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चुनावी वादे पर आधारित सरकारी योजना संवैधानिक रूप से संदिग्ध नहीं, SC का फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु में छोटे और सीमांत किसानों के लिए AIADMK की सरकार के समय की गई कर्ज माफी को सही ठहराया है. सुप्रीम कोर्ट ने मद्रास हाईकोर्ट का वो फैसला रद्द कर दिया है जिसमें इस योजना को असंवैधानिक ठहराया गया था.

सुप्रीम कोर्ट (फाइल फोटो) सुप्रीम कोर्ट (फाइल फोटो)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • सुप्रीम कोर्ट ने रद्द किया मद्रास हाईकोर्ट का रोक लगाने का फैसला
  • कोर्ट ने कहा- छोटे और सीमांत किसानों को मदद की ज्यादा जरूरत

सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु में छोटे और सीमांत किसानों के लिए AIADMK की सरकार के समय की गई कर्ज माफी को सही ठहराया है. सुप्रीम कोर्ट ने मद्रास हाईकोर्ट का वो फैसला रद्द कर दिया है जिसमें इस योजना को असंवैधानिक ठहराया गया था. सुप्रीम कोर्ट ने साथ ही ये भी टिप्पणी की है कि अगर चुनावी वादे पर कोई सरकारी योजना है तो वो संवैधानिक रूप से संदिग्ध नहीं है.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि संविधान की रूपरेखा के भीतर ही योजना को संदिग्ध माना जा सकता है. छोटे और सीमांत किसानों को सामाजिक और आर्थिक मदद की ज्यादा जरूरत है. ये खुद ही एक अलग वर्ग है. जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस एएस बोपन्ना की बेंच ने फैसला सुनाते हुए कहा कि किसी सरकारी योजना को केवल इसलिए संवैधानिक रूप से संदिग्ध नहीं ठहराया जा सकता क्योंकि यह एक चुनावी वादे पर आधारित है.

अदालत ने मद्रास हाईकोर्ट के फैसले को लेकर कहा, "उच्च न्यायालय का विचार था कि चूंकि यह योजना चुनावी वादे के अनुसरण में थी इसलिए यह संवैधानिक रूप से संदेहास्पद है." कोर्ट ने कहा कि ये विचार इस धारणा पर बनाया गया था कि चुनावी वादा करने से पहले कोई अध्ययन नहीं किया गया होगा. ये स्थापित कानून है कि तमिलनाडु राज्य की ओर से प्रस्तावित योजना संविधान के खिलाफ होती तो ये रद्द की जा सकती थी. 

सुप्रीम कोर्ट ने साथ ही छोटे और सीमांत किसानों का वर्गीकरण भी किया है. कोर्ट ने कहा कि सूखा और बाढ़ जैसे संकट के कारण छोटे किसानों को पूंजी और प्रौद्योगिकी के अभाव के कारण बड़े किसानों की तुलना में ज्यादा नुकसान होता है. छोटे और सीमांत किसान आर्थिक रूप से समाज में कमजोर वर्ग के हैं. इसलिए, ऋण माफी योजना ग्रामीण आबादी के कमजोर वर्ग के लिए बनाई गई.

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