दुनिया में जब भी युद्ध या अंतरराष्ट्रीय तनाव बढ़ता है, उसका सीधा असर आम लोगों की जिंदगी पर पड़ता है. खासतौर पर पेट्रोल और डीजल की कीमतें तेजी से बढ़ने लगती हैं. हाल ही में सामने आए आंकड़ों में यह दिखाया गया है कि युद्ध के बाद कई देशों में तेल की कीमतों में भारी बढ़ोतरी हुई, लेकिन भारत में इसका असर बाकी देशों की तुलना में काफी कम रहा.
तस्वीर में दिए गए आंकड़ों के अनुसार पाकिस्तान, मलेशिया, अमेरिका, श्रीलंका और कई यूरोपीय देशों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बड़ी बढ़ोतरी दर्ज की गई. वहीं भारत में पेट्रोल की कीमत में सिर्फ 3.2% और डीजल में 3.4% की वृद्धि हुई, जो लिस्ट में शामिल देशों में सबसे कम है.
पाकिस्तान और मलेशिया में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी
आंकड़ों के मुताबिक, पाकिस्तान में पेट्रोल की कीमतों में करीब 60.7% और डीजल में 50.4% की बढ़ोतरी हुई. वहीं मलेशिया में डीजल की कीमतों में 72.9% और पेट्रोल में 58.3% तक उछाल देखा गया. यूएई में भी पेट्रोल 52.4% और डीजल 86.1% तक महंगा हुआ. अमेरिका जैसे बड़े देश में पेट्रोल की कीमत 46% और डीजल 48.1% तक बढ़ गया. इन आंकड़ों से साफ पता चलता है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें बढ़ने का असर लगभग हर देश पर पड़ा.
यूरोप और एशिया के देशों में भी बढ़ी कीमतें
ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया, इटली, जर्मनी, जापान और दक्षिण कोरिया जैसे देशों में भी पेट्रोल और डीजल की कीमतों में अच्छी-खासी बढ़ोतरी हुई. ब्रिटेन में पेट्रोल 19.1% और डीजल 33% तक महंगा हुआ. ऑस्ट्रेलिया में डीजल की कीमत में करीब 38.9% और पेट्रोल 17.2% की बढ़ोतरी दर्ज की गई. जर्मनी और जापान जैसे विकसित देशों में भी लोगों को ईंधन के लिए पहले से ज्यादा पैसे खर्च करने पड़े. बांग्लादेश में डीजल की कीमत में करीब 15% और पेट्रोल 16.7% की बढ़ोतरी दर्ज की गई.

जर्मनी और जापान जैसे विकसित देशों में भी लोगों को ईंधन के लिए पहले से ज्यादा पैसे खर्च करने पड़े. जर्मनी में पेट्रोल 10.7% और डीजल 13.2 % की तेजी देखने को मिली. चीन की बात करें तो यहां पेट्रोल में 25.3 % और पेट्रोल 27.1% की बढ़ोतरी दर्ज की गई. वहीं, फ्रांस में पेट्रोल 22.2 % और डीजल में 30.7% अच्छी-खासी बढ़ोतरी देखी गई.
भारत में क्यों कम बढ़ीं कीमतें?
भारत में तेल की कीमतों में बाकी देशों की तुलना में कम बढ़ोतरी होने की कई वजहें मानी जा रही हैं. विशेषज्ञों के अनुसार सरकार ने टैक्स में कटौती, तेल कंपनियों पर नियंत्रण और दूसरे देशों से सस्ते कच्चे तेल की खरीद जैसे कदम उठाए. इसी वजह से आम लोगों पर ज्यादा बोझ नहीं पड़ा. इसके अलावा भारत ने रूस समेत कई देशों से कम कीमत पर कच्चा तेल खरीदकर घरेलू बाजार को स्थिर रखने की कोशिश की.
आम लोगों पर क्या असर पड़ा?
तेल की कीमतें बढ़ने का असर सिर्फ गाड़ियों तक सीमित नहीं रहता. जब पेट्रोल और डीजल महंगे होते हैं तो ट्रांसपोर्ट का खर्च बढ़ता है. इसका असर खाने-पीने की चीजों, सब्जियों, दूध और रोजमर्रा के सामान पर भी पड़ता है. कई देशों में महंगाई तेजी से बढ़ी और लोगों का घरेलू बजट बिगड़ गया. लेकिन भारत में कीमतें नियंत्रित रहने से बाकी देशों की तुलना में लोगों को थोड़ी राहत मिली.
वैश्विक संकट का असर पूरी दुनिया पर
यह आंकड़े बताते हैं कि युद्ध और अंतरराष्ट्रीय संकट सिर्फ सीमाओं तक सीमित नहीं रहते. उनका असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है. तेल की कीमतें बढ़ने से महंगाई बढ़ती है और इसका सीधा असर आम आदमी की जेब पर दिखाई देता है. हालांकि भारत में बढ़ोतरी कम रही, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक बाजार में अस्थिरता लंबे समय तक बनी रही तो आने वाले समय में कीमतों पर फिर असर पड़ सकता है.