कराने से हिचकते हैं कि कहीं कोई गड़बड़ी न निकल आए. पर याद रखें अगर वाकई चिंता का कोई कारण है तो जितनी जल्दी आप को मालूम होगा, उतनी जल्दी आप इलाज करवा सकेंगे और स्वस्थ रहने के लिए अपने रहन-सहन और माहौल में बदलाव ला सकेंगे.

(प्रशिक्षित रेडियोलॉजिस्ट डॉ. रेड्डी विजया डाइग्नॉस्टिक सेंटर के फाउंडर चेयरमैन हैं)

Advertisement
Latest News in Hindi »
Advertisement