कर्नाटक के बेलगावी में एक बड़ा निवेश घोटाला सामने आया है. यह मामला शिवम एसोसिएट्स नाम की एक कंपनी से जुड़ा है. पुलिस ने इसके प्रमोटर शिवानंद एस. नीलन्नावर को गिरफ्तार किया है. गिरफ्तारी के बाद जांच में जो बातें सामने आई हैं, उन्होंने पूरे उत्तर कर्नाटक में हलचल मचा दी है. अधिकारियों का कहना है कि यह इलाके के सबसे बड़े कथित इनवेस्टमेंट घोटालों में से एक हो सकता है.
आरोप है कि शिवम एसोसिएट्स लोगों से पैसा ले रही थी और बदले में बहुत ज्यादा मुनाफा देने का वादा कर रही थी. लोगों से कहा गया कि अगर वे यहां निवेश करेंगे तो उन्हें 36 प्रतिशत तक रिटर्न मिलेगा. यानी बैंक या सामान्य निवेश से कहीं ज्यादा कमाई. इसी लालच में हजारों लोगों ने अपनी जमा पूंजी कंपनी को सौंप दी.
जांच में पता चला है कि करीब 35 हजार लोग इस स्कीम से जुड़े हो सकते हैं. अधिकारियों को शक है कि कंपनी ने 50 करोड़ रुपये से ज्यादा की रकम जुटाई. यह रकम और भी बड़ी हो सकती है, क्योंकि अभी जांच जारी है.
अहम बात यह है कि कंपनी के पास पैसा जमा कराने की कोई वैध मंजूरी नहीं थी. न रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की इजाजत, न सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया यानी सेबी की मंजूरी थी. यानी जो काम किया जा रहा था, वह नियमों के बाहर बताया जा रहा है.
पुलिस का कहना है कि कंपनी एक चेन सिस्टम या मल्टी-लेवल मार्केटिंग मॉडल पर काम कर रही थी. लोगों से सीधे 'हैंड लोन' के नाम पर पैसा लिया जाता था. सुनने में यह उधार जैसा लगता था, लेकिन जांचकर्ताओं का मानना है कि असल में यह इनवेस्टमेंट स्कीम की तरह चल रहा था.
यह भी पढ़ें: 850 करोड़ के पोंजी स्कैम में 2 गिरफ्तार, कम समय में ज्यादा रिटर्न का लालच देकर 6000 निवेशकों से ठगी
जब शिकायतें बढ़ीं तो पुलिस ने कार्रवाई शुरू की. 15 मई को शिवानंद नीलन्नावर को गिरफ्तार कर लिया गया. इसके बाद कंपनी के दफ्तरों और उससे जुड़े ठिकानों पर छापेमारी हुई. पुलिस ने कई दस्तावेज, कंप्यूटर और डिजिटल रिकॉर्ड जब्त किए हैं. अब इन्हीं के जरिए पता लगाया जा रहा है कि नेटवर्क कितना बड़ा था और कितने लोगों का पैसा फंसा है.
जिन लोगों ने पैसा लगाया, उनमें बड़ी संख्या बुजुर्ग पेंशनधारकों, रिटायर्ड फौजियों और किसानों की बताई जा रही है. कई किसानों ने जमीन अधिग्रहण के बदले सरकार से मिला मुआवजा भी इसी स्कीम में लगा दिया. यानी जीवन भर की कमाई और भविष्य की सुरक्षा, दोनों दांव पर लग गईं.
अब मामला सिर्फ एक जिले तक सीमित नहीं दिख रहा. अधिकारियों का कहना है कि इसके तार दूसरे जिलों और दूसरे राज्यों से भी जुड़ सकते हैं. इसी वजह से केस को सीआईडी (Criminal Investigation Department) को सौंपने पर विचार हो रहा है.
फिलहाल पुलिस ने कंपनी से जुड़े बैंक खाते फ्रीज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है. पीड़ितों से कहा गया है कि वे सामने आकर शिकायत दर्ज कराएं, ताकि कानूनी कार्रवाई और पैसे की वापसी की प्रक्रिया शुरू हो सके.