कर्नाटक के गडग जिले में सोमवार को आयोजित गणतंत्र दिवस समारोह के दौरान उस समय कुछ देर के लिए व्यवधान पैदा हो गया, जब आधिकारिक कार्यक्रम के बीच सियासी विवाद सामने आ गया. यह विवाद कर्नाटक के कानून एवं संसदीय कार्य मंत्री एच.के. पाटिल और भाजपा एमएलसी एस.वी. संकनूर के बीच हुआ. जिला स्तरीय गणतंत्र दिवस समारोह में दोनों नेता मंच पर मौजूद थे. कार्यक्रम के दौरान जिला प्रभारी मंत्री एच.के. पाटिल गणतंत्र दिवस का संबोधन दे रहे थे.
अपने भाषण में उन्होंने हाल ही में 'मनरेगा' की जगह लागू की गई 'वीबी - जी राम जी' (VB - G RAM G) योजना की आलोचना करते हुए कहा कि यह कानून 'गरीबों से रोजगार के अवसर छीनने वाला' है. पाटिल के इस बयान पर भाजपा एमएलसी एस.वी. संकनूर ने कड़ा एतराज जताया. वह मंच पर ही मंत्री के पास पहुंचे और विरोध दर्ज कराया. हालांकि इस व्यवधान के बावजूद एच.के. पाटिल अपने रुख पर कायम रहे और बिना रुके अपना भाषण जारी रखा. इसके बाद संकनूर मंच से नीचे उतर गए, लेकिन उससे पहले उन्होंने मंत्री के भाषण में हस्तक्षेप किया. यह पूरी घटना कैमरे में रिकॉर्ड हो गई.
मौके पर मौजूद जिला प्रशासन के अधिकारी स्थिति पर नजर बनाए रहे और कार्यक्रम को सामान्य रूप से आगे बढ़ाया गया. झंडारोहण, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और देशभक्ति से जुड़े अन्य इवेंट तय कार्यक्रम के अनुसार संपन्न हुए. बता दें कि दिसंबर 2025 में संसद ने 'विकसित भारत गारंटी फॉर एम्प्लॉयमेंट एंड लाइवलीहुड मिशन (ग्रामीण) विधेयक' को मंजूरी दी थी, जिसे संक्षेप में 'वीबी - जी राम जी' (VB - G RAM G) के नाम से जाना जाता है. यह कानून करीब दो दशक पुराने मनरेगा कानून की जगह लाया गया है.
वीबी - जी राम जी कानून में क्या है?
विकसित भारत-जी राम जी (ग्रामीण) अधिनियम, 2025 (VB - G RAM G Act 2025) के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में मनरेगा के 100 दिनों के स्थान पर अब प्रत्येक ग्रामीण परिवार को प्रति वित्तीय वर्ष 125 दिनों का रोजगार की गारंटी मिलेगी. इस योजना के तहत 60 फीसदी बजट केंद्र और 40 परसेंट राज्य सरकारें देंगी. मनरेगा में पूरा बजट केंद्र सरकार देती थी. सरकार का कहना है कि इस कानून का लक्ष्या ग्रामीण भारत को आत्मनिर्भर बनाना, आजीविका सुरक्षा, और रोजगार को टिकाऊ बुनियादी ढांचे (सड़क, जल संरक्षण) से जोड़ना है.
नए कानून के तहत बायोमेट्रिक उपस्थिति, जिओ-टैगिंग, और रियल-टाइम एमआईएस डैशबोर्ड का उपयोग करके पारदर्शिता को बढ़ाया गया है, और प्रशासनिक व्यय को 6% से बढ़ाकर 9% किया गया है. काम न मिलने की स्थिति में 15 दिनों के भीतर बेरोजगारी भत्ते का प्रावधान है. यह योजना ग्रामीण विकास के कार्यों को 'विकसित भारत राष्ट्रीय ग्रामीण अवसंरचना स्टैक' के साथ एकीकृत करती है. ग्राम पंचायतें योजना बनाने और लागू करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी.