1 मई 1926 को फोर्ड मोटर पहली कंपनी थी, जिसने अपने ऑटोमोबाइल कारखानों में काम करने वाले कर्मचारियों के लिए हफ्ते में पांच दिन का यानी 40 घंटे का सिस्टम शुरू किया. यह नीति उसी साल अगस्त से फोर्ड के कार्यालय कर्मचारियों पर भी लागू कर दी गई. फोर्ड की इस नीति का धीरे-धीरे दूसरी कंपनियों ने भी अनुसरण किया और आज 5 वर्किंग डे हर देश में अधिकतर कंपनियों में लागू है.
हेनरी फोर्ड की डेट्रॉइट स्थित ऑटोमोबाइल कंपनी ने अपनी श्रम नीतियों में पहले भी अभूतपूर्व कदम उठाए थे. 1914 की शुरुआत में, व्यापक बेरोजगारी और बढ़ते श्रम असंतोष के माहौल में, फोर्ड ने घोषणा की कि वह अपनी फैक्ट्री के श्रमिकों को आठ घंटे के कार्यदिवस के लिए न्यूनतम 5 डॉलर का वेतन देंगे, जो पहले नौ घंटे के लिए 2.34 डॉलर था.
महिला श्रमिकों के लिए यह नीति 1916 में अपनाई गई. इस खबर ने उद्योग जगत में कई लोगों को चौंका दिया. उस समय, 5 डॉलर प्रति दिन एक औसत ऑटोमोबाइल कर्मचारी के वेतन का लगभग दोगुना था, लेकिन यह एक दूरदर्शी कदम साबित हुआ, जिसने असेंबली लाइन पर उत्पादकता को तुरंत बढ़ाया और फोर्ड के श्रमिकों के बीच कंपनी के प्रति वफादारी और गर्व की भावना पैदा की.
कार्य सप्ताह को छह दिन से घटाकर पांच दिन करने का फैसला मूल रूप से 1922 में लिया गया था. उसी वर्ष मार्च में द न्यूयॉर्क टाइम्स में प्रकाशित एक लेख के अनुसार , हेनरी के बेटे और कंपनी के अध्यक्ष एडसेल फोर्ड ने समझाया कि प्रत्येक व्यक्ति को सप्ताह में एक दिन से अधिक आराम और मनोरंजन की जरूरत होती है.
फोर्ड कंपनी ने हमेशा अपने कर्मचारियों के लिए एक आदर्श घरेलू जीवन को बढ़ावा देने का प्रयास किया है. हमारा मानना है कि उचित जीवन जीने के लिए प्रत्येक व्यक्ति को अपने परिवार के साथ अधिक समय बिताने का अवसर मिलना चाहिए.
हेनरी फोर्ड ने इस फैसले के बारे में कहा कि यह धारणा बदलने का समय आ गया है कि कामगारों के लिए अवकाश या तो 'व्यर्थ समय' है या एक विशेष वर्ग का विशेषाधिकार. हालांकि, फोर्ड ने खुद स्वीकार किया कि प्रोडक्शन बढ़ाने के लिए पांच दिवसीय कार्य सप्ताह शुरू किया गया था.
हालांकि, कामगारों का कार्यस्थल पर बिताया गया समय कम हो गया था, लेकिन उनसे कार्यस्थल पर अधिक मेहनत करने की अपेक्षा की जाती थी. देश और दुनिया भर के निर्माताओं ने जल्द ही फोर्ड का अनुसरण किया और सोमवार से शुक्रवार का कार्य सप्ताह स्टैंडर्ड ट्रेंड बन गया.