ईरान जंग में अब सबसे अहम मुद्दा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बन गया है. 28 फरवरी से शुरू हुई जो जंग आर्मी बेस या नेताओं तक थीं, अब वो जंग समुद्र की तरफ शिफ्ट हो गई है. मिसाइलों की जंग में टॉरपीडो शामिल हो गए हैं. अब दोनों पक्ष समुद्र में अपनी ताकत का इस्तेमाल कर रहे हैं. खासकर दुनिया के सबसे संवेदनशील समुद्री रास्तों में से एक Strait of Hormuz इन दिनों तनाव का केंद्र बना हुआ है. यहां से गुजरने वाले व्यापारी जहाजों के लिए हर सफर अब पहले से कहीं ज्यादा जोखिम भरा हो गया है. ऐसे में इस जंग में मर्चेंट नेवी पर सबसे ज्यादा खतरा महसूस होने लगा है. तो जानते हैं कैसे मर्चेंट नेवी के जवानों और ऑफिसर्स के लिए काम कितना मुश्किल हो गया है.
दरअसल, अब युद्ध का दबाव उन लोगों पर पड़ रहा है, जो दुनिया के व्यापार को चलाते हैं और वो हैं मर्चेंट नेवी के नाविक. अब स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तैनात नाविक मुश्किल वक्त से गुजर रहे हैं, जहां अमेरिका ने भी हमले तेज कर दिए हैं. इन हमलों ने इस महत्वपूर्ण व्यापारिक मार्ग पर जहाजों की आवाजाही को लगभग पूरी तरह रोक दिया है, जहां से दुनिया का 20 प्रतिशत तेल और तरलीकृत प्राकृतिक गैस गुजरता है. रोजाना करीब 17 से 20 मिलियन बैरल कच्चा तेल इस समुद्री मार्ग से दुनिया के बाजारों तक जाता है. ईरान के 30 से ज्यादा जहाज डुबो दिए गए हैं.
क्या है मर्चेंट नेवी का काम?
पहले आपको बताते हैं कि आखिर मर्चेंट नेवी का काम क्या है... इसके बाद आप समझ जाएंगे कि कैसे मर्चेंट नेवी वालों के लिए काफी मुश्किल है. दरअसल, जब भी कोई जहाज किसी एक जगह से दूसरी जगह जाता है तो मर्चेंट नेवी इसे ले जाने का काम करती है. ये जहाज तेल, गैस, कंटेनर, कारें, अनाज आदि एक देश से दूसरे देश तक ले जाते हैं. इनका काम सिर्फ ट्रांसपोर्ट का होता है और ये किसी जहाज को सिक्योरिटी नहीं देते हैं. ये जहाज को चलाने का काम करती है और आपातकालीन स्थिति में नेवी इनकी मदद करती है.
इसमें शामिल जवान कोई फाइटर्स नहीं होते हैं और वो सैनिक की तरह नहीं होते हैं. इनका काम सिर्फ जहाज को लेकर जाना होता है. लेकिन, इनके कंधों पर अरबों रुपये के सामान को सही जगह ले जाने की जिम्मेदारी होती है.
युद्ध में कितना मुश्किल है काम?
लेकिन, जब युद्ध का समय है तो इनका काम काफी ज्यादा रिस्क वाला हो गया है. अभी जो जहाज फारस की खाड़ी के आसपास से आ रहे हैं, उन पर काफी ज्यादा खतरा है. ऐसे वक्त में युद्धपोतों की तैनाती, ड्रोन की निगरानी और मिसाइल सिस्टम के बीच मर्चेंट शिप्स को गुजरना पड़ता है. ऐसे में रियर एडमिरल गिरीश कुमार गर्ग (रि) ने कार्गो शिप की सिक्योरिटी को लेकर बताया कि इन्हें कोई भी सिक्योर नहीं करता है. ये बिना सिक्योरिटी चलते हैं और जब कोई विपरीत परिस्थिति आती है तो नेवी इन्हें गार्ड करती है और बचाती है.
साथ ही उन्होंने बताया कि मर्चेंट नेवी का काम शिपमेंट का होता हैं और इनका वॉरशिप से कोई लेना देना नहीं होता है. नेवी का काम वॉरशिप का होता है. लेकिन, उन्होंने बताया कि अभी की स्थिति में कोई भी समुद्र में कोई जहाज नहीं ले जाना चाह रहा है और हर किसी को डर है. ऐसे में कहा जा सकता है कि मर्चेंट नेवी का खतरा भी बढ़ गया है और अगर वो जहाज के साथ समुद्र में उतरते हैं तो उनके लिए काफी मुश्किल हो सकती है. इसके अलावा इंश्योरेंस प्रीमियम रेट हाई होने से भी जहाज नहीं आ रहे हैं और अगर जहाज आते हैं तो काफी रिस्क है.
पनडुब्बियों में कैसे रहते हैं ऑफिसर?
पनडुब्बी में नेवी के जवान कई महीनों तक एक सीलबंद स्टील सिलेंडर के अंदर रासायनिक रूप से निर्मित हवा में सांस लेता है. साथ ही वो उल्टे चक्रों में सोता है. साथ ही एक अजीब कंपन का सामना करता रहता है. उसका तनाव हार्मोन के ऐसे स्तर पर होता है जो उसके पेशे को जाने बिना उसकी जांच करने वाले किसी भी चिकित्सक को चिंतित कर देगा. हालांकि, इसके लिए उनकी एक कठिन ट्रेनिंग होती है, जिसके बाद वो ऐसा करने के लिए तैयार होते हैं.
उन्हें वाटर सूट पहनाकर लगभग 30 से 40 फीट लंबी टॉरपीडो ट्यूब में रेंगने के लिए कहा जाता है. ट्यूब पानी से भरी होती है. दूसरे छोर पर उन्हें एक पूल में छोड़ दिया जाता है और उन्हें 20 से 30 फीट ऊपर सतह तक आना होता है, अपने फेफड़ों में दबाव के बदलाव को संभालना होता है और बिना घबराए अपनी सांस पर नियंत्रण रखना होता है. एस्केप ट्रेनिंग टावर ड्रिल की मनोवैज्ञानिक जांच में पास होना होता है.