उत्तराखंड की राजनीति और चर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड से जुड़े आरोपों के बीच उभरे विवाद ने एक बार फिर तूल पकड़ लिया है. पूर्व विधायक सुरेश राठौर से जुड़े वायरल ऑडियो-वीडियो प्रकरण में उनकी तथाकथित पत्नी उर्मिला सनावर से एसआईटी ने हरिद्वार में करीब सात घंटे तक मैराथन पूछताछ की. पूछताछ के बाद जहां उर्मिला ने खुद को निष्पक्ष जांच का समर्थक बताते हुए अंकिता भंडारी को न्याय दिलाने की बात दोहराई, वहीं पूर्व विधायक सुरेश राठौर ने पूरे मामले को साजिश, ब्लैकमेलिंग और राजनीतिक षड्यंत्र करार देते हुए कांग्रेस पर गंभीर आरोप लगाए. इस हाई-प्रोफाइल मामले में अब सबकी निगाहें एसआईटी की जांच और सामने आने वाले तथ्यों पर टिकी हैं.
हरिद्वार जनपद में दर्ज विभिन्न मुकदमों को लेकर एसआईटी ने उर्मिला सनावर से करीब 6 से 7 घंटे तक लगातार पूछताछ की. यह पूछताछ पूरी तरह सीसीटीवी कैमरों की निगरानी में हुई. उर्मिला के मुताबिक, कमरे में चार से पांच कैमरे लगे थे और हर सवाल-जवाब रिकॉर्ड हो रहा था. पूछताछ के दौरान उनसे उनके खिलाफ दर्ज मुकदमों, वायरल ऑडियो-वीडियो, उनके स्रोत, समय और संदर्भ को लेकर विस्तार से सवाल किए गए. पूछताछ के बाद बाहर निकली उर्मिला सनावर ने मीडिया से खुलकर बात की. उन्होंने कहा कि एसआईटी ने उनसे जो भी पूछा, उसका उन्होंने हर पहलू से जवाब दिया. उन्होंने सभी ऑडियो रिकॉर्डिंग सौंप दी हैं और यह भी स्पष्ट किया है कि किस रिकॉर्डिंग का समय क्या है. उनके अनुसार, बाकी तकनीकी और अन्य सबूत पूर्व विधायक सुरेश राठौर देंगे.
मैं किसी पार्टी के हाथों नहीं बिकी
उर्मिला सनावर ने अपने वीडियो और बयानों को लेकर उठ रहे सवालों पर तीखी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने साफ कहा कि वह न तो भाजपा के हाथों बिकी हैं और न ही कांग्रेस के. उनके मुताबिक, यह कहना कि उनके तेवर बदल गए हैं या वह किसी सत्ता पक्ष के दबाव में हैं, पूरी तरह भ्रामक और झूठा है. उन्होंने कहा कि उनके पास कई अहम सबूत थे, जिन्हें सुरक्षित रखना जरूरी था. इसी वजह से उन्हें कुछ समय के लिए छुपना पड़ा. उर्मिला का दावा है कि यह छुपना किसी डर की वजह से नहीं, बल्कि रणनीतिक मजबूरी थी. उन्होंने बताया कि उनके खिलाफ हत्या की साजिश तक रची गई थी, जिसके चलते पुलिस की गाड़ियां रात-रात भर उनके घर पहुंचती रहीं.
उर्मिला सनावर ने भावुक होते हुए बताया कि किस तरह उन्हें जान बचाने के लिए एक जगह से दूसरी जगह भागना पड़ा. उन्होंने दावा किया कि 29 दिसंबर को वह शूटिंग से बचते हुए वहां से निकलीं और गुरुद्वारे, फिर रैन बसेरों में शरण ली. उनके अनुसार, नया साल उन्होंने सड़कों पर बिताया. यह सब उनके ईश्वर जानते हैं. उन्होंने यह भी बताया कि एसआईटी जांच के दौरान उनकी तबीयत बेहद खराब थी. उन्हें तेज बुखार और उल्टियां हो रही थीं, इसके बावजूद उन्होंने पूरे समय जांच में सहयोग किया. इसके बाद भी सोशल मीडिया पर उन्हें बिक चुकी बताना उन्हें अंदर तक आहत करता है.
अंकिता भंडारी को न्याय दिलाने की बात
उर्मिला ने दो टूक कहा कि वह अंकिता भंडारी के परिवार के साथ खड़ी हैं. उन्होंने कहा कि अंकिता सिर्फ एक परिवार की बेटी नहीं थी, वह पूरे देश की बेटी थी. उन्होंने दावा किया कि उत्तराखंड की जनता भी सच्चाई के साथ खड़ी है और वह खुद इस उम्मीद पर खरी उतरने की कोशिश करेंगी. उन्होंने पत्रकारों का भी धन्यवाद किया और कहा कि मीडिया अगर इसी तरह सवाल उठाता रहेगा, तो किसी भी बेटी के साथ अन्याय नहीं होगा. उर्मिला के अधिवक्ता अंकुज कुमार ने मीडिया को बताया कि जांच अभी जारी है और वह सवालों के विवरण में नहीं जा सकते. उन्होंने कहा कि जितने भी मुकदमे उर्मिला के खिलाफ दर्ज हैं, उनसे जुड़े जांच अधिकारी पूछताछ कर रहे हैं. पूरी प्रक्रिया कानून के अनुसार और बेहद सौम्य तरीके से की जा रही है. किसी तरह का अमानवीय व्यवहार या दबाव नहीं डाला गया. अधिवक्ता ने स्पष्ट किया कि जहां-जहां गैर-जमानती वारंट या अन्य कानूनी औपचारिकताएं होंगी, उन्हें कानून के तहत निपटाया जाएगा. उर्मिला की ओर से एसआईटी और पुलिस को हर तरह का सहयोग दिया जाएगा.
सुरेश राठौर का पलटवार: यह सब सुनियोजित षड्यंत्र
दूसरी ओर, पूर्व विधायक सुरेश राठौर ने पूरे मामले को एक राजनीतिक और व्यक्तिगत षड्यंत्र करार दिया है. उन्होंने कहा कि आज तक उन्होंने किसी भी नेता, अधिकारी, सरकार या पार्टी के खिलाफ कोई ऑडियो-वीडियो जारी नहीं किया. वह भारतीय जनता पार्टी के निष्ठावान कार्यकर्ता रहे हैं और रहेंगे. राठौर का दावा है कि दो लोगों के बीच हुई निजी बातचीत को साजिश के तहत रिकॉर्ड किया गया, उसमें छेड़छाड़ की गई और एआई तकनीक का इस्तेमाल कर वीडियो तैयार किए गए. उनका कहना है कि इस तरह माहौल खराब करने वालों की पहचान होनी चाहिए और इसकी निष्पक्ष जांच जरूरी है.
सुरेश राठौर ने आरोप लगाया कि उर्मिला सनावर पिछले तीन साल से उनका उत्पीड़न कर रही हैं. उन्होंने बताया कि डेढ़ साल पहले ही उन्होंने इस संबंध में मुकदमा दर्ज कराया था. यदि उस समय उर्मिला से सख्ती से पूछताछ होती, तो आज यह स्थिति नहीं आती. उन्होंने यह भी कहा कि उर्मिला ने उन्हें बार-बार ब्लैकमेल किया, पैसों की मांग की और उनकी सामाजिक व राजनीतिक छवि को नुकसान पहुंचाया. यहां तक कि उनकी फैक्ट्री तक बिकवा देने का आरोप भी उन्होंने लगाया. राठौर ने इस पूरे प्रकरण के पीछे कांग्रेस की साजिश का आरोप लगाया. उनका कहना है कि उर्मिला का कांग्रेस में जाने का इरादा पहले से था और इसी रणनीति के तहत ऑडियो-वीडियो वायरल किए गए. उन्होंने कहा कि अंकिता भंडारी के नाम का इस्तेमाल कर उत्तराखंड का माहौल खराब किया गया और सरकार को बदनाम करने की कोशिश हुई.
मैं न्याय के देवता गोल्ज्यू के दरबार गया हूं
भावुक होते हुए सुरेश राठौर ने कहा कि वह गोल्ज्यू देवता के दरबार में न्याय की गुहार लगा चुके हैं. उन्होंने दावा किया कि वह निर्दोष हैं और दूध का दूध, पानी का पानी जरूर होगा. उन्होंने यह भी कहा कि जब तक वह पूरी तरह पाक-साफ साबित नहीं हो जाते, तब तक अपने धार्मिक वस्त्र भी नहीं पहनेंगे.