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उत्तराखंड में हाहाकार, हजारों लोगों के मरने की आशंका, राहत और बचाव कार्य में मुश्किल

उत्तराखंड में पहले कुदरत का कहर टूटा और अब खराब मौसम के चलते रेस्क्यू ऑपरेशन में बाधा आ रही है. राहत की बात यह है कि कुछ जगहों पर मौसम ठीक होते ही हेलीकॉप्टर से लोगों को सुरक्षित निकालने की कवायद फिर शुरू हो चुकी है. प्रदेश में मरने वालों की तादाद 150 तक पहुंच गई है. अब भी अलग-अलग इलाकों में 62 हजार लोग फंसे हैं.

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उत्तराखंड में पहले कुदरत का कहर टूटा और अब खराब मौसम के चलते रेस्क्यू ऑपरेशन में बाधा आ रही है. राहत की बात यह है कि कुछ जगहों पर मौसम ठीक होते ही हेलीकॉप्टर से लोगों को सुरक्षित निकालने की कवायद फिर शुरू हो चुकी है. प्रदेश में मरने वालों की तादाद 150 तक पहुंच गई है. अब भी अलग-अलग इलाकों में 62 हजार लोग फंसे हैं.

15 से 20 हजार लोगों की मौत: अश्विनी कुमार चौबे
उत्तराखंड में आए कुदरत के कहर पर बिहार के पूर्व मंत्री अश्विनी कुमार चौबे ने कहा कि प्रशासन ने सही वक्त पर राहत नहीं पहुंचाई. उन्‍होंने कहा कि इस प्राकृतिक आपदा से केदारनाथ में भारी तबाही हुई है और कम से कम 15 से 20 हजार लोगों की मौत होने की आशंका है.

नेशनल हाइवे-87 बंद, गाडि़यां भी फंसीं
अल्‍मोड़ा में जमीन धंसने से गंभीर स्थिति पैदा हो गई है. नेशनल हाइवे-87 बंद हो गया है, जिससे गाड़ियां सड़क पर ही फंस गई हैं.


देहरादून से हेलीकॉप्‍टर ने भरी उड़ान
देहरादून से 2 हेलीकॉप्‍टरों ने फंसे लोगों के बचाव के लिए उड़ान भरी है. अब तक दो दर्जन से ज्यादा हेलीकॉप्टर लोगों को बाहर निकालने का काम कर रहे थे. देहरादून में राहत और अन्‍य मेडिकल साजो-सामानों के साथ सेना तैयार है. अन्‍य भागों में मौसम ठीक होते ही पहाड़ों पर राहत और बचाव का काम शुरू हो जाएगा. सेना ने इसे 'ऑपरेशन सूर्य होप' का नाम दिया है. सबसे ज्यादा दिक्कत केदार और हर्शिल सेक्टर के बीच नैरो वैली इलाके में है. अभी तक हजारों लोग मुश्किल में फंसे हुए हैं.

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रुद्रप्रयाग मंदिर पर भी आफत
बारिश के बाद केदारनाथ घाटी और इसके आसपास के इलाके में भयंकर तबाही हुई है. साथ ही अलकनंदा की गरजती लहरों से रुद्रप्रयाग का मंदिर घिर गया है. तीन दिनों से मंदिर में ही इसके पुजारी फंसे हैं. हरिद्वार में गंगा की लहरें अभी भी उफान पर हैं. लक्सर के बालावाली इलाके में गंगा की लहरों ने किनारों को काट दिया है. सैलाब की वजह से मरम्मत में बाधा आ रही है.

पीडि़तों के लिए मुआवजे का मरहम
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और सोनिया गांधी उत्तराखंड का हवाई दौरा करके हालात का जायजा ले चुके हैं. पीड़ितों के लिए मुआवजे का एलान किया जा चुका है. राहत के लिए 1 हजार करोड़ का फंड दिया गया है. सीएम विजय बहुगुणा ने उत्तराखंड की आपदा को 'हिमालय से आई सुनामी' बताया है. उन्‍होंने कहा कि 100 साल में ऐसी आपदा नहीं देखी. उन्‍होंने औद्योगिक घरानों से भी मदद मांगी है.

कहीं प्रार्थना सभा, कहीं कैंडल मार्च
उत्तरखंड में कुदरत के कहर में मारे गए लोगों की आत्मा की शांति के लिए बिहार के बोधगया में विशेष प्रार्थना की गई. विभिन्न देशों के बौद्ध धर्मगुरुओं ने दुआएं मांगी. उत्तराखंड में मारे गए लोगों के लिए मुरादाबाद में कैंडल मार्च निकाला गया. लोगों ने बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए हाथ बढ़ाया है. ट्रक से खाने का सामान और पानी भेजने की तैयारी की जा रही है.

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हर जगह अपनों से बिछुड़ने का गम
उत्तराखंड की प्राकृतिक आपदा में अपनों से बिछुड़ने की खबरें देशभर से आ रही हैं. अलीगढ़ के एक परिवार के 9 लोग अब भी लापता हैं. इस परिवार के 11 लोग चारधाम की यात्रा पर गए थे. केदारनाथ के गौरी कुंड से गुजरात के नाडियाड के 39 यात्री लापता हैं. 4 दिनों से परिवारवालों से संपर्क नहीं हो पा रहा है. जयपुर में 400 परिवारों ने सरकार से मदद मांगी है. ये परिजनों से संपर्क नहीं होने की वजह से परेशान हैं. राजस्थान सरकार ने भी अपनी टीम उत्तराखंड भेजी है.

दूसरी ओर, यूपी के लखीमपुर खीरी में 19 लोग हेलीकॉप्टर से निकाले गए. घाघरा नदी में आई बाढ़ से भदईपुरवा में दो दिनों से 100 से ज्यादा लोग फंसे थे.

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