उत्तराखंड में प्राकृतिक आपदाओं को देखते हुए जल्द ही छोटे रडार लगेंगे, जिसके लिए मौसम विभाग ने तैयारियां शुरू कर दी हैं. पहाड़ी प्रदेश होने के कारण उत्तराखंड बेहद संवेदनशील रहा है. मौसम विभाग की मानें तो चार धाम में यह रडार लगेंगे, जिसके लिए कागजी तैयारी शुरू कर दी गई है. पूरे उत्तराखंड में तकरीबन 8 छोटे रडार का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है.
उत्तराखंड के बदलते मौसम की जानकारी छोटे डॉपलर रडार से सटीक तौर पर मिल सकेगी. गंगोत्री यमुनोत्री, केदारनाथ, बद्रीनाथ व कुमाऊं में मानसरोवर यात्रा के आसपास का मौसम परिवर्तन छोटा रडार बताएगा. साथ ही देहरादून के इलाकों में भी इस रडार को लगाने की तैयारी चल रही है. बताया जा रहा है रडार की एयर रेंज 25 से 50 किलोमीटर की होगी.
मौसम विभाग को मिलेगी सही समय पर सटीक जानकारी
मौसम विभाग की मानें तो रडार से हिमालयी इलाकों में मौसम की जानकारी समय पर पाने में बड़ी मदद मिलेगी. इसके अलावा छोटे एयर रेंज से लगातार डाटा मिलेगा, जिससे प्राकृतिक आपदाओं से पहले अलर्ट होकर उनसे होने वाले नुकसान को कम करने में आसानी होगी.
मौसम में बदलाव से बढ़ी चिंता
बीते कुछ समय में मैदानी इलाकों में हो रही बारिश और पहाड़ों में हो रही ओलावृष्टि ने पर्यटकों के साथ-साथ सरकार की चिंताओं को भी बढ़ा दिया है. ऐसे में जहां दूरदराज से पर्यटन उत्तराखंड का दीदार करने पहुंच रहे हैं तो अप्रैल के महीने में झमाझम बारिश और पहाड़ो में हुई बर्फबारी सरकार के लिए चिंता का सबब है. मौसम के बदलते मिजाज को देखते हुए उत्तराखंड का आपदा प्रबंधन विभाग और मौसम विभाग चारधाम यात्रा को लेकर अलर्ट मोड पर है.
छोटे रडार से होगा फायदा
बताते चलें कि अभी तक चारधाम के मौसम की सटीक जानकारी देने में टिहरी के सुरकंडा का डॉपलर रडार बोहोत उपयोगी साबित होता है. इस बड़े डॉप्लर रडार की एयर रेंज तकरीबन 100 किलोमीटर की है और एक बड़ा अपडेट मौसम विभाग तक पहुंचाता है. हालांकि छोटे रडार के लगने से चारधाम में होने वाले उन मौसमी परिवर्तन को जानने में और भी सहूलियत होगी.
गौरतलब है कि उत्तराखंड में मौसम का पैटर्न लगातार बदल रहा है और बीते कुछ दिनों में कई जिलों में मौसम का रौद्र रूप देखने को मिला है. उसने लोगों को डरा दिया है. ऐसे में चारों धाम में छोटे रडार लगाने का यह फैसला आपदा सवेंदनशील उत्तराखंड के लिए आने वाले वक्त में एक बड़ी संजीवनी साबित होगा. यह न केवल सटीक जानकारी देगा, बल्कि मौसम विभाग को सही समय पर सटीक आगाह भी करेगा ताकि खतरे के वक्त विपरीत परिस्थितियों से निपटा जा सके.
(इनपुट- सागर शर्मा)