अभिव्यक्ति की आजादी को लेकर अब तक जेएनयू से सरकार और व्यवस्था पर हमले होते रहे, लेकिन इस बार जेएनयू का असहनसीलता के सवालों से पाला पड़ा हैं. अब तक जेएनयू विचारों की आजादी की बात कर रहा था, अब जेएनयू से पूछा जा रहा है कि वहां विचारों की आजादी को क्यों दबाया जा रहा है?