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भीम आर्मी का मिशन यूपी- क्या चंद्रशेखर बिगाड़ेंगे पश्चिम यूपी का सियासी समीकरण?

जानकारी मिली है कि चंद्रशेखर जल्द प्रदेश में साइकिल रैली निकालने वाले हैं. वे खुद को बीजेपी का एक मजबूत विकल्प के रूप में दिखाना चाहते हैं.

यूपी की राजनीति में सक्रिय चंद्रशेखर ( फोटो पीटीआई) यूपी की राजनीति में सक्रिय चंद्रशेखर ( फोटो पीटीआई)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • यूपी की राजनीति में सक्रिय चंद्रशेखर
  • भीम आर्मी बदलना चाहती सियासी समीकरण
  • बसपा-सपा से गठबंधन पर बातचीत

देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश में चुनावी सरगर्मी तेज हो गई है और तमाम पार्टियां अपनी रणनीति बनाने में लग गई हैं. बीजेपी खेमे में तो पिछले 15 दिनों से लगातार हलचल जारी है. बैठकों के दौर हो रहे हैं, बड़े नेताओं की मीटिंग चल रही हैं और सीएम योगी भी प्रधानमंत्री मोदी से मिलने वाले हैं. ऐसे में बीजेपी तो चुनावी मोड में आ चुकी है. लेकिन बीजेपी, सपा और बसपा के अलावा इस बार भीम आर्मी भी यूपी चुनाव में अपनी ताकत दिखाने को तैयार दिख रही है. पश्चिमी उत्तर प्रदेश में अपना कद बढ़ाने के लिए पार्टी ने तैयारी शुरू कर दी है.

 चंद्रशेखर बिगाड़ेंगे पश्चिम यूपी का सियासी समीकरण?

जानकारी मिली है कि चंद्रशेखर जल्द प्रदेश में साइकिल रैली निकालने वाले हैं. वे खुद को बीजेपी का एक मजबूत विकल्प के रूप में दिखाना चाहते हैं. लेकिन सवाल तो ये है कि क्या उनका चुनावी मैदान में उतरना बसपा के वोटों को काटने वाला साबित होगा. दोनों बसपा और भीम आर्मी दलित वोटरों पर मजबूर पकड़ रखते हैं, वहीं पश्चिमी उत्तर प्रदेश में इस वर्ग की मौजूदगी भी काफी ज्यादा है, ऐसे में चंद्रशेखर का सक्रिय होना मायवती के लिए भी खतरे की घंटी साबित हो सकता है. इस बारे में भीम आर्मी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष मनजीत सिंह नौटियाल का कहना है कि यह लोगों का आरोप है कि हम दलित वोट बाटेंगे जिससे बीजेपी को फायदा होगा.

हम चाहते हैं कि बहन सुश्री मायावती जल्दी ही औपचारिक रूप से यह ऐलान करें कि वह किसी तरह का गठबंधन चाहती हैं या नहीं. हमारे लिए गठबंधन की पहली प्राथमिकता बहुजन समाजवादी पार्टी और मायावती ही हैं क्योंकि हम दोनों कांशीराम की राजनीतिक विचारधारा को आगे बढ़ाना चाहते हैं. लेकिन अगर बहन जी की ओर से गठबंधन के लिए कोई पहल नहीं की जाती है तो हम समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन करके बीजेपी को हराने के लिए पूरी ताकत लगाएंगे. 

क्लिक करें- छोटा गठबंधन-बड़ा फायदा, यूपी में BJP का फॉर्मूला अपना रहीं विपक्षी पार्टियां 

नोएडा गाजियाबाद से शुरू हुआ पश्चिम उत्तर प्रदेश सहारनपुर से लेकर इटावा तक फैला है जो अकेले ही 165 विधानसभा सीटों को समावेशित करता है. पश्चिम उत्तर प्रदेश में 16 से 17 फ़ीसदी दलित वोटर हैं, 17 से 18 फ़ीसदी मुस्लिम वोटर भी हैं. भीम आर्मी और आजाद समाज पार्टी के प्रमुख चंद्रशेखर  ने पहले ही कह दिया है कि वह सभी पार्टियों के संपर्क में हैं ताकि जमीनी गठबंधन के साथ आगे बढ़ते हुए उत्तर प्रदेश में बीजेपी को हराया जा सके. चंद्रशेखर ने यह भी कहा था कि उनकी तैयारी 403 सीटों पर उम्मीदवार उतारने की है.

सपा संग गठबंधन?

जानकारी यह भी है चंद्रशेखर और उनकी पार्टी के नेताओं ने कुछ समय पहले ही समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव से मुलाकात की है. भीम आर्मी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष मनजीत सिंह नौटियाल भी कहते हैं कि हम अखिलेश यादव से मिले थे ताकि उत्तर प्रदेश में एक सामाजिक आर्थिक न्याय के लिए जमीनी गठबंधन हो जो सब के अधिकारों की लड़ाई लड़ सके.

क्या हैं बड़ी चुनौतियां?

चुनाव और उसके समीकरण हर 5 साल में काफी हद तक बदलते हैं और नए-नए दलों की एंट्री किसी के लिए फायदेमंद तो किसी के लिए नुकसानदायक बनती है. जातीय आधार पर खड़ा एक संगठन और एक चेहरा अब राजनीतिक पार्टी बनाकर चुनावी समर में उतरा है. भीम आर्मी के सपने बड़े हैं और उम्मीदें भी लेकिन जमीनी स्तर पर संगठन, चुनाव लड़ने के लिए पैसा, और एक बड़े दल के साथ गठबंधन उसके लिए सबसे बड़ी चुनौती हैं. और अगर आने वाले समय में इन चुनौतियों पर वह विजय पा लेता है तो पश्चिम उत्तर प्रदेश की राजनीति बेहद दिलचस्प हो जाएगी.

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