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जल प्रलय के बीच भी बचा रहा केदारनाथ मंदिर

आम तौर पर जब लोग मुश्किलों-परेशानियों से घिर जाते है, तो वे मंदिर और भगवान की शरण में जाते हैं. परंतु उत्तराखंड में बारिश और बाढ़ ने कुछ ऐसा कहर बरपाया कि देवताओं के दर पर गए श्रद्धालु अपनी सांसों तक के लिए तरसते नजर आ रहे हैं. इतना ही नहीं, देवताओं के कुछ मंदिर भी जल प्रलय की भेंट चढ़ गए. सुकून की बात यह है कि केदारनाथ जैसे कुछ मंदिर आफत के बीच भी बच गए हैं.

कुदरत का तांडव कुदरत का तांडव

आम तौर पर जब लोग मुश्किलों-परेशानियों से घिर जाते है, तो वे मंदिर और भगवान की शरण में जाते हैं. परंतु उत्तराखंड में बारिश और बाढ़ ने कुछ ऐसा कहर बरपाया कि देवताओं के दर पर गए श्रद्धालु अपनी सांसों तक के लिए तरसते नजर आ रहे हैं. इतना ही नहीं, देवताओं के कुछ मंदिर भी जल प्रलय की भेंट चढ़ गए. सुकून की बात यह है कि केदारनाथ जैसे कुछ मंदिर आफत के बीच भी बच गए हैं.

कुदरत ने सबसे ज्‍यादा तबाही उत्तराखंड में मचाई है. केदारनाथ, बद्रीनाथ, ऋषिकेश, जोशीमठ आदि अनेक पवित्र स्‍थलों के दर्शन करने गए श्रद्धालुओं में से कई की जान चली गई, तो कई अभी भी राहत की बाट जोह रहे हैं.

ऋषिकेश में जो गंगा 'हर हर महादेव' का गान करती हुई, भोले बाबा के चरण पखारा करती थी, उसी गंगा ने महाकाल की प्रतिमा को पूरी तरह से अपनी आगोश में समा लिया है. ऐसा लग रहा है कि अपने लालच में आकर मनुष्‍य ने प्राकृतिक संसाधनों का जिस तरह अंधाधुंध दोहन किया, उससे प्रकृति बुरी तरह कुपित है और इसी का दंड वह किस्‍तों में दे रही है. इंसानों को अब पूजने के लिए देवताओं के मंदिर तक को तरसना पड़ रहा है.

सबसे ज्यादा बर्बादी केदारनाथ में मची है, जहां मशहूर केदारनाथ मंदिर भी आधा मलबे में समा गया है. इसके बावजूद मंदिर बचा रह गया है. मंदिर के आसपास बस तबाही के निशान रह गए हैं. पूरे इलाके में मलबा और पानी बिखरा हुआ है. श्रद्धालुओं को ठहराने के लिए बने होटल और लॉज नेस्तनाबूद हो चुके हैं. अब तक वहां से करीब पचास शव निकाले जा चुके हैं.

बादल फटने से ऐसी तबाही मची कि पूरा केदारनाथ इलाका मटियामेट हो गया. इस बर्बादी के बीच अगर कुछ बचा है, तो वो है भोले शंकर का मंदिर, लेकिन वो भी आधे मलबे में डूबा है. जिस 6 फीट के चबूतरे पर मंदिर बना है, वो कहीं नजर नहीं आ रहा है.

खबर है कि केदारनाथ के पास का रामबाड़ा बाज़ार पूरी तरह बह चुका है. श्रद्धालुओं के रहने के लिए बने लॉज और होटल भी पानी की धार में समा चुके हैं. अब वहां सिवाए मलबे और पत्थरों के और कुछ नजर नहीं आ रहा है इस इलाके में श्रद्धालुओं के लिए बने कई होटल सैलाब में समा गए. हजारों भक्त अभी भी फंसे हुए है.

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