अर्थव्यवस्था में मंदी के बावजूद 2013 में उत्तर प्रदेश के छह प्रमुख शहरों में नवप्रवेशी स्तर की नौकरियों की संख्या में तेजी से बढ़ोत्तरी दर्ज की गई है. उद्योग मंडल 'एसोचैम' के ताजा सर्वेक्षण में यह बात सामने आई है.
एसोचैम की ओर से पूरे देश में नौकरियों के रुझानों के क्षेत्रवार विश्लेषण के नतीजों के मुताबिक कैलेंडर वर्ष 2013 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के अलावा आगरा, अलीगढ़, इलाहाबाद, कानपुर तथा मेरठ में विभिन्न क्षेत्रों में रोजगार के 15 हजार 400 नए अवसर उत्पन्न हुए. वर्ष 2012 में यह आंकड़ा 11 हजार 700 का था. इस तरह यह साल दर साल बढ़ोत्तरी करीब 32 फीसद की रही.
एसोचैम द्वारा मंगलवार को यहां जारी एक बयान के मुताबिक संगठन के राष्ट्रीय महासचिव डी.एस. रावत ने बताया कि अध्ययन में पाया गया है कि रोजगार के इन नए अवसरों में से 82 प्रतिशत हिस्सा नवप्रवेशी स्तर (शून्य से पांच साल के कार्य अनुभव) के मौकों का है.
उन्होंने बताया कि इनमें से ज्यादातर अवसर शिक्षण, आटोमोबाइल, बैंकिंग वित्तीय सेवाओं एवं बीमा, उपभोक्ता वस्तुओं, खुदरा, दूरसंचार, अवस्थापना, रियल एस्टेट तथा इंजीनियरिंग क्षेत्रों में सृजित हुए हैं. एसोचैम के आर्थिक अनुसंधान ब्यूरो ने इस अध्ययन के लिए 4500 कंपनियों की ओर से विभिन्न रोजगार वेब पोर्टल पर डाले गए अवसरों तथा 56 प्रमुख शहरों में 32 क्षेत्रों के लिए विभिन्न अखबारों में छपे विज्ञापनों को आधार बनाया है.
अलीगढ़ के अलावा उत्तर प्रदेश के बाकी पांच प्रमुख शहरों में मध्यम तथा वरिष्ठ स्तर की नौकरियों के नए अवसरों में 16 से 33 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई है. लखनऊ में नई नौकरियों की बढ़ोत्तरी दर में साल दर साल 42 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी दर्ज की गई है. राजधानी में रोजगार के नए अवसरों में से ज्यादातर शिक्षण, अवस्थापना, रियल एस्टेट, इंजीनियरिंग, दूरसंचार, ऑटोमोबाइल तथा उपभोक्ता वस्तुओं के क्षेत्र में उत्पन्न हुए हैं.