उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन हटाने और 18 मार्च से पहले की स्थिति बहाल करने के हाईकोर्ट के फैसले के बाद मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कैबिनेट की बैठक की. बैठक में ताबड़तोड़ 11 फैसले ले लिए गए. बैठक के बाद हरीश रावत ने बताया कि इन फैसलों को तेजी से लागू करने के निर्देश दिए गए हैं. रावत ने बताया कि राज्य में जल संकट को लेकर मुख्य सचिव के नेतृत्व में कमेटी बनाई गई है.
हरीश रावत ने कहा कि केंद्र को देने का अधिकार है. लेकिन मुझे पूरा भरोसा है कि सुप्रीम कोर्ट से भी उन्हें इस मामले में कोई राहत नहीं मिलने वाली.
Centre has every right to approach SC, but we are confident that they won't get any relief from SC also-Harish Rawat
— ANI (@ANI_news)
रावत ने कहा कि वे अदालत में अपील करें लेकिन संघीय ढांचे के तहत राज्य में सरकार को काम करने दें. उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने जल संकट से निपटने और चार धाम यात्रा के लिए समुचित प्रबंध करने पर फोकस करने का फैसला किया है.
Have also constituted committee under leadership of Chief Secretary to look into water crisis in state-Harish Rawat
— ANI (@ANI_news)
हरीश रावत 29 को बहुमत साबित करेंगे
गुरुवार को नैनीताल हाईकोर्ट ने उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन लगाने के केंद्र के फैसले को खारिज कर दिया था. हाई कोर्ट ने कहा था कि राज्य में 18 मार्च से पहले की स्थिति बनी रहेगी. ऐसे में हरीश रावत एक बार फिर राज्य के मुख्यमंत्री बन गए. 29 अप्रैल को विधानसभा में उनका बहुमत परीक्षण होगा.
न्याय का मजाक होगा
इससे पूर्व उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन पर सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने गुरुवार को फिर सख्त टिप्पणी की. कोर्ट ने पूछा, 'क्या इस केस में सरकार प्राइवेट पार्टी है? जजों ने पूछा, 'यदि कल आप राष्ट्रपति शासन हटा लेते हैं और किसी को भी सरकार बनाने के लिए आमंत्रित कर देते हैं, तो यह न्याय का मजाक उड़ाना होगा. क्या केंद्र सरकार कोई प्राइवेट पार्टी है?'
सुनवाई के दौरान केंद्र को फटकार
नैनीताल हाई कोर्ट की डबल बेंच में सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस के एम जोसेफ ने केंद्र के एडिशनल सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता का पक्ष सुनने के दौरान कई सवाल किए. इस मामले के साथ चल रहे 9 बागी विधायकों के मामले में उनके वकील दिनेश द्विवेदी ने कहा कि यह समस्या कांग्रेस से नहीं बल्कि हरीश रावत और स्पीकर के साथ जुड़ी है, क्योंकि सभी 9 विधायक सदस्यता खत्म करने के बावजूद आज भी कांग्रेस के सदस्य हैं.
उत्तराखंड विधानसभा की मौजूदा स्थिति
राष्ट्रपति शासन हटने पर अब कांग्रेस को 29 अप्रैल को बहुमत साबित करना होगा. विधानसभा की वर्तमान स्थिति इस प्रकार है-
कुल सीटें- 71
कांग्रेस- 36 (9 बागी विधायकों को मिलाकर)
बीजेपी- 27
उत्तराखंड क्रांति दल- 1
निर्दलीय- 3
बीएसपी- 2
बीजेपी निष्कासित- 1
मनोनीत- 1
केंद्र की एनडीए सरकार में सहयोगी शिवसेना ने उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन को लेकर हुए विवाद में केंद्र सरकार पर निशाना साधा है. सामना में लिखे संपादकीय में शिवसेना ने लिखा है कि इस मामले में केंद्र सरकार का वस्त्रहरण तो हुआ ही राष्ट्रपति की प्रतिष्ठा भी धूमिल हुई. शिवसेना ने लेख में लिखा है कि उत्तराखंड मामले में कोर्ट का यह कहना है कि राष्ट्रपति से निर्णय में गलती हुई. इसका मतलब ये है कि मोदी सरकार से गलती हुई. सामना में लिखा है कि आखिरकार मोदी सरकार ने इस फैसले पर मुहर अपने राजनीतिक स्वार्थ के कारण ही लगाया था लेकिन अदालत ने ये कोशिश नाकाम कर दी.