scorecardresearch
 

जापान में पहले 4 मस्जिद थीं, अब हैं 150! 13 साल में कितनी बढ़ी मुस्लिम आबादी? अब हो रहा बवाल

जापान में इन दिनों मुस्लिम विरोधी लहर देखने को मिल रही है. पिछले कुछ सालों में कई ऐसे मौकों पर वहां की स्थानीय जनभावना में बढ़ती मुस्लिम आबादी के प्रति विरोध का भाव दिखा है. इसकी झलक वहां की चुनी सरकार में भी नजर आई है.

Advertisement
X
जापान में बढ़ रही हैं मुस्लिम विरोधी जनभावनाएं (Photo - Pexels)
जापान में बढ़ रही हैं मुस्लिम विरोधी जनभावनाएं (Photo - Pexels)

जापान में आम चुनाव के दौरान काफी मुस्लिम विरोधी मुद्दे उठे. जगह-जगह मस्जिद निर्माण और कब्रिस्तानों के लिए प्रस्तावित जगह का विरोध हुआ. इन दिनों जापान में हर जगह मुस्लिम विरोधी लहर देखने को मिल रही है. वहां की नई सरकार भी इससे अछूती नहीं है. क्योंकि, उनकी नीतियां में कहीं न कहीं प्रवासियों और विदेशी आबादी के प्रति सख्ती दिखाई दे रही है. ऐसे में यह समझना जरूरी है कि आखिर वहां ऐसा क्या बदलाव हो रहा है कि  इस छोटे से देश में भी मुस्लिम विरोधी भागवनाएं बढ़ती जा रही हैं. 

टोक्यो के पास योकोहामा में चुनाव के दौरान वहां प्रस्तावित मस्जिद को एक प्रमुख मुद्दा बनाने की कोशिश की गई. साथ ही उन स्थानीय लोगों की भी जापानी आलोचना करते दिखे, जो कह रहे हैं कि मस्जिद का विरोध विदेशियों के प्रति नफरत को बढ़ावा दे रही है. 

कई मौकों पर दिखी मुस्लिम विरोधी जनभावना
जापान वायर की रिपोर्ट के मुताबिक, 29 जनवरी को एक निर्दलीय प्रत्याशी सुसुम किकुताके ने जेआर फुजिसावा स्टेशन के बाहर एक भाषण में कानगावा प्रांत के फुजिसावा में प्रस्तावित मस्जिद निर्माण को रोकने का आह्वान किया था. हालांकि, इसका कुछ राजनीतिक दल और स्थानीय लोगों ने विरोध किया, लेकिन ज्यादातर जापानी लोगों की भावनाएं मस्जिद विरोध के साथ थी.

अनसीन जापान की रिपोर्ट के मुताबिक, 2023 में  जापान के फुकुओका प्रांत के किताक्यूशु शहर में स्कूलों में मुस्लिम-अनुकूल लंच यानी हलाल भोजन परोसने को लेकर विवाद खड़ा हो गया था.  इसको लेकर 1,000 से अधिक शिकायतें दर्ज की गईं और शहर के कामकाज में बाधा उत्पन्न हुई. इस वजह से शहर को विरोध का सामना करना पड़ा. वहीं इबाराकी प्रांत के कस्बों में स्कूलों ने हलाल लंच की शुरुआत की है, ताकि मुस्लिम छात्र अपने सहपाठियों के साथ भोजन कर सकें.

Advertisement

जापान के स्थानीय लोगों में मुस्लिम विरोधी भावनाएं कुछ सालों में तेजी से बढ़ी है. इसके पीछे वजह जापान में घटते जन्मदर और बढ़ती मुस्लिम आबादी को बताया जा रहा है. जापान में विदेशियों के बढ़ती जनसंख्या और वहां के लोकल्स की इंसिक्योरिटी, जापान में मस्जिद निर्माण और बढ़ती मुस्लिम आबादी के विरोध की मुख्य वजह बताई जा रही है. ऐसे में उन आंकड़ों को समझना जरूरी है कि कैसे  जापान की मुस्लिम आबादी पिछले कुछ सालों में दोगुनी से भी ज्यादा बढ़ी है और इसके साथ ही मस्जिदों की संख्या में बढ़ोतरी हो रही है.

एक दशक में दोगुनी से भी ज्यादा हो गई है मुस्लिम आबादी
साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, वासेडा विश्वविद्यालय के प्रोफेसर एमेरिटस और जापान में मुस्लिम मामलों के विशेषज्ञ हिरोफुमी तानादा के अनुमान के अनुसार, 2024 की शुरुआत में देश की मुस्लिम आबादी लगभग 350,000 थी - जो 2010 में 110,000 मुसलमानों की तुलना में तीन गुना से अधिक है. इनमें से 54,000 जापानी हैं जिन्होंने इस्लाम धर्म अपना लिया है.1980 में, पूरे जापान में कुल चार मस्जिदें थीं. जून 2024 तक यह संख्या बढ़कर लगभग 150 हो गई है.

 जापान में हाल में ही चुनी गई नई प्रधानमंत्री ताकाइची और उनकी पार्टी भी दक्षिणपंथी विचारधारा से प्रभावित हैं और जापान में बढ़ती विदेशी आबादी के प्रति लोगों के आक्रोश को इन्होंने काफी अच्छे तरीके से भुनाया है. ताकाइची ने  विदेशियों पर सख्त नीतियों, जासूसी-विरोधी उपायों और अन्य ऐसे उपायों के लिए दबाव डाल रही हैं जो धुर दक्षिणपंथी आबादी को पसंद आते हैं, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि ये नागरिक अधिकारों को कमजोर कर सकते हैं.

Advertisement

विदेशियों को लेकर सख्त हैं नई प्रधानमंत्री
वह आव्रजन और विदेशियों पर सख्त नीतियों के लिए भी जोर दे रही हैं. यह बढ़ती हुई धुर दक्षिणपंथी आबादी के साथ मेल खाता है, जिसने एंटी ग्लोबलिस्ट पार्टी सैनसेइटो के बढ़ते प्रभाव का समर्थन किया है, जो कहती है कि जापान की घटती आबादी के सोल्यूशन के रूप में विदेशी श्रम को बढ़ावा देने वाली एलडीपी की नीति जापानी समुदायों को असुरक्षित बना रही है और सांस्कृतिक टकराव पैदा कर रही है.

उनकी सरकार ने जनवरी में स्थायी निवास और नागरिकता प्राप्त करने के संबंध में कड़े नियमों को मंजूरी दी, साथ ही बकाया कर और सामाजिक बीमा को रोकने के लिए उपाय भी किए हैं.  प्रधानमंत्री की इन नीतियों से साफ है कि इन दिनों जापान में क्या कुछ चल रहा है.  जापान के लोगों के बीच लोकप्रिय बने रहने के लिए जनभावनाओं पर पकड़ मजबूत बनाए रखना बहुत जरूरी है और ताकाइची भी वही कर रही हैं. 

इन दिनों जापान में वहां के मूल निवासी अपने सांस्कृति मूल्यों के लिए सबसे बड़ा खतरा बढ़ते प्रवासियों और विदेशी श्रमशक्ति को मान रहे हैं. इनमें भी खासकर बढ़ती मुस्लिम आबादी को मूल जापानी संस्कृति के लिए सबसे बड़ा खतरा माना जा रहा है. इस वजह से जापान में जगह-जगह मस्जिदों के निर्माण और बढ़ती मुस्लिम आबादी का विरोध व्यापाक तौर से हो रहा है. 

---- समाप्त ----
Live TV

Advertisement
Advertisement