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होम लोन की कितनी EMI ड्यू होने पर नीलाम हो जाता है मकान?

अगर कोई व्यक्ति बैंक या किसी मान्यता प्राप्त वित्तीय संस्था से लिया गया लोन समय पर नहीं चुकाता और लगातार 3 ईएमआई नहीं भरता है, तो बैंक उस लोन को एनपीए घोषित कर देता है. 

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कई बार बैंक किस्तों में राहत या समय भी दे देता है. ( Photo: Pexels)
कई बार बैंक किस्तों में राहत या समय भी दे देता है. ( Photo: Pexels)

आज के समय में ज्यादातर लोग घर, गाड़ी या किसी जरूरत के लिए बैंक से लोन लेते हैं. लेकिन कई बार लोग किसी कारण या आर्थिक परेशानियों की वजह से समय पर अपनी ईएमआई नहीं चुका पाते. ऐसे में लोगों के मन में यह डर बना रहता है कि कहीं बैंक उनकी संपत्ति जब्त कर बेच न दे. इसी डर को दूर करने के लिए यह समझना जरूरी है कि बैंक कब और कैसे कार्रवाई करता है, और किन स्थितियों में वह आपकी संपत्ति को नीलाम कर सकता है या नहीं कर सकता. तो चलिए पटियाला कोर्ट के वकील महमूद आलम से जानते हैं इसको लेकर सभी जानकारी. 

3 महीने तक ईएमआई नहीं चुकाने पर एनपीए घोषित
महमूद आलम बताते हैं कि सबसे पहले समझिए कि अगर कोई व्यक्ति लगातार तीन महीने तक अपनी ईएमआई नहीं भरता है, तो बैंक उस लोन को एनपीए घोषित कर देता है. इसका मतलब यह होता है कि बैंक को अब यह लगने लगा है कि लोन का यह पैसा वापस मिलना मुश्किल है. इसके बाद बैंक उस व्यक्ति को नोटिस भेजता है और उसे बकाया रकम चुकाने के लिए समय देता है. अगर व्यक्ति नोटिस मिलने के बाद भी पैसा जमा नहीं करता, तो बैंक सरफेसी कानून के तहत कार्रवाई शुरू कर सकता है. इस कानून के जरिए बैंक को यह अधिकार मिलता है कि वह बिना कोर्ट गए भी उधार लेने वाले की संपत्ति को जब्त कर सकता है और उसे बेचकर अपना पैसा वसूल सकता है.

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बैंक को सीधे संपत्ति बेचने का अधिकार नहीं
लेकिन हर मामले में बैंक सीधे आपकी संपत्ति नहीं बेच सकता. इसके लिए कुछ नियम और शर्तें तय की गई हैं. सबसे पहले, अगर किसी व्यक्ति का बकाया कर्ज एक लाख रुपये से कम है, तो बैंक सरफेसी कानून का इस्तेमाल नहीं कर सकता. ऐसी स्थिति में बैंक को सामान्य अदालत का सहारा लेना पड़ता है. यानी छोटे कर्ज के मामलों में बैंक सीधे नीलामी नहीं कर सकता. दूसरी बात अगर किसी व्यक्ति ने अपने लोन का 80 प्रतिशत या उससे ज्यादा हिस्सा चुका दिया है, तो बैंक उसकी संपत्ति को सरफेसी कानून के तहत नीलाम नहीं कर सकता. ऐसी स्थिति में भी बैंक को कोर्ट के जरिए ही पैसा वसूलना होगा.

इसका मतलब यह है कि अगर आपने अपने लोन का बड़ा हिस्सा पहले ही चुका दिया है, तो आपको तुरंत संपत्ति खोने का डर नहीं होना चाहिए. कानून ऐसे मामलों में आपको कुछ हद तक सुरक्षा देता है. इसके अलावा यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि यह नियम कृषि लोन पर लागू नहीं होता. खेती से जुड़े कर्ज के लिए अलग नियम बनाए गए हैं, इसलिए वहां सरफेसी कानून का इस्तेमाल नहीं किया जाता. कुल मिलाकर, बैंक के पास पैसे वसूलने के अधिकार जरूर होते हैं, लेकिन वह बिना नियमों के आपकी संपत्ति नहीं बेच सकता. ऐसे मामलों में बैंक को हर कदम एक तय प्रक्रिया के अनुसार ही उठाना होगा. 

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इसलिए अगर आप किसी वजह से अपनी ईएमआई समय पर नहीं भर पा रहे हैं, तो सबसे अच्छा तरीका यह है कि आप बैंक से संपर्क करें और अपनी स्थिति के बारे में बताएं. कई बार बैंक किस्तों में राहत या समय भी दे देता है.  कानून का मकसद सिर्फ बैंक का पैसा वापस दिलाना नहीं, बल्कि उधार लेने वाले के अधिकारों की भी रक्षा करना है. इसलिए घबराने के बजाय सही जानकारी रखना और समय पर कदम उठाना सबसे जरूरी है.

सरफेसी कानून क्या है? 
सरफेसी कानून(SARFAESI Act 2002), भारत में बैंकों और वित्तीय संस्थाओं को यह अधिकार देता है कि अगर कोई व्यक्ति लिया हुआ लोन समय पर नहीं चुकाता, तो बैंक उसकी संपत्ति को जब्त करके बेच सकता है और अपना पैसा वापस ले सकता है. यह कानून साल 2002 में बनाया गया था, ताकि बैंकों को बार-बार कोर्ट के चक्कर न लगाने पड़ें और वे जल्दी अपना पैसा वसूल सकें. सबसे पहले जान लें कि अगर कोई व्यक्ति लगातार अपनी ईएमआई नहीं भरता, तो बैंक पहले उसे नोटिस भेजता है और पैसा जमा करने के लिए समय देता है.

अगर इसके बाद भी भुगतान नहीं होता, तो बैंक इस कानून के तहत कार्रवाई शुरू करता है. लेकिन,  बैंक बिना कोर्ट की अनुमति के भी कार्रवाई कर सकता है. बैंक उधार लेने वाले की संपत्ति को अपने कब्जे में ले सकता है और फिर उसे नीलाम करके बकाया राशि वसूल सकता है.

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हालांकि, यह कानून हर मामले में लागू नहीं होता. जैसे कि अगर लोन राशि बहुत कम बची है या कुछ खास शर्तें पूरी नहीं होतीं, तो बैंक को सामान्य अदालत का सहारा लेना पड़ता है. सरफेसी कानून बैंकों को ताकत देता है कि वे अपना पैसा जल्दी और आसानी से वापस ले सकें, लेकिन इसके साथ ही कुछ नियम भी तय किए गए हैं ताकि उधार लेने वाले के अधिकार सुरक्षित रहें. यह कानून बैंक और ग्राहक दोनों के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए बनाया गया है.

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