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लोकसभा चुनावों का असर, यूपी के गरीब पाएंगे समाजवादी पेंशन

लोकसभा चुनाव की आहट तेज होते ही अखिलेश सरकार ने गरीबों को अपने पाले में करने के लिए बड़ा सियासी दांव चला है. रानी लक्ष्मीबाई पेंशन योजना को बंद कर सरकार वित्तीय वर्ष 2014-15 से प्रदेश के 40 लाख गरीब परिवारों के लिए 'समाजवादी पेंशन योजना' शुरू करने जा रही है.

अखिलेश यादव अखिलेश यादव

लोकसभा चुनाव की आहट तेज होते ही अखिलेश सरकार ने गरीबों को अपने पाले में करने के लिए बड़ा सियासी दांव चला है. रानी लक्ष्मीबाई पेंशन योजना को बंद कर सरकार वित्तीय वर्ष 2014-15 से प्रदेश के 40 लाख गरीब परिवारों के लिए 'समाजवादी पेंशन योजना' शुरू करने जा रही है.

समाजवादी पेंशन योजना का न सिर्फ दायरा बड़ा होगा बल्कि इसके तहत मिलने वाली पेंशन भी अन्य योजनाओं के मुकाबले ज्यादा होगी. समाज कल्याण विभाग के इस प्रस्ताव को मंगलवार को होने वाली कैबिनेट की बैठक में मंजूरी मिल सकती है. 15 जनवरी 2010 को मायावती राज में शुरू की गई महामाया गरीब आर्थिक मदद योजना का नाम बदलकर अखिलेश सरकार ने नौ जुलाई 2012 को रानी लक्ष्मीबाई पेंशन योजना शुरू की थी.

इस योजना के तहत चयनित प्रदेश के 25 लाख परिवारों में से प्रत्येक को दो छमाही किस्तों में 400 रुपये प्रति माह की दर से पेंशन दी जाती है. चुनाव की आहट तेज होते ही अखिलेश सरकार ने इस योजना को समाजवादी रंग में रंगने का फैसला किया है. चुनावी बेला में खुद को गरीबों का खैरख्वाह साबित करने में जुटी सरकार समाजवादी पेंशन योजना के तहत चयनित परिवार को हर महीने ई-पेमेंट के माध्यम से 500 रुपये प्रति माह देगी.

योजना की शर्ते पूरी करने पर हर साल पेंशन में 50 रुपये की बढ़ोत्तरी होगी लेकिन पेंशन की अधिकतम राशि 750 रुपये होगी. जिन परिवारों को रानी लक्ष्मीबाई पेंशन योजना का लाभ मिल रहा हो और जो इस योजना के लिए अयोग्य न हों, उन्हें नई योजना में शामिल किया जाएगा.

इसके अलावा उन गरीब परिवारों को वरीयता दी जाएगी जिनकी मुखिया विधवा या तलाकशुदा महिला या 50 प्रतिशत से अधिक विकलांगता से ग्रसित वृद्घ पुरुष हों.

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