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जम्मू कश्मीर के परिसीमन पर रोक लगाने से SC का इनकार, केंद्र-चुनाव आयोग से मांगा जवाब

सुप्रीम कोर्ट ने जम्मू कश्मीर के परिसीमन को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार, केंद्र शासित प्रदेश के प्रशासन और चुनाव आयोग से जवाब तलब किया है.

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सुप्रीम कोर्ट (फाइल फोटो) सुप्रीम कोर्ट (फाइल फोटो)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • केंद्र शासित प्रदेश में परिसीमन को दी गई है चुनौती
  • 30 अगस्त को होगी याचिका पर अगली सुनावाई

जम्मू कश्मीर के चुनाव क्षेत्रों के प्रस्तावित परिसीमन पर रोक लगाने से सुप्रीम कोर्ट ने इनकार कर दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने 2020 में जारी की गई अधिसूचना को अब चुनौती देने वाली याचिका को लेकर याचिकाकर्ता से ये भी पूछा कि आप दो साल से कहां थे. जस्टिस संजय किशन कौल और जस्टिस एमएम सुंदरेश की पीठ ने परिसीमन को लेकर केंद्र सरकार, जम्मू कश्मीर प्रशासन और निर्वाचन आयोग से छह हफ्ते में जवाब तलब किया है.

सुनवाई के दौरान एक वक्त ऐसा भी आया जब अनुच्छेद 370 के कई प्रावधान शिथिल किए जाने को चुनौती देने के मामले पर जब कोर्ट ने सवाल पूछे तो याचिकाकर्ता के वकील ने कुछ ऐसे शब्दों का इस्तेमाल किया जिनको लेकर कोर्ट ने नाखुशी जताई. कोर्ट ने याचिकाकर्ता के वकील को ये हिदायत दी कि शब्दों के चयन में होशियारी बरतें. जम्मू कश्मीर हमेशा से भारत का अभिन्न अंग रहा है और है भी. सिर्फ एक प्रावधान हटाया गया है.

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले पर केंद्र सरकार, जम्मू कश्मीर प्रशासन और निर्वाचन आयोग से छह हफ्ते में जवाब तलब किया है. इस जवाब पर जवाबी हलफनामा दायर करने के लिए याचिकाकर्ता को दो हफ्ते का समय कोर्ट ने दिया है. सुप्रीम कोर्ट इस मामले पर अब अगली सुनवाई 30 अगस्त को करेगा. गौरतलब है कि जम्मू कश्मीर के हाजी अब्दुल गनी खान और डॉक्टर मोहम्मद अयूब मट्टू ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर कहा है कि परिसीमन आयोग का गठन कानून की सीमा से परे है. केंद्र सरकार ने अधिकार क्षेत्र का अतिक्रमण करते हुए ये कवायद की है.

बता दें कि परिसीमन आयोग ने 25 अप्रैल को अपनी रिपोर्ट सौंप दी थी. परिसीमन के मुताबिक जम्मू कश्मीर विधानसभा में सीटों की संख्या 83 से बढ़कर 90 हो जाएगी. सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर केंद्र शासित प्रदेश में परिसीमन के फैसले को चुनौती दी गई है. याचिका में कहा गया है कि यह परिसीमन जम्मू कश्मीर पुनर्गठन एक्ट 2019 की धारा 63 और संविधान के अनुच्छेद 81, 82, 170, 330 और 332 के खिलाफ है.

याचिका में जम्मू कश्मीर परिसीमन आयोग के  गठन को भी असंवैधानिक बताते हुए सवाल उठाया गया है कि संविधान के अनुच्छेद 170 के तहत देश मे अगला परिसीमन 2026 में होना ही है  ऐसे में अलग से जम्मू कश्मीर में परिसीमन क्यों किया जा रहा है? अब ये साफ हो गया है कि परिसीमन को लेकर जताई गई आपत्तियों वाली याचिका का न्यायिक परीक्षण सुप्रीम कोर्ट करेगा, लेकिन 30 अगस्त से पहले नहीं.

 

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