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गोरखपुर: इस गांव के लोग पहली बार चुनेंगे अपनी सरकार, यूपी सरकार ने दिया है अधिकार

यूपी के सीएम योगी ने सरकार बनते ही एक पहल शुरू की और राजस्व गांव बनाया, और सभी योजनाएं अब इन गांवों में दिखने लगीं. गोरखपुर में पांच वनटांगिया गांव हैं, राजस्व ग्राम के निवासी के रूप में इन गांवों के वनटांगिया पहली बार पंचायत चुनाव में अपने गांव की सरकार सुनने जा रहे हैं.

गोरखपुर में 5 वनटांगिया गांव हैं. गोरखपुर में 5 वनटांगिया गांव हैं.
स्टोरी हाइलाइट्स
  • वनटांगियां गांव को योगी ने राजस्व ग्राम घोषित किया था
  • इससे इन गांवों को भी आम गांवों जैसी सुविधा मिलने लगी

उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ के गोरखपुर के वनटांगिया गांव को राजस्व ग्राम घोषित करने के बाद यहां के लोग पहली बार पंचायत चुनाव में सक्रिय भागीदारी निभाकर गांव की सरकार चुनने जा रहे हैं. यानी पहली बार ग्राम प्रधान का चुनाव इस गांव में होने जा रहा है और पहली बार वोट डालने का अधिकार भी उनके हाथों में है.

4 साल पहले की बात करें तो वनटांगिया गांव राजस्व ग्राम के रूप में अभिलेखों दर्ज नहीं किया गया था, जिसकी वजह से सरकार की योजनाओं का भी उनसे कोई वास्ता नहीं था. यूपी के सीएम योगी ने सरकार बनते ही एक पहल शुरू की और राजस्व गांव बनाया, और सभी योजनाएं अब इन गांवों में दिखने लगीं. गोरखपुर में पांच वनटांगिया गांव हैं, राजस्व ग्राम के निवासी के रूप में इन गांवों के वनटांगिया पहली बार पंचायत चुनाव में अपने गांव की सरकार सुनने जा रहे हैं. पिछले चुनाव में इन्हें वोट डालने को भले ही मौका मिला हो, लेकिन खुद का गांव राजस्व ग्राम न होने से गांव की सरकार से इनको कोई फायदा नहीं मिल पा रहा था. जिसका लाभ अब वो अपने गांव की सरकार बना कर उठा पाएंगे.

राजस्व ग्राम घोषित होते ही ये सभी ग्रामीण हर उस सुविधा के हकदार हो गए, जो सामान्य नागरिक को मिलती हैं. सीएम योगी के कार्यकाल में वनटांगिया गांव के लोगों को आंगनबाड़ी, बिजली, सड़क, आवास, पानी, स्कूल, केंद्र और आरओ वाटर मशीन जैसी सुविधाओं से आज पूरा गांव लाभ उठा रहा है. वनटांगिया गांवों में आज सभी के पास पक्का आवास, कृषि, राशनकार्ड, भूमि, रसोई गैस सभी कुछ उपलब्ध है. सभी वनटांगिया गांव के बच्चे स्कूलों में पढ़ रहे हैं. ग्रामीणों को उनके पात्रता के हिसाब से दिव्यांग, वृद्धा, विधवा आदि सभी पेंशन योजनाओं का लाभ मिल रहा है.

अंग्रेजी शासन में 1918 के आसपास बसायी गयी थीं वनटांगियों की बस्तियां
वनटांगिया गांव अंग्रेजी शासन में 1918 के आसपास बसाए गए थे. यानी लगभग 100 साल से ऊपर का समय बीत चुका है. अंग्रेजों के समय में इसका मकसद साखू के पौधों का रोपण कर वनक्षेत्र को बढ़ावा देना था. इन ग्रामीणों के जीवन यापन का एकमात्र सहारा पेड़ों के बीच की खाली जमीन पर खेतीबाड़ी था. गोरखपुर में कुसम्ही जंगल के पांच इलाकों जंगल तिनकोनिया नम्बर 3, रजही खाले टोला, आमबाग नर्सरी, चिलबिलवा और रजही नर्सरी में ये गांव बसे हैं. अस्सी और नब्बे के दशक के बीच ग्रामीणों को इन जंगलों से भी बेदखल करने की कोशिश की गई.

वनटांगियां के लोगो के साथ दिवाली मनाते हैं योगी
गोरखपुर से पहली बार सांसद बनने के बाद योगी वनटांगियों के संघर्ष में साथ देते रहे और उनके हक की आवाज के लिए हमेशा लड़ते भी रहे हैं. वनटांगियों से योगी के दिल में बसा अपार प्यार का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि लगभग 13 वर्षों से उन्हीं के बीच दिवाली मनाते आए हैं और मुख्यमंत्री बनने के बाद भी यह सिलसिला अभी तक नहीं टूटा है. 

 

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