20 अप्रैल 1980 को फिदेल कास्त्रो शासन ने घोषणा की कि अमेरिका में प्रवास करने के इच्छुक सभी क्यूबावासी हवाना के पश्चिम में स्थित मारिएल बंदरगाह पर नावों में सवार हो सकते हैं. इससे 'मारिएल बोटलिफ्ट' की शुरुआत हुई. 20 अप्रैल को पहले दिन मारिएल से 125,000 क्यूबाई शरणार्थियों का पहला जत्था फ्लोरिडा के लिए रवाना हो गया. मारिएल बोटलिफ्ट को एक ऐसी घटना के तौर पर जाना जाता है, जब शीत युद्ध के दौरान 1980 में हजारों क्यूबावासी फ्लोरिडा जाने के लिए मजबूर हो गए थे.
फिदेल कास्त्रो के आप्रवासन नीतियों में ढील देने के बाद, लगभग 125,000 क्यूबाई लोग पांच महीने में अमेरिकी तटों पर पहुंचे. 1980 का मारिएल बोटलिफ्ट क्यूबावासियों का अमेरिका में एक सामूहिक प्रवास था. यह पलायन अमेरिकी व्यापार प्रतिबंध के कारण कमजोर हुई स्थिर अर्थव्यवस्था और क्यूबा के राष्ट्रपति फिदेल कास्त्रो की हताशा के कारण पैदा हुआ था.
क्यूबा के कम्युनिस्ट शासन की बंद आप्रवासन नीति को पलटते हुए कास्त्रो ने कहा था कि जिनमें क्रांतिकारी जीन नहीं हैं, जिनमें क्रांतिकारी रक्त नहीं है. हम उन्हें अपने देश में नहीं चाहते, हमें उनकी आवश्यकता नहीं है. कास्त्रो ने क्यूबा छोड़ने के इच्छुक क्यूबावासियों से कहा कि वे अमेरिका चले जाएं. तब क्यूबा से अमेरिका आने वाले लोगों को तुरंत नागरिकता मिल जाती थी.
इसके बाद लगभग 125,000 क्यूबावासियों ने कास्त्रो की बात मानकर मछली और झींगा पकड़ने वाले जहाजों पर सवार होकर खतरनाक फ्लोरिडा जलडमरूमध्य को पार किया और अमेरिकी तट पर पहुंचे. पांच महीनों के दौरान उनके आगमन ने अमेरिका को नए प्रवासियों के समूहों से भर दिया और रिफ्यूजी कैंपों और अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर बढ़ते दबाव को बढ़ा दिया.
इस पलायन के दौरान एक और गंभीर समस्या पैदा हो गई. फिदेल कास्त्रो की सरकार ने वहां की जेलों में बंद दुर्दांत अपराधियों को भी इस दौरान अमेरिका भेज दिया. जब यह पता चला कि कई निर्वासितों में क्यूबा की जेलों और मानसिक स्वास्थ्य केंद्रों से रिहा कर दिए गए लोग भी शामिल हैं, तो अमेरिकी प्रशासन ने प्रवासियों की जांच शुरू की. उनमें से कई को शरणार्थी शिविरों में रखा गया, जबकि अन्य को निर्वासन की सुनवाई के लिए जेलों में रखा गया.
फ्लोरिडा में उतरे 125,000 शरणार्थियों में से 1,700 से अधिक को जेल में डाल दिया गया. कास्त्रो द्वारा अपने देश की सीमा को अचानक खोलना, क्यूबा के असंतुष्टों की देश छोड़ने की इच्छा को दर्शाने वाली घटनाओं की एक श्रृंखला के बाद हुआ. जब अन्य वैश्विक शक्तियां क्यूबा के खिलाफ शीत युद्ध में अमेरिका के साथ गठबंधन कर रही थीं, तब द्वीप का विदेशी व्यापार पंगु हो गया था. क्यूबा को 1962 में शुरू हुए अमेरिकी व्यापार प्रतिबंध और उसके मुख्य वाणिज्यिक समर्थक, सोवियत संघ के धीरे-धीरे विघटन के दबाव के कारण आर्थिक संकट का सामना करना पड़ा.
क्यूबावासियों का, यहां तक कि उन लोगों का भी जिन्होंने शुरू में 1959 की क्यूबा क्रांति का समर्थन किया था , देश पर से विश्वास कम होने लगा. शरण देने के प्रयास 1970 के दशक के उत्तरार्ध में शुरू हुए और 1980 के दशक के आरंभ में भी जारी रहे. अंततः अक्टूबर 1980 में अमेरिकी और क्यूबा सरकारों के बीच आपसी समझौते से यह पलायन खत्म हुआ.