खान मार्केट नई दिल्ली का सबसे मंहगा मार्केट प्लेस माना जाता है. यह लुटियंस का सबसे प्रभावशाली बाजार है. यहां से खरीदारी करना स्टेटस सिंबल भी माना जाता है. क्योंकि, यहां आने वाले लोगों में विदेशी टूरिस्ट, बड़े अफसर, नौकरशाह, सांसद, विदेशी अधिकारी, दूतावासों में काम करने वाले लोग ही होते हैं.
अब सवाल यह उठता है कि इस बाजार का नाम खान मार्केट क्यों पड़ा. आखिर किस शख्स के नाम पर इसे यह नाम दिया गया. खान मार्केट 'यू' आकार का दो मंजिला परिसर सन् 1951 में बनाया गया था. आज इसे राजधानी के सबसे पुराने और सबसे आलीशान बाजारों में से एक माना जाता है.
खान बाजार की स्थापना 1951 में नवगठित भारतीय गणराज्य के पुनर्वास मंत्रालय द्वारा की गई थी. इसका मकसद 1947 में भारत के विभाजन के बाद दिल्ली आए शरणार्थियों, विशेष रूप से उत्तर-पश्चिम सीमांत प्रांत (अब खैबर पख्तूनख्वा, पाकिस्तान) से आए लोगों को आर्थिक अवसर प्रदान करना था.
क्यों इस मार्केट का नाम खान मार्केट रखा गया?
इस बाजार का नाम खान अब्दुल जब्बार खान के नाम पर रखा गया है. जिन्हें डॉ. खान साहब के नाम से भी जाना जाता है. खान साहब, महान स्वतंत्रता सेनानी खान अब्दुल गफ्फार खान (फ्रंटियर गांधी) के बड़े भाई थे. इन्होंने विभाजन की हिंसा से कई शरणार्थियों को सुरक्षित बाहर निकलने में मदद की थी.
आधुनिक इतिहास के सबसे विनाशकारी विस्थापनों में से एक के दौरान लोगों की जान बचाने में उनकी भूमिका की सराहना और श्रद्धांजलि के तौर पर इस बाजार का नाम खान मार्केट रखा गया. हालांकि, कुछ जगहों पर यह भी बताया गया है कि खान मार्केट से अब्दुल जब्बार के साथ उनके भाई अब्दुल गफ्फार को भी श्रद्धांजलि दी गई. इस भव्य बाजार का नाम अब्दुल गफ्फार खान के नाम पर भी रखा गया है. यानी इस बाजार का नाम 'खान मार्केट', दोनों भाईयों की भारतीय स्वतंत्रता और लोगों के विस्थापन में उनके सहयोग के रूप में मान्यता देने के लिए रखा गया.
आसपास रहते हैं दिल्ली के सबसे धनी लोग
मूल रूप से, यू-आकार के दो मंजिला मार्केट कॉम्प्लेक्स में ग्राउंड पर 154 दुकानें और उनके ऊपर दुकानदारों और उनके परिवारों के लिए 74 फ्लैट थे. खान मार्केट नई दिल्ली के सबसे प्रभावशाली रेसिडेंशियल एरिया के पास है. इसके दो किलोमीटर के दायरे में गोल्फ लिंक्स, लोदी एस्टेट, जोर बाग, सुजान सिंह पार्क, पंडारा रोड और शाहजहां रोड जैसे इलाके स्थित हैं. यहां सीनियर नौकरशाह, राजनयिक, सांसद और दिल्ली के कुछ सबसे धनी परिवार रहते हैं.
इस विशिष्ट वर्ग के लोग खान मार्केट के स्थायी कस्टमर हैं. क्योंकि लुटियंस दिल्ली के निवासी कीमत को लेकर संवेदनशील उपभोक्ता नहीं हैं. वे हाई नेट वर्थ वाले व्यक्ति हैं, जिनकी खर्च करने की शैली प्रीमियम कीमतों को वहन करने में सक्षम है. यहां से इंडिया इंटरनेशनल सेंटर, इंडिया हैबिटेट सेंटर और चाणक्यपुरी स्थित दूतावासों की दूरी काफी कम है.