भले ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत रत्न और पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के जन्मदिवस पर उनके नाम पर 100 रुपए का सिक्का जारी कर उन्हें अमर करने का प्रयास किया हो, लेकिन हकीकत में लोगों के जेहन में वाजपेयी की याद को अविस्मरणीय बनाने के लिए जमीन पर जो किया जाना चाहिए वो नहीं हो सका. वाजपेयी का पैतृक गांव बटेश्वर अभी भी प्रस्तावित भव्य स्मारक की बाट जोह रहा है.
दरअसल उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के पैतृक गांव वटेश्वर को 'आदर्श गांव' बनाने का वादा किया था. इसके साथ ही उन्होंने वाजपेयी की 'अस्थि विसर्जन यात्रा' के समापन पर बटेश्वर गांव में उनकी याद में भव्य स्मारक बनाने का भी वादा किया था लेकिन वाजपेयी का गांव अभी भी योगी के वादे के पूरा होने का इंतजार कर रहा है.
गौरतलब है कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के निधन के उपरान्त उनकी अस्थियों को देश भर में प्रवाहित करने के लिए बीजेपी के तमाम मुख्यमंत्रियों ने अपने अपने राज्य में 'अस्थि विसर्जन यात्रा' निकाली थी. इसी क्रम में अलग-अलग मुख्यमंत्रियों ने अपने राज्य में वाजपेयी की याद में तमाम घोषणाएं की थीं.
अटल बिहारी वाजपेयी के पैत्रिक गांव बटेश्वर के रहने वाले भगवान सिंह का कहना है कि मुख्यमंत्री ने तीन महीने पहले कई वादे किए थे, लेकिन इस दिशा में कुछ भी नहीं हो पाया, यहां तक बटेश्वर तक आने वाली सड़कें भी जर्जर अवस्था में हैं. विकास के नाम पर न ही बटेश्वर और न ही बाह तहसील को कुछ मिला. वायपेयी का पैत्रिक आवास खंडहर में तब्दील हो चुका है और टूटी दीवारों में बबूल के पेड़ उग आए हैं. लगता है कि मुख्यमंत्री के वादे भी वाजपेयी की अस्थियों के साथ यमुना में विसर्जित हो गए.
कांग्रेस नेता शब्बीर अब्बास ने कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी का सम्मान हर राजनीतिक दलों के नेता करते हैं. यह देखते हुए दुख होता है कि वाजपेयी की मौत को राजनीतिक फायदे के लिए मीडिया सर्कस बना दिया गया. पीएम मोदी के जुमले की तरह 25 करोड़ रुपये की लागत से बटेश्वर का विकास भी बीजेपी का जुमला बनकर रह गया. लेकिन लोग इस झूठ को समझते हैं और लोगों को बेवकूफ समझने के लिए जनता बीजेपी को सजा जरूर देगी.