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जैसलमेर में तो रेगिस्तान है... मगर नदी किनारे बसे शहर भी गर्मी में क्यों बन जाते हैं आग का गोला?

गर्मी का प्रकोप बढ़ता जा रहा है और रेगिस्तान के तरह नदी के किनारे वाले शहर भी जल रहे हैं. ऐसे में जानते हैं कि आखिर नदी किनारे वाले शहरों में इतनी गर्मी क्यों पड़ती है?

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गर्मी से नदी किनारे वाले शहर आग उगल रहे हैं. (Photo: PTI)
गर्मी से नदी किनारे वाले शहर आग उगल रहे हैं. (Photo: PTI)

उत्तर भारत में हीटवेव का दौर शुरू हो गया है और बताया जा रहा है कि इस बार गर्मी पहले से ज्यादा तीखी पड़ रही है. भीषण गर्मी के इस टॉर्चर में भारत के कुछ शहर ऐसे हैं, जो आग का गोला बने हुए हैं. गर्मी में भट्टी बने इन शहरों में जैसलमेर, प्रयागराज जैसे शहरों का नाम है. लेकिन, कभी आपने सोचा है कि जैसलमेर में तो रेगिस्तान है और उसकी वजह से वहां काफी गर्मी पड़ती है, लेकिन नदी के किनारे बसे शहरों में इतनी गर्मी किस वजह से पड़ रही है. तो आज हम आपको बताते हैं कि गर्मी के मौसम में नदी किनारे बसे शहर में क्यों आग बरसती है?

अभी भारत के सबसे गर्म शहर कौन से हैं?

लेटेस्ट डेटा की बात करें तो हाल ही में उत्तर प्रदेश का बांदा देश का सबसे गर्म शहर रहा, जहां अधिकतम तापमान 46.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया. इस भीषण गर्मी में यूपी का बांदा जिले भट्ठी की तरह जल रहा है. इसके अलावा वाराणसी में तापमान 44 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच गया है. इनके अलावा बाड़मेर में तापमान 45.4 डिग्री सेल्सियस पहुंच गया है. राज्य के कई अन्य जिलों में भी 43-45 डिग्री सेल्सियस के बीच तापमान दर्ज किया जा रहा है. वहीं, प्रयागराज में भी भीषण गर्मी पड़ रही है. 

क्यों गर्म हैं नदी किनारे बसे शहर?

अगर आप टॉप गर्म शहर की लिस्ट देखेंगे तो उनमें राजस्थान के शहरों के अलावा वो शहर दिखेंगे, जो नदी के किनारे बसे हुए हैं. आपको बता दें कि लोग सोचते हैं कि नदी के पास पानी है, इसलिए मौसम ठंडा रहेगा. लेकिन उत्तर भारत में गर्मियों के दौरान स्थिति उलटी हो जाती है. गर्मी में गंगा-यमुना जैसी नदियों का जलस्तर काफी घट जाता है. नदी का बड़ा हिस्सा उथला हो जाता है और आसपास की जमीन तेज धूप में तपने लगती है. नदी के किनारे की गीली मिट्टी और रेत तेज धूप में जल्दी गर्म होती है. यह गर्म सतह आसपास की हवा को और ज्यादा गर्म कर देती है.

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इस वजह से हीट काफी ज्यादा बढ़ जाती है. मिट्टी गर्मी को बढ़ाने में अहम किरदार निभाती है और इसी वजह से राजस्थान के बाड़मेर और जैसलमेर में काफी गर्मी रहती है. वहीं, जब मॉनसून के पास  का समय आता है तो नदी किनारे वाले शहरों में स्थिति ज्यादा खराब हो जाती है. उस वक्त जमीन बहुत गर्म हो जाती है,  लेकिन बारिश नहीं होती. इस समय हवा में नमी बढ़ने लगती है, मगर बारिश नहीं आती. यही कॉम्बिनेशन 'भट्टी जैसी गर्मी' पैदा करता है. इसलिए कई बार 44 डिग्री वाला नदी किनारे का शहर, 46 डिग्री वाले रेगिस्तानी शहर से ज्यादा परेशान कर सकता है.

और भी हैं कई कारण

गर्मियों में राजस्थान और पाकिस्तान की तरफ से बेहद गर्म और सूखी हवाएं चलती हैं. ये हवाएं पहले रेगिस्तानी इलाकों को गर्म करती हैं, फिर उत्तर प्रदेश, बिहार और मध्य भारत तक पहुंचती हैं. इसलिए नदी किनारे होने के बावजूद शहरों का तापमान बहुत बढ़ जाता है. इस वजह से वहां की मिट्टी भी काफी गर्म हो जाती है. अब इसमें कंक्रीट की इमारतें, डामर की सड़कें, कम पेड़, गाड़ियों और एसी की गर्म हवा से भी गर्मी का असर बढ़ता जा रहा है. 
 

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