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आतंकी हमले में जिन्होंने अपने सपूत खोए वे चैन से कैसे सोएं?

आतंकी हमले में जिन्होंने अपने सपूत खोए वे चैन से कैसे सोएं?

आतंकियों ने देश को एक ऐसी तकलीफ दी है, जो असहनीय है. सोचिए उन परिवारों पर क्या बीत रही होगी, जिन्होंने अपने जिगर के टुकड़ों को खो दिया. उस पिता पर क्या बीत रही होगी, जिसे अपने बेटे के जनाजे को देना पड़ रहा है कंधा? जिन्होंने अपने सपूत खोए वे आखिर चैन से कैसे सोएं?

The terrorists have given the country such a pain which is unmanageable. Imagine what might have been happening on those families who lost their members. What have been going on with that father, who has to manage his own son funeral? How do the familes could sleep after lost thier apple of eyes?

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