नॉर्थ कोरिया ने अपने संविधान में बदलाव किया है और परमाणु हमले को लेकर बने कानून को अपडेट किया है. नॉर्थ कोरिया के संविधान में किए गए लेटेस्ट अपडेट के अनुसार, अगर किसी परिस्थिति में किम जोंग उन की हत्या हो जाती है या विदेशी हमले में देश की कमांड व्यवस्था नष्ट हो जाती है, तो सेना को ऑटोमैटिक परमाणु हथियारों से जवाबी हमला करना होगा. इसके लिए किसी अलग आदेश की जरूरत नहीं पड़ेगी.
लेकिन, क्या आप जानते हैं इस अपडेट से पहले भी नॉर्थ कोरिया में परमाणु अटैक को लेकर संविधान में कुछ परिस्थितियां तय की गई थी, जिनमें नॉर्थ कोरिया न्यूक्लियर अटैक कर सकता था. तो जानते हैं क्या हैं वो कंडीशन...
2013 के कानून में क्या लिखा था?
यूरोन्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, साल 2013 के कानून में यह प्रावधान था कि उत्तर कोरिया किसी परमाणु शक्ति वाले दुश्मन देश के आक्रमण या हमले को रोकने और जवाबी हमले करने के लिए परमाणु हथियारों का इस्तेमाल कर सकता है. लेकिन, फिर साल 2022 में इन नियमों और बदलाव किया गया और कुछ परिस्थितियों को और जोड़ दिया गया.
2022 में क्या कहा गया?
- अगर किसी दुश्मन देश का परमाणु हमला होने वाला हो यानी उत्तर कोरिया को लगे कि उस पर न्यूक्लियर अटैक होने वाला है, तो वो न्यूक्लियर अटैक कर सकता है.
- अगर नॉर्थ कोरिया को लगता है कि उस पर बड़े पैमाने के विनाशकारी हथियार से हमला होने वाला है या फिर जैविक, रासायनिक या बड़े मिसाइल हमले की तैयारी है तो वो परमाणु बम गिरा सकता है.
- अगर उत्तर कोरिया के 'रणनीतिक ठिकानों' पर हमला होने वाला हो, जिसमें मिसाइल बेस, परमाणु केंद्र और सैन्य कमांड सिस्टम शामिल है... तो भी परमाणु अटैक किया जा सकता है.
- अगर देश के टॉप नेतृत्व पर खतरा हो खासतौर पर किम जोंग उन या परमाणु कमांड ढांचे को निशाना बनाया जाए, तो भी न्यूक्लियर वॉर शुरू हो सकती है.
- अगर परमाणु कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम खतरे में पड़ जाए तो ऐसी स्थिति में परमाणु हथियार लॉन्च किए जा सकते हैं.
- अगर दुश्मन की तरफ से “इमिनेंट अटैक” यानी तत्काल हमला होने के संकेत मिलें तो भी नॉर्थ कोरिया पहले भी अटैक कर सकता है.
- अगर दुश्मन देश गैर-परमाणु हो, लेकिन किसी परमाणु शक्ति के साथ मिलकर हमला करे तो भी उत्तर कोरिया परमाणु हथियार इस्तेमाल कर सकता है.
दरअसल, 2013 तक उत्तर कोरिया खुद को मुख्य रूप से परमाणु शक्ति बताता था और जवाबी कार्रवाई में परमाणु हमले की बात कहता था, लेकिन 2022 के कानून के बाद उसने साफ कर दिया कि जरूरत पड़ने पर वह “पहले” भी परमाणु हमला कर सकता है.
अब क्या बदलाव किया?
उत्तर कोरिया की 15वीं सुप्रीम पीपुल्स असेंबली की बैठक 22 मार्च को प्योंगयांग में हुई थी. इसी में यह संशोधन पास किया गया.नेशनल इंटेलिजेंस सर्विस ने वरिष्ठ अधिकारियों को बताया कि अब न्यूक्लियर फोर्सेस पर नियंत्रण अगर दुश्मन के हमले से खतरे में पड़ जाए तो ऑटोमैटिक और तुरंत परमाणु हमला किया जाएगा. किम जोंग उन के कमांड सिस्टम को खतरा होने पर कोई इंतजार नहीं होगा. परमाणु हथियारों का इस्तेमाल अपने आप हो जाएगा.